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शांति एकंबरम और रेणुका रामनाथ: जिन्होंने भारत में बैंकिंग की नई बयार का किया नेतृत्व

हमेशा नई चुनौतियां स्वीकारने के लिए डटकर तैयार रहने वालों में शामिल एकंबरम ने 24 साल तक होलसेल बैंकिंग क्षेत्र में काम करने के बाद रिटेल कारोबार संभाला

कोटक महिंद्रा बैंक की पूर्णकालिक निदेशक शांति एकंबरम
कोटक महिंद्रा बैंक की पूर्णकालिक निदेशक शांति एकंबरम
अपडेटेड 11 जनवरी , 2024

उस समय एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) रही कोटक महिंद्रा बैंक में 28वीं कर्मचारी बनने से लेकर इसके 1,00,000 से अधिक मजबूत टीम वाली एक फर्म में तब्दील होने तक की यात्रा में शांति एकंबरम ने एक महारथी की तरह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और इसे पर्सनल फाइनेंस, निवेश बैंकिंग, जीवन बीमा और वित्त प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी बनाया.

अभी वे इसमें पूर्णकालिक निदेशक (नवंबर 2022 से) के तौर पर तैनात हैं, जो राजस्व, डिजिटल और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी (सीएसआर) और पर्यावरण सामाजिक प्रशासन (ईएसजी) सहित अन्य कार्यों की जिम्मेदारी संभालती है. एकंबरम अब कोटक ब्रांड बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि कौन बनेगा करोड़पति में कोटक की ब्रांडिंग के पीछे भी वे ही हैं.

हालांकि, जो उपलब्धि उनके लिए सबसे अधिक मायने रखती है, वह 1999 में हासिल हुई है, जब उन्होंने भारत में बुकबिल्डिंग जैसी वैश्विक प्रथा की शुरुआत की. इसमें अंडरराइटर आइपीओ में शेयर की कीमतें निर्धारित करता है—इस प्रकार यह तय कीमतों की प्रचलित अवधारणा को चुनौती देने वाला कदम था. उस समय जब पूंजी बाजार के तौर पर भारतीय क्षमता पर संदेह किया जाता था, एकंबरम ने कोटक महिंद्रा कैपिटल को देश का नंबर एक निवेशक बैंक बना दिया. वे कहती हैं, "तब शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसने सोचा हो कि हम इसे चला पाएंगे."

हमेशा नई चुनौतियां स्वीकारने के लिए डटकर तैयार रहने वालों में शामिल एकंबरम ने 24 साल तक होलसेल बैंकिंग क्षेत्र में काम करने के बाद रिटेल कारोबार संभाला. वे कहती हैं, "मुझे रिटेल के बारे में कुछ नहीं पता था, इसीलिए बुनियादी बातों से शुरुआत करने की वजह से मुझे यह समझने में ज्यादा आसानी हुई कि ग्राहक क्या चाहता है?"

नवंबर 2016 में नोटबंदी के तुरंत बाद एकंबरम और उनकी टीम ने ग्राहकों को अपनी बचत की डिजिटल एक्सेस में सक्षम बनाने के लिए एक ऑनलाइन बचत खाते पर काम शुरू किया, जिसका नाम उन्होंने 811 रखा. यह नोटबंदी की तारीख का प्रतीक था. नतीजा यह हुआ कि पहले जहां सात दिन में खाता खुलता था, वहीं यह पांच दिन का काम हो गया. उनके मुताबिक, "हमने यह काम 29 मार्च को यानी महज तीन महीने में शुरू किया."

प्रशिक्षित भरतनाट्यम डांसर एकंबरम पहाड़ों में ट्रेकिंग करके काम और निजी जीवन में संतुलन बनाए रखती हैं. उत्कृष्ट टीम-लीडर की तरह वे कोटक में अपने सहयोगियों को 'सबसे बड़ी प्रेरणा' बताती हैं. सफलता का मूल मंत्र? "दृढ़ता के साथ कोई फैसला लेना और फिर उस पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ अमल करना."

रेणुका रामनाथ

रेणुका रामनाथ, सीईओ, मल्टिपल्स अल्टरनेट, एसेट मैनेजमेंट


रेणुका रामनाथ काफी चुनौतियों का सामना करके आगे बढ़ी हैं. 1979 में मुंबई में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग करने का फैसला किया लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी टेक्सटाइल मिल में नौकरी नहीं मिली. रिसर्च की उनकी इच्छा उनके माता-पिता को पसंद नहीं आई, जो विदेश में अकेले रहने के बजाय उनकी शादी होते देखना चाहते थे.

उन्होंने मुंबई में फाइनेंस में एमबीए किया, जहां उन्हें फाइनेंस प्रोजेक्ट, नकदी प्रवाह और वर्क्स जैसे क्षेत्र मिले. क्रॉम्पटन में कुछ समय काम करने के बाद रेणुका 1986 में आईसीआईसीआई (तब यह बैंक नहीं था) से जुड़ गईं, जहां बैंकिंग दिग्गज के.वी. कामथ के मार्गदर्शन में उन्होंने 23 साल पूरी सक्रियता के साथ काम किया.

भारत के निजी इक्विटी क्षेत्र के विस्तार में अपने अहम योगदान की वजह से अलग पहचान बनाने वाली रेणुका कहती हैं, "करीब 40 साल पीछे मुड़कर देखने पर मैं कह सकती हूं कि मेरी नियति अग्रणी भूमिका वाली रही है." उन्हें परामर्श और आईपीओ बिजनेस में डाल दिया गया था, जहां उन्होंने इस क्षेत्र की बारीकियां सीखीं.

निजी जिंदगी में रामनाथ को एक बड़े हादसे का सामना करना पड़ा. वे मात्र 32 साल की थीं और दोनों बच्चे छोटे थे, तभी एक हादसे में उनके पति का निधन हो गया. उन्होंने तय कर लिया था कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य पर इस त्रासदी का कोई असर नहीं पड़ने देंगी और अधिक चुनौतियां और जिम्मेदारियां संभालने के लिए आगे बढ़ीं. वे बताती हैं, "मैंने मन ही मन सोचा...मुझे कड़ी मेहनत करनी होगी. और ज्यादा पैसे कमाने होंगे. मुझे करियर बनाना होगा."

वे आईसीआईसीआई में इक्विटी बिजनेस प्रमुख बनीं और बाद में आईसीआईसीआई वेंचर का नेतृत्व संभाला, जिसमें सभी गैर-बैंकिंग व्यवसाय शामिल हो गए थे. 2009 में उन्होंने आईसीआईसीआई को छोड़ने का फैसला किया, तो उन्हें यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि प्रतिष्ठित वैश्विक संस्थानों सहित कई निवेशक उनका समर्थन करने के लिए तैयार थे. इस तरह, मल्टिपल्स अल्टरनेट एसेट मैनेजमेंट फर्म अस्तित्व में आई. 

मल्टिपल्स अपनी स्थापना के बाद से चार राउंड के फंड क्लोज कर चुका है और मौजूदा समय में उसके पास तीन अरब डॉलर का फंड है. पिछले दो वर्ष में रेणुका रामनाथ ने एक मजबूत टीम तैयार की है. वे कहती हैं, "मैंने अपनी पूरी टीम को यही सिखाया है कि मल्टिपल्स का उद्देश्य केवल कुछ सौदे करना और कुछ पैसे कमाना नहीं है, बल्कि वह संस्था बनना है जो अर्थव्यवस्था का पहिया घुमा सके." मल्टिपल्स ने इस संकल्प को ही अपना आदर्श वाक्य बना रखा है.

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