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एक 'इत्तर' सा गमकता सफर

भारत की इत्र राजधानी के नाम से मशहूर कन्नौज में परफ्यूम बनाने वाले 'इंडियन नेचुरल्स' की आठवीं पीढ़ी के वंशज प्रणव कपूर की बदौलत अब सैलानी कन्नौज में परफ्यूम टूर का आनंद उठा सकते हैं

प्रणव कपूर परफ्यूम बार में अपनी पसंद की खास खुशबू तैयार करते हुए
प्रणव कपूर परफ्यूम बार में अपनी पसंद की खास खुशबू तैयार करते हुए
अपडेटेड 17 अक्टूबर , 2023

- प्रिया पथियान

भारत की इत्र राजधानी के नाम से मशहूर कन्नौज में सदियों से तांबे की देग में डिस्टिल कर पारंपरिक तरीके से भीनी-भीनी सुगंध वाला अर्क तैयार होता रहा है. परफ्यूम बनाने वाले 'इंडियन नेचुरल्स' की आठवीं पीढ़ी के वंशज प्रणव कपूर की बदौलत अब सैलानी कन्नौज में परफ्यूम टूर का आनंद उठा सकते हैं. इसमें न केवल पुरातात्विक संग्रहालय और फूलों के बागान की सैर शामिल है, बल्कि कारखानों में इत्र बनने की पूरी प्रक्रिया को देखा जा सकता है. सैलानियों के ठहरने की व्यवस्था 24 एमजी रोड पर कोर्टयार्ड सुइट में की जाती है, जो असल में उनका पैतृक घर है और 1912 से चल रही खानदानी इत्र की दुकान भी है.

कपूर परिवार ऊपर वाली मंजिल में रहता है, जबकि ग्राउंड फ्लोर को मेहमानों के लिए नए सिरे से तैयार किया गया है. इसमें एक फ्रैगरेंस गैलरी, परफ्यूम बार और सुइट बने हैं. यहां आने वाले मेहमान परफ्यूम बार में अपनी पसंद की खास खुशबू तैयार करने के साथ उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री के बारे में जान सकते हैं. प्रणव एक प्रशिक्षित शेफ भी हैं. और कई तरह के लजीज भोजन खुद अपने ही हाथों से तैयार करते हैं. हवेली में अगले साल से और अधिक कमरे उपलब्ध होंगे. साथ ही छठी सदी के कन्नौज की खास खुशबुओं पर आधारित एक सात कमरों वाली प्रॉपर्टी के निर्माण पर भी काम चल रहा है.

टैरिफ: परफ्यूम टूर की लागत 15,000 रुपये. कोर्टयार्ड सुइट में ठहरने का किराया प्रतिदिन 15,000 रुपये है.
संपर्क करें: प्रणव कपूर, +91-8800910920

पुल के आर-पार

अब ग्लास ब्रिज का रोमांचक अनुभव लेने के लिए आपको चीन जाने की जरूरत नहीं है. बस, केरल के वागामोन का रुख करें. भारत के सबसे लंबे ब्रैकट ग्लास ब्रिज को अगस्त में इडुक्की जिले के आकर्षक हिल स्टेशन पर सैलानियों के लिए खोला गया है. 'सुसाइड पॉइंट' (ऐसा विचार मन में कतई न लाएं) पर 40 मीटर लंबा स्काइवॉक ब्रिज जर्मनी से मंगाए गए 40 मिमी वाले ग्लास की पांच परतों से बना है और यहां अद्भुत और मनोरम प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाने का मौका देता है. इसका पूरा खांचा तैयार करने में 3 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है. छह मेटल केबल पुल को पहाड़ के सिरों पर स्टील के खंभों के सहारे जोड़ती हैं. लोगों की मांग को देखते हुए प्रवेश शुल्क घटाकर आधा- 250 रुपए कर दिया गया है.

सैलानियों को लुभाती शांति

युद्ध के बाद शांति का दौर तो लौटता ही है और उम्मीद है कि पर्यटन के सुनहरे दिन भी लौटेंगे. कश्मीर के गुरेज से कारगिल के द्रास सेक्टर में मुश्कोह घाटी तक की सड़क अब सैलानियों के लिए खुल चुकी है. यह मार्ग समुद्र तल से 4,167 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक बेहद खूबसूरत दर्रे काओबल गली से होकर गुजरता है. बेशक, मुश्कोह घाटी वही जगह है जहां कारगिल युद्ध लड़ा गया और 1999 के बाद से ही आम लोगों के यहां आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी. बहरहाल, जंगली ट्यूलिप के मैदानों से घिरी मुश्कोह घाटी का बेहद शांत माहौल अब एक बार लोगों को अपनी ओर खींच रहा है.

आजादी की राह

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी जिलों में एक अनूठी सामुदायिक पहल के तहत दलाई लामा की मार्च 1959 की उस यात्रा का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है जब वे चीनियों की नजरों से बचते-बचाते पूर्वी हिमालय के रास्ते से गुजरे थे. तिब्बती दल खच्चरों पर सवार होकर और कई जगह पैदल चलकर खिनजेमाने सीमा से केलोंग तक पहुंचा और फिर उसने तेजपुर रेलवे स्टेशन तक की यात्रा भी की, और यहीं पर 18 अप्रैल को प्रसिद्ध प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई.

अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू की निगरानी में चल रहे 'प्रोजेक्ट फ्रीडम ट्रेल' के तहत उन 13 स्थानों को चिन्हित किया जाएगा, जहां तिब्बती आध्यात्मिक नेता अपनी यात्रा के दौरान रुके थे, जिन्हें तब नेफा के नाम से जाना जाता था. इन स्थानों पर 12 फीट तक ऊंचे और 7 टन वजन तक के बड़े-बड़े पत्थर लगाए जाएंगे. नगा हिल्स के खोनोमा से काटकर निकाले गए ये पत्थर असल में बोधि लिपि और अंग्रेजी दोनों में यात्रा का ब्योरा बताने वाले शिलालेख हैं. आजादी की राह का अनुभव कराती इन चट्टानों का उद्घाटन वैसे तो नवंबर में होने की संभावना है, लेकिन जेमीथांग से ओरंग तक 447 किलोमीटर लंबा हेरिटेज-एडवेंचर रूट पहले से ही काफी लोकप्रियता बटोर रहा है.

जीवंतता से भरी पहाड़ियां

संगीत के प्रति रुझान रखते हैं तो इन अद्भुत संगीत उत्सवों का लुत्फ उठाने के लिए पूर्वोत्तर का रुख कर सकते हैं.

जीरो फेस्टिवलः 47 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रमों का आयोजन

जीरो फेस्टिवल

इस प्रतिष्ठित उत्सव के 10वें संस्करण में मुख्यधारा के साथ-साथ, इंडियन क्लासिकल, लोक संगीत, ईडीएम और अन्य शैलियों वाले 47 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें 10,000 के करीब श्रोताओं के जुटने की उम्मीद है. हमेशा की तरह दानयी और प्वलो (सूर्य और चंद्रमा) स्टेज के अलावा इस बार एक अतिरिक्त मंच 'तक्वर' भी होगा, जिसका मतलब होता है 'सितारे' और यह शाम 7 बजे से तड़के 3 बजे तक गुलजार रहेगा.

(जीरो, अरुणाचल प्रदेश, 28 सितंबर से 1 अक्तूबर., 4-दिन का पास 8,000 में, प्रतिदिन का 2,500 रुपये में zirofestival.com)

इंडिया विजन—मंडला महोत्सव

दिरांग, अरुणाचल प्रदेश में होने वाले दो दिवसीय ईडीएम और फोक फ्यूजन फेस्टिवल का यह पहला साल है. पूरे भारत के लोक संगीतकारों को एक साथ जोड़ने में स्थानीय मोनपा जनजाति के लखपा त्सेरिंग की अहम भूमिका रही है. त्सेरिंग बताते हैं कि कैसे 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मंडला दर्रे के जंगलों से घिरा मंडला टॉप उत्सव के लिए एक आदर्श जगह है.

(मंडला टॉप, दिरांग, अरुणाचल प्रदेश, 4-5 नवंबर, प्रवेश शुल्क 1,000 प्रति व्यक्ति प्रति दिन www.instagram.com/mandala_)

चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल

शिलांग में चेरी फलने का उत्सव मनाने की जो परंपरा शुरू हुई, वह अब एक फेस्टिवल में तब्दील हो चुकी है. इसमें संगीत, सौंदर्य प्रतियोगिता और पारंपरिक नृत्य से लेकर कॉसप्ले तक सब कुछ शामिल है. इसमें शामिल होने वालों के नाम तय हो चुके हैं: पूर्व बॉयजोन-सिंगर-गॉन-सोलो रोनन कीटिंग, लंदन के डीजे जोनास ब्लू, लोकप्रिय पुर्तगाली लिंकिन पार्क ट्रिक्यूट बैंड हाइब्रिड थ्योरी, ताइवानी ईडीएम स्टार केनी म्यूसिक और डीजे पिंक पांडा. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय लू माजॉ, हिप हॉप और आरएंडबी स्टार मेबा ओफिलिया और रॉक बैंड स्नो व्हाइट भी इसमें बड़ा आकर्षण होंगे.

(शिलांग, मेघालय 17-19 नवंबर तीन दिन का पास 3,000 रुपए. www.shillongcherryblossom.com)

माजुली म्यूजिक फेस्टिवल

पिछले सालों में व्हेन चाय मेट टोस्ट, रेन इन सहारा, गौली भाई और लकी अली की शानदार परफॉर्मेंस के बाद इंडी म्यूजिक फेस्टिवल का चौथा संस्करण तीन स्टेज में 40 शानदार ऐक्ट पेश करने के लिए तैयार है. स्थायी आयोजन बना यह उत्सव स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने को प्रतिबद्ध है.

(माजुली द्वीप, असम, 24-26 नवंबर, खर्च 1,200 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन, majulimusicfestival.com)
 
हॉर्नबिल फेस्टिवल

एक मिसाल बन चुके इस सांस्कृतिक और संगीत महोत्सव का यह 23वां संस्करण होगा. द टास्क फोर्स फॉर म्यूजिक एंड आर्ट (टाफमा), नगालैंड ने इस बार आयोजन के प्रारूप को बदलकर फुल-ऑन हॉर्नबिल म्यूजिक फेस्टिवल कर दिया है. दीमापुर के प्रमुख बैंडों के अलावा मुख्य आयोजन स्थल पर नगा आदिवासी संस्कृति के वास्तविक हॉर्नबिल अनुभव को हासिल कर सकते हैं.

(नगा हेरिटेज विलेज, किसामा, कोहिमा, नगालैंड, 1-10 दिसंबर,  
www.hornbillfestival.com).

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