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रोशनी नाडार और मल्लिका श्रीनिवासन: बिजनेस की विरासत को नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाली बेटियां

मल्लिका श्रीनिवासन और रोशनी नाडार मल्होत्रा, इन दोनों को ही पिता के जमे जमाए बिजनेस की विरासत मिली. दोनों पर ही इसका प्रेशर था. पर इस दबाव के बाद भी ये दोनों ही सहज और सशक्त बनी रहीं

एचसीएल टेक्नोलॉजीज की चेयरपर्सन रोशनी नाडर मल्होत्रा
एचसीएल टेक्नोलॉजीज की चेयरपर्सन रोशनी नाडर मल्होत्रा

जाने-माने उद्योगपति ए. शिवसैलम के घर 1959 में जन्मी मल्लिका श्रीनिवासन ने अपने विशेषाधिकार को कभी सहज और अनिवार्य नहीं माना. मद्रास विश्वविद्यालय और व्हॉर्टन स्कूल ऑफ बिजनेस की पूर्व छात्रा मल्लिका 1986 में पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ीं और ट्रैक्टर्स ऐंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड में, जिसे इसके पहले अक्षरों से मिलकर बने नाम टीएएफई से जाना जाता है, टेक्नोलॉजी से संचालित बड़े कायापलट की अगुआई की. खेती की मशीनें बनाने वाली इस कंपनी को, जिसका मुख्यालय चेन्नई में है, ट्रैक्टरों के बड़े उत्पादक में बदलने के अलावा उन्होंने उसके हितों का अलग-अलग क्षेत्रों में विस्तार किया, जिनमें डीजल इंजन, जेनरेटर, इंजीनियरिंग प्लास्टिक, हाइड्रोलिक पम्प व सिलेंडर, ऑटोमोबाइल फ्रेंचाइजी और वृक्षारोपण शामिल हैं. 

श्रीनिवासन की अगुआई में टीएएफई ने हाल के सालों में कई बड़े अधिग्रहण किए. मसलन, 2022 में 400 करोड़ रुपए के सौदे में फ्रेंच फर्म फौरेशिया का भारतीय कारोबार और उससे पहले 2018 में प्रतिष्ठित सर्बियाई ट्रैक्टर ब्रांड इंडस्ट्रिजा मासिना आइ ट्रैक्टोरा (मशीनरी और ट्रैक्टर उद्योग) खरीदा. टीएएफई आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर बनाने वाली और भारत की दूसरी सबसे बड़ी कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनी है. (इस बीच पति वेणु श्रीनिवासन की अगुआई वाली टीवीएस मोटर्स ने भारत के दोपहिया ब्रांडों में तीसरी सबसे बड़ी बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है.)

श्रीनिवासन कहती हैं, "मुझे पर या मेरी बहन पर पारिवारिक कारोबार से जुड़ने का कोई दबाव नहीं था. मेरे माता-पिता ने पक्का किया कि मुझे अच्छी तालीम मिले. टीएएफई से जुड़ने के बाद मेरे पिता ने केवल इतना कहा कि मैं जो भी करूं उसे कामयाब बनाऊं... और यह कि मुझे ग्रो करना ही चाहिए."

श्रीनिवासन की मार्केटिंग की सूझ-बूझ उन्हें अपनी बनाई चीजों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को सुनने और उसका सम्मान करने के लिए प्रेरित करती है. इसीलिए वे गांव-देहातों का दौरा करते वक्त चाय की दुकानों पर रुक जाती हैं और स्थानीय लोगों से बातचीत करती हैं. वे कहती हैं, "सौंदर्य प्रसाधन बनाना और बेचना उतना ही मुश्किल होना चाहिए जितना ट्रैक्टर बनाना और बेचना. आप जो कर रहे हैं, उसमें आपको मजा आना चाहिए."

कॉर्पोरेट चुनौतियों से निबटने के अलावा श्रीनिवासन अमेरिका-भारत व्यापार परिषद के वैश्विक बोर्ड में और अमेरिका स्थित दिग्गज कंपनी एजीसीओ कॉर्पोरेशन के बोर्ड में शामिल हैं. एजीसीओ के साथ टीएएफई का संयुक्त उद्यम है. वे कई अकादमिक और कारोबारी संस्थाओं में भी हैं. 2021 में वे सरकारी क्षेत्रों में प्रबंधन के शीर्ष पदों पर नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार पब्लिक एंटरप्राइजेज सेलेक्शन बोर्ड के प्रमुख के तौर पर नियुक्त होने वाली निजी क्षेत्र की पहली व्यक्ति बनीं.

समाज को लौटाने के लिए प्रतिबद्ध श्रीनिवासन आंखों की देखभाल करने वाली संस्था शंकर नेत्रालय और कैंसर इंस्टीट्यूट (दोनों चेन्नै में) को सहायता भी देती हैं. दक्षिण तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के आलवारकुरिची में वे शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी योगदान देती हैं.
 

रोशनी नाडर मल्होत्रा, 42 वर्ष
 

एचसीएल टेक्नोलॉजीज की चेयरपर्सन रोशनी नाडर मल्होत्रा खुश हैं. उनके पिता की "मैदान में बने रहो" की सलाह रंग लाती दिख रही है क्योंकि एचसीएलटेक ने वित्त वर्ष 2023 में कुल कमाई 1,01,456 करोड़ रुपए की बुलंदी हासिल की है, जो बीते साल के मुकाबले 18.5 फीसद की वृद्धि है. कंपनी ने हाल ही में प्रबंधित नेटवर्क सेवाओं (एमएनएस) के लिए अमेरिका की वेरिजॉन बिजनेस के साथ 2.1 अरब डॉलर (17,508 करोड़ रु.) का काफी बड़ा सौदा किया है.

रोशनी नाडर मल्होत्रा, अध्यक्ष, एचसीएलटेक

इसके अलावा यूरोप में कंपनी ने जर्मन प्रौद्योगिकी दिग्गज सीमेंस एजी से उसके क्लाउड-आधारित डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को आधुनिक बनाने का करार किया. नाडर कहती हैं, "जब बेजा खर्चे कम हो जाते हैं तो ऐसे बड़े सौदे खुद सामने आते हैं.

यह वृद्धि अलग-अलग उत्पादों और सेवाओं के माध्यम से आगे बढ़ने की हमारी रणनीति का नतीजा है." एक प्रमुख पहल 2018 में आइबीएम सॉफ्टवेयर उत्पादों का अधिग्रहण भी उनके काफी काम आया. अब एचसीएल सॉफ्टवेयर का वार्षिक रिकरिंग राजस्व वित्त वर्ष 23 में 1 अरब डॉलर (8,300 करोड़ रु.) को पार कर गया है. वे कहती हैं, "हमने पूरी लागत वसूल कर ली है."

इस बढ़ोतरी का लाभ कारोबार के शेयरधारकों तक भी पहुंचा है. पिछले चार वर्षों में एचसीएलटेक ने प्रति वर्ष 22.2 प्रतिशत सीएजीआर पर कुल शेयरधारकों को रिटर्न दिया है, जिसके बारे में कंपनी का दावा है कि यह उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच सबसे अधिक है. हालांकि, दो बेटों की मां नाडर नए स्नातकों के लिए चिंता व्यक्त करती हैं क्योंकि आइटी कंपनियां (उनकी कंपनी सहित) मुनाफा बढ़ाने के लिए नियुक्तियां धीमी कर रही हैं. वे कहती हैं, "मैं ऐसा इसलिए कह सकती हूं क्योंकि मैं नियोक्ता हूं और प्रतिभा को मुहैया कराने वाली भी हूं."

तो, क्या एचसीएल फाउंडेशन (कंपनी की सीएसआर शाखा) के अधिकतम असर के उद्देश्य और कंपनी की मुनाफे में बढ़ोतरी के लक्ष्य को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण है? वे कहती हैं, "यह या वह का मामला नहीं है, बस हर दिन को वैसे ही लेना है, जैसी चुनौती वह लेकर आता है."

नाडर अपना 30 फीसद समय कंपनी की परोपकारी पहलों की रणनीति तय करने में लगाती हैं, जैसे प्रतिभाशाली छात्रों के लिए ग्रामीण नेतृत्व अकादमी विद्याज्ञान और वन्यजीव संरक्षण संगठन, द हैबिटेट्स ट्रस्ट. वे बताती हैं, "एचसीएलटेक की स्थापना 25 साल पहले हुई थी, इसलिए सिस्टम और प्रक्रियाएं पक्की हैं. बाकी सब कुछ सिर्फ 12 साल पुराना है, इसलिए वे स्टार्ट-अप मोड में हैं और उन्हें थोड़ी और मदद की जरूरत है."

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