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सुंदर पिचाई : भारत के पास डिजिटल पेमेंट की ही तरह एआई में नेक्स्ट-जेन सॉल्यूशन निकालने का मौका

टेक्नोलॉजी में होने वाले बदलाव वैज्ञानिक खोजों को आगे बढ़ाने, इंसानी तरक्की में तेजी लाने और जीवनस्तर को बेहतर बनाने का साधन होते हैं. एआइ से यह सब अप्रत्याशित पैमाने पर होने वाला है और भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभाने के लिहाज से बेहतर स्थिति में है

इलस्ट्रेशन: नीलांजन दास/ एआइ
अपडेटेड 19 जनवरी , 2024

- सुंदर पिचाई
सीईओ गूगल और अल्फाबेट

सन् 2019 में गूगल भारत में छात्रों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एक रीडिंग ट्यूटर ऐप लेकर आया था. एक भरी कक्षा में एआई की मदद से किताबें पढऩे को लेकर बच्चों में नजर आए उत्साह का वह क्षण मैं कभी नहीं भूल सकता. उस समय तक गूगल को टेक्नोलॉजी क्षेत्र में निवेश करते और उसमें हासिल सफलताएं देखते हुए कई साल बीत चुके थे. लेकिन उस दिन कक्षा में नजर आए दृश्य ने मुझे यह एहसास दिला दिया कि जीवन को बेहतर बनाने में एआई की क्षमता कितनी अहम हो सकती है—और इसे सही तरीके से आगे बढ़ाना हमारी महती जिम्मेदारी है.

अब मौजूदा स्थिति पर आते हैं. लाखों लोग जेनरेटिव एआई-आधारित टूल इस्तेमाल कर रहे हैं जो एक साल पहले तक नहीं होते थे. हमारे साथ संवाद में सक्षम एआई इंटरफेस बार्ड जैसे टूल का इस्तेमाल देश के लोग नौ अलग-अलग भारतीय भाषाओं में कर रहे हैं. फिर, अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में तमाम जटिल सवालों का जवाब तलाशने के लिए हमारा जेनरेटिव एआई सर्च इंजन एसजीई है. बहरहाल, हम अभी उस बदलाव के शुरुआती चरण में ही हैं जो नवाचार में नई इबारत लिखने वाला साबित होगा, जिससे आर्थिक प्रगति में तेजी आएगी और हर जगह लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे.

आगे संभावित अवसरों को ध्यान में रखकर ही हमने एआई के प्रति ठोस और जिम्मेदाराना नजरिया अपनाया है. हम यह पक्का करने के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं पर मजबूती से टिके हैं कि हम जिन ऐप्लिकेशन को अपना रहे हैं, वे पूरी तरह उपयोगी हों और व्यापक असर डालने वाली हों. यह काम हम 2018 में निर्धारित एआई सिद्धांतों के अनुपालन के साथ पूरी जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं, जिसमें हमारी प्रतिबद्धता यही रही है कि एआई को हानिकारक दुष्प्रभावों से बचाते हुए समाज की भलाई के लिए विकसित किया जाना चाहिए. हमारा अंतिम लक्ष्य दुनिया में हर किसी के लिए एआई को और अधिक उपयोगी बनाना ही है.

निस्संदेह, एआई हमारे जीवनकाल में अनुभव किया गया सबसे बड़ा बदलाव होगा. भारत में हमें प्रगति के कुछ महत्वपूर्ण वाहक नजर आते हैं जो वाकई अद्भुत हैं: सबसे पहले तो बड़ी तादाद वाली युवा आबादी और उसकी ऊर्जा यह तय कर रही है कि प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कैसे किया जाए. दूसरा, अगले चरण के समाधान तलाशने की दिशा में भारत के पास लंबी छलांग लगाने का भरपूर मौका भी है, जैसा उसने डिजिटल भुगतान के मामले में किया.

इसमें दो राय नहीं कि भारत बुनियादी क्षेत्रों में प्रगति के लिए पहले से ही एआई का इस्तेमाल कर रहा है. लोगों को उनकी अपनी मूल भाषा में कोई जानकारी मुहैया कराना एआई के इस्तेमाल की एक बड़ी मिसाल है. गूगल भारत सरकार के साथ करीब 800 बोलियों का स्पीच डेटा जुटाने और उसे ओपन-सोर्स का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है. वहीं, बेंगलूरू में गूगल रिसर्च टीम एक एकीकृत मॉडल तैयार करने में जुटी है जो 100 से ज्यादा भारतीय भाषाओं में काम कर सकता है.

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी शानदार अवसर उपलब्ध होंगे. गूगल नेत्र रोगों की जांच, टीबी की बीमारी का पता लगाने और जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य में सुधार के लिए एआइ के इस्तेमाल पर अस्पतालों और गैर-लाभकारी संस्थाओं के साथ साझेदारी कर रहा है. भारत में लाखों लोगों के रोजगार के प्रमुख साधन कृषि क्षेत्र में भी सूचना तक पहुंच के लिए एआई का इस्तेमाल बेहद कारगर हो सकता है. मसलन, तेलंगाना सरकार खेत-खलिहानों की सेहत का पता लगाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए गूगल मॉडल का इस्तेमाल कर रही है, और किसानों को व्यक्तिगत तौर पर उनकी फसल की स्थिति पर सटीक जानकारी मुहैया कराने के लिए गैर-लाभकारी संस्था वाधवानी एआई एक ऐप तैयार कर रही है.

जेनरेटिव एआई जिन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मददगार साबित हो सकता है, वह है हर व्यक्ति को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदार बनाना. इसके तहत नागरिक सेवाओं और कार्यक्रमों को देश के अधिकांश लोगों के लिए सुलभ बनाया जाना है. इसके लिए एक समावेशी और बहुभाषी सुपर-ऐप तैयार करने के उद्देश्य से गूगल क्लाउड ने एक्सिस माइ इंडिया के साथ साझेदारी की है, जिसके जरिए लोग सरकारी सेवाओं का आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे, चाहे देश के किसी भी हिस्से में रहते हों या फिर उनकी भाषा कोई भी हो. इस बीच, डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए भारतीय डेवलपर्स और स्टार्ट-अप की 'एआई-फर्स्ट' वाली एक नई पीढ़ी भी उभर रही है. भारत में हमारे स्टार्ट-अप एक्सेलरेटर प्रोग्राम के तहत उद्यमी ऐंटीबॉडी खोजने, शिक्षा सुलभ बनाने, छोटे कारोबारियों को ग्राहकों तक पहुंचने में मदद करने आदि के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं.

भारत में जो नवाचार होते हैं, उनका उपयोग दुनियाभर में किया जा रहा है. हमारे लिटरेसी ऐप का शुरुआती संस्करण अब रीड अलाँग बन चुका है और इस ऑनलाइन ट्यूटर की मदद से दुनियाभर के तीन करोड़ से ज्यादा बच्चों ने पढ़ना-लिखना सीखा है. एआई इस्तेमाल कर पूर्वानुमान लगाने और समय रहते अधिकारियों को संभावित खतरों की सूचना देने वाला हमारा फ्लड हब टूल भारत के बाद 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच चुका है. एक हफ्ते से भी पहले बाढ़ के खतरे के बारे में पूर्वानुमान लगाकर 46 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए मददगार साबित हो रहा है.

भारत यह पक्का करने में भी अहम भूमिका निभाएगा कि एआई का विकास पूरी जिम्मेदारी से किया जाए. गूगल में हम इसके लिए गंभीरता के साथ प्रतिबद्ध हैं. हम सिंथआइडी टेक्नोलॉजी जैसे नए सुरक्षा उपाय ईजाद कर रहे हैं, जो वॉटरमार्किंग और एआई के जरिए तैयार तस्वीरों की पहचान में इस्तेमाल होने वाला टूल है. हम जिम्मेदारी के साथ इस तकनीक पर आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन के लिहाज से सरकार, शिक्षा जगत और विशेषज्ञों को भी शामिल कर रहे हैं. यही वजह है कि हमने जिम्मेदार एआई तकनीक पर अपनी तरह का पहला बहु-विषयक केंद्र स्थापित करने के लिए आईआईटी, मद्रास को 10 लाख डॉलर का अनुदान दिया है. यह सेंटर आगे चलकर एआई विकास की निष्पक्ष, व्याख्यात्मक, गोपनीय और सुरक्षित नींव तैयार करने में मददगार होगा.

टेक्नोलॉजी में हर तरह का बदलाव वैज्ञानिक खोजों को आगे बढ़ाने, इंसानी प्रगति में तेजी लाने और जीवनस्तर बेहतर बनाने का साधन बनता है. लेकिन एआई से यह सब अभूतपूर्व पैमाने पर होगा और भारत इसमें शुरू से ही अग्रणी भूमिका निभाने के लिहाज से बेहतर स्थिति में है. मैं यह देखने को बेताब हूं कि भारत कैसे अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल कर आने वाले वर्षों में नवाचार के स्वर्णिम युग का सूत्रपात करता है.

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