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डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर बन गया... एआई फिल्म लेखक बन सकता है क्या?

हॉलीवुड लेखकों की हड़ताल ने कहानियां लिखने के लिए एआई के उपयोग के मसले को उठाया. अब भारतीय लेखक समुदाय में भी इसे लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं

इलस्ट्रेशन: नीलांजन दास
इलस्ट्रेशन: नीलांजन दास
अपडेटेड 25 जनवरी , 2024

बतौर एक साइंस फिक्शन फिल्म निर्माता, मैंने सोचा था कि एआई और रोबोट पहले स्पॉट-बॉय की जगह लेंगे जो फिल्म सेट पर कथित 'गैर-रचनात्मक' लोग होते हैं. लेकिन जब एआई का बोलबाला हुआ तो मुझे एहसास हुआ कि असल में यह तो सृजन कर्मियों की जगह लेने जा रहा है! 

मुझे ताज्जुब हुआ कि फिल्म के सेट पर एक स्पॉट-बॉय के पानी पिलाने सरीखे काम की जगह कोई नहीं ले सकता, लेकिन उसके मुकाबले एक लेखक की जगह ले सकता है जबकि वह सपनों की दुनिया बनाता है, मानवीय स्थितियों को देखता-परखता है और संवेदनशील मानवीय भावनाओं की कल्पना करता है.

चार साल पहले, जब मैं अपनी पहली फिल्म, कार्गो (जो नेटफ्लिक्स पर अभी चल रही है और इसमें एक अंतरिक्ष यान है) बना रही थी, तो मुझे कई वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ा. एक तो अंतरिक्ष यान के लिए सीजीआई बनाने की लागत थी और दूसरा फिल्म के लिए जरूरी एक गीत हासिल करने का खर्च था. मैंने मौजूदा समय में (चार साल पहले की तुलना में) उपलब्ध टूल्स का उपयोग यह देखने के लिए किया कि वे क्या मदद कर सकते हैं. एक ऐप था—सुनो एआई—जिसमें मैंने एक ट्रैक के लिए फिल्म की कहानी का सारांश डाला, जो विषय के अनुरूप इससे मेल खाता था. इसने एक गाना बताया जिसके एआई बोल इस प्रकार हैं:

कार्गो हवा में, चढ़ते जाएं
और मुर्दों को, हवाओं से जलाएं
आकाश यात्रा, हमारा हमसफर है
और दुनिया, आज तकलीफों से भरी है

पहला टेक सुनना रोमांचक था, ठीक वैसा ही जैसे मैंने खोज लिया हो कि मेरा कुत्ता 'बैठने' का आदेश जानता है. लेकिन रचनात्मक रूप से यह बहुत प्रभावशाली नहीं था. इसी तरह मैंने चैटजीपीटी से श्रीराम राघवन की कहानियों की तर्ज पर एक अच्छा थ्रिलर प्लॉट देने कहा और वह बुरी तरह विफल रहा. हड़बड़ी में घटिया लेखकों की तरह उसने मौजूदा कहानियों का घालमेल परोस दिया.

मुझे हैरानी हुई कि क्या इन रचनात्मक टूल्स का शुरुआती उत्साह सिर्फ उनके नएपन तक सीमित था. या फिर उनसे बेहतर, अधिक सटीक आउटपुट पाने के लिए नई भाषा सीखने की जरूरत है. बाद में, मैंने अपने पोस्टरों को ज्यादा जीवंत बनाने के लिए विभिन्न एआई टूल का इस्तेमाल किया. जब मैंने अपने ग्राफिक डिजाइनर (इंसान) के बनाए एक पोस्टर का उपयोग इनपुट के रूप में किया तो एआइ टूल ने शानदार नतीजे दिए.

हम सभी यह जानकर चकित थे कि एआई टूल का लक्ष्य शारीरिक श्रम वाली नौकरियों का नहीं, बल्कि अत्यधिक कुशल पेशेवरों का प्रतिरूप बनाना था. हॉलीवुड लेखकों की हड़ताल ने कहानियां लिखने के लिए एआई के उपयोग के मसले को उठाया. भारतीय लेखक समुदाय में भी चिंताएं बढ़ रही हैं. साथ ही, मैं कई स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को जानती हूं जो एआई में डूबे हैं. इससे न केवल वे काम तेजी से करने में सक्षम बनते हैं बल्कि इससे उनकी 'वन-मैन आर्मी' भी मजबूत होती है.

कौन से काम इंसान को करने चाहिए और कौन-से मशीनों को आउटसोर्स होने चाहिए? कला के लिहाज से यह बड़ा सवाल है. मशीनें कहानीकार और चित्रकार हो सकती हैं? इंसान किसी पेंटिंग या कहानी में क्या रंग भरता है? हम इंसानों ने कहानियां तब सुनाना शुरू किया जब हम गुफाओं में रहते थे. लोग किसी अलाव को घेरकर एक-दूसरे की कहानियों से गर्माहट महसूस करते थे. यह रोजमर्रा की बात थी कि जो हमें हर बार कहती थी कि अंधेरे में हम अकेले ही नहीं भटक रहे हैं. वक्त और जगह के अनुसार कहानी कहने की कला बदल गई और हमारी निजी कहानियां एक सामूहिक मोजैक में बदल गईं, जिससे हम अपनी साझा मानवता का अभिन्न हिस्सा बन गए.

लेकिन एक अच्छी कहानी का परिदृश्य बदल गया है. हाल के दिनों में कहानियां 'कंटेंट' बन गई हैं, हमारे घरों में लगातार बहने वाली पाइपलाइन की तरह जिसे हम रोजमर्रा के जीवन में सुनते रहते हैं. एक को खत्म करो और हमारी आंखें तुरंत ही अगली तलाश में लग जाती हैं. इनमें से कुछ कहानियां नीरसता से अलग थीं और उम्मीद की किरण की तरह नजर आईं. फिर भी, एक बड़ी संख्या खुद को उस भीड़ में धंसती हुई देखती है जिसे हम एक्बिएंट टीवी कहते हैं—एक ऐसा क्षेत्र जहां फिल्में और सीरीज धीमे कर्णप्रिय संगीत के समकक्ष बन जाती हैं, जो हमारे रोजमर्रा के शोर के बीच सुखद राहत देता है. 

क्या चैटजीपीटी से परिकल्पित कथानक अच्छे परिवेश को देखने के लिए तैयार होंगे, जो कंटेट पाइपलाइन के लिए न्यूनतम मानदंड है? शायद. लेकिन क्या ये कहानियां हमें मानवता से अधिक जुड़ाव का एहसास कराएंगी? एआई कहानियां लेखकों की हैसियत कम कर देंगी? जवाब है कि अभी इसकी कौन परवाह करता है?

जैसे ही मीडिया में एआई की बात आती है तो मौजूदा स्वरूप में मैं इसे रचनाकारों के सहायक के रूप में देखती हूं. हो सकता है कि एआई टूल्स के साथ कोई लेखक या इंटेलिजेंट इंजनों से संचालित कोई ग्राफिक डिजाइनर विस्मित करने में सक्षम हो. कई एआई इंजीनियर इन टूल्स को 'सह-चालक' के रूप में देखते हैं (या बेचते हैं). शायद यह शब्द उन्हें एक विनम्र आभा देता है.

जहां तक कहानीकारों की जगह लेने की बात है तो मुझे लगता है कि क्या कहानी लिखने और खूबसूरत दुनिया का सृजन करने में सेट पर एक गिलास पानी पिलाने की तुलना में कम मानवीय स्पर्श की जरूरत होगी? या, क्या हम तब भी 'मानव' रहेंगे अगर हमारी कहानियों में हम अपनी इंसानियत, ईमानदारी, खामियों और अनाड़ीपन को अपनाने से इनकार करते हैं?

- आरती कदव, लेखिका, निर्देशक और निर्माता

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