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एआई भारत के विकास में कितना काम आएगा?

आधार और यूपीआई जैसी पहल के साथ पूरी दुनिया के लिए टेम्पलेट तैयार कर रहा भारत डिजिटल सार्वजनिक उत्पादों के नवाचार में अग्रणी भूमिका में है. एआई के जरिये इसका प्रभाव कई गुना बढ़कर असीम अवसर उपलब्ध करा सकता है

इलस्ट्रेशन : नीलांजन दास/एआई
इलस्ट्रेशन : नीलांजन दास/एआई
अपडेटेड 19 जनवरी , 2024

हमने 2023 में एआई की क्षमताओं को परखा और जाना कि यह हम सबके लिए किस हद तक कारगर हो सकता है. हम एक व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं क्योंकि नई पीढ़ी की एआई, कंप्यूटिंग के हर क्षेत्र को बड़े पैमाने पर बदलने जा रही है. यह महज तकनीकी प्रगति भर नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव है. यह हमें ऐसे भविष्य की ओर ले जा रहा है, जिसमें नवाचार ही सबसे ज्यादा मायने रखेगा.

बीते कुछ महीनों में हमने यह महसूस भी किया कि एआई से जीवनस्तर में कितना ज्यादा सुधार आया है. जीपीटी-4 जैसे बुनियादी मॉडल लोगों की आम जीवनचर्चा के सह-चालक बनकर सर्च को रिसर्च के एक अधिक सशक्त टूल में बदल रहे और लोगों की उत्पादकता सुधार रहे हैं. मसलन, अपने 13 वर्षीय बच्चे के अलजेब्रा होमवर्क में सिर धुनने वाले अभिभावकों के लिए एआई-आधारित हेल्प टूल किसी बेहतरीन ट्यूटर से कम नहीं.

माना यही जा रहा है कि एआई की वास्तविक क्षमता दुनिया की कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों का प्रभावी समाधान ढूंढने में निहित हैं. एआई विभिन्न राष्ट्रों और हर तरह के सामाजिक समुदायों के बीच लोकतांत्रिक तरीके से प्रौद्योगिकी को सुलभ बनाने और व्यापक प्रभाव उत्पन्न करने का एक अवसर है. साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, खाद्य सुरक्षा और सतत् विकास जैसी कुछ सबसे गंभीर चुनौतियों का समाधान निकालने में भी मददगार साबित हो सकता है.

संगठनों की बात करें तो एआई कारोबारी दिग्गजों के लिए अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को पुनर्निर्धारित करने, उन्हें सरल बनाने और स्थितियों के अनुकूल ढालने में मददगार होगा, फिर काम चाहे सेल्स, मार्केटिंग से जुड़ा हो या वित्तीय अथवा ग्राहक सेवा का. एआई की मदद से लंबी और बोझिल प्रक्रियाओं से छुटकारा मिलेगा और गति बढ़ाने के साथ इसमें दक्षता भी हासिल की जा सकेगी.

व्यक्तिगत स्तर पर, जेनरेटिव एआई नई चुनौतियों से मानवीय सरलता और पूरी रचनात्मकता के साथ निबटने की आजादी देता है, और दैनिक कार्यों में एक सह-चालक की तरह हर कदम पर सहायक साबित हो सकता है. इससे रोजमर्रा के कार्यों का अनावश्क बोझ घटेगा.

कंप्यूटर आज जिस तरह से हमें सोचने-समझने, कुछ योजना बनाने या अन्य काम निबटाने में मदद करते हैं, उसे यह पूरी तरह बदल देगा. अभी हम कीबोर्ड, माउस या मल्टी-टच के बिना कंप्यूटिंग की कल्पना नहीं कर सकते, ठीक उसी तरह आगे चलकर हम एआइ की सांकेतिक भाषा की मदद लिए बिना संक्षेपण, समीक्षा, संशोधन या अन्य कोई कार्य करने की कल्पना नहीं कर पाएंगे.

भारत के लिए असीम अवसर

आधार और यूपीआई जैसी पहल के साथ पूरी दुनिया के लिए टेम्पलेट तैयार कर रहा भारत डिजिटल सार्वजनिक उत्पादों के नवाचार में अग्रणी भूमिका में है. एआई के जरिये इसका प्रभाव कई गुना बढ़कर असीम अवसर उपलब्ध करा सकता है.

एआई के कारण भारत में संभावित अवसरों पर मैं तीन प्रमुख चीजों को लेकर खासा उत्साहित हूं. पहली बात, इससे हर उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाने और नए व्यवसाय मॉडल स्थापित करने में मदद मिलेगी, जिससे वैश्विक निवेश और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे. दूसरा, एआई लोगों का समय बचाकर उत्पादकता बढ़ाएगा, जिससे उन्हें नवाचार और रणनीतिक समझ बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा. तीसरा, लोकतांत्रिक तरीके से सभी को प्रौद्योगिकी उपलब्ध होने से पूरे भारत में सभी समुदायों का सशक्तीकरण होगा.

आज बैंकिंग, स्वास्थ्य, मैन्युफैक्चरिंग, शिक्षा और सरकारी सेवाओं तक, एआई हर उद्योग में नवाचार की गति बदल रहा है. हम पूरे भारत में कई संगठनों के साथ मिलकर एआइ ऐप्लिकेशन्स पर काम कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को इसमें सक्षम बनाया जा सके. मसलन, माइक्रोसॉफ्ट ने भारतीय भाषाओं में वॉयस-असिस्टेड यात्रा बुकिंग शुरू करने के लिए मेकमाइट्रिप के साथ करार किया है.

इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन का एक अध्ययन बताता है कि कोई कंपनी अगर एआई में एक डॉलर का निवेश करती है तो भारत में उस पर औसतन 3.8 गुना रिटर्न मिलता है. कारोबार के लिहाज से यह अच्छा-खासा लाभ है.

एआई अपनाने के साथ भारत के पास वैश्विक नवाचार और टैलेंट हब बनने की असीम संभावनाएं हैं. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एआई इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, डेवलपर के मामले में यह सबसे आगे है, और यहां एआई टैलेंट की भी कमी नहीं है. इस प्रतिभा के इस्तेमाल से भारत एआई क्षेत्र में सफलता का नया इतिहास लिख सकता है.

जिम्मेदार रवैये की जरूरत

जैसे-जैसे हम एआई आधारित भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, हमें एक जिम्मेदाराना रवैया भी अपनाना होगा. एआई का दुरुपयोग रोकना इसे विकसित करने और लागू कराने वालों के साथ ही इसका इस्तेमाल करने वालों का भी सामूहिक दायित्व है.

यह अहम है कि एआई उत्पादों और सरकारी प्रक्रियाओं में विविध बहु-हितधारक दृष्टिकोण का ख्याल रखा जाए. एआई को लेकर सुरक्षात्मक उपाय करने में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना बेहद जरूरी है, जो प्रौद्योगिकी कंपनियों से इतर उद्योगों, शैक्षणिक समुदाय, नागरिक समाज और सरकार, सबमें होनी चाहिए.

भारत के लिए यह एआई के साथ अपने भविष्य को नए सिरे से निर्धारित करने और समावेशी आर्थिक विकास और प्रगति के लिए अपने लक्ष्यों पर आगे बढ़ने का सबसे उपयुक्त समय है.

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