
- बिजॉय वेणुगोपाल
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, उत्तराखंड
जिम कॉर्बेट 580 से ज्यादा प्रजातियों के साथ अपने समृद्ध पक्षी जीवन के लिए जाना जाता है. यहां जंगलों से लेकर नदी और घास के मैदानों तक प्राकृतिक वास की विशाल विविधता मौजूद है. ढिकाला के मैदान और रामगंगा रिवरबेड सहित पक्षियों के कई ठिकाने हैं. यहां दुर्लभ आइबिस बिल, हिमालयन रूबीथ्रोट और वॉलक्रीपर को देखने की कोशिश कीजिए.
सर्दी का मसौम आ रहा है. पक्षी प्रेमियों के लिए यह गर्म चाय के साथ धूप की आहट सुनने का नहीं, बल्कि महाद्वीप में आने वाले प्रवासी पक्षियों को देखने के वास्ते यात्रा योजना बनाने का वक्त है. जो लोग नहीं जानते, वे जान लें कि बर्डर यानी पक्षियों की स्टडी करने वाले बहुत उत्साही होते हैं. वे देखी-पहचानी गई प्रजातियों की लिस्ट बनाते हैं और उनकी गिनती रखते हैं. जबकि बर्ड वॉचर या पक्षी देखने वाले ज्यादातर पक्षियों को निहारते भर हैं.
बर्डर अक्सर बेहद जुनूनी होते हैं, वे अपनी 'टार्गेट' प्रजातियों को देखने के लिए एक महाद्वीप से दूसरे में पहुंच जाते हैं. हालांकि इस जुनून को क्लाइमेट एक्टिविस्ट खास पसंद नहीं करते. बर्डिंग की लोकप्रियता बढने के साथ ही ऐसी जगहों की संख्या बढ़ी है जहां पक्षी प्रेमी जाना चाहते हैं. कुछ पक्षी प्रेमियों को निराश करने के 'रिस्क' के साथ पेश है देश के प्रमुख पक्षी स्थलों की एक सीमित सूची.
ईगलनेस्ट वाइल्डलाइफ सैंक्चुएरी, अरुणाचल प्रदेश
ईगलनेस्ट पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश के कामेंग एलीफैंट रिजर्व में एक छोटा सा संरक्षित क्षेत्र है. यह 1995 में एक नई पक्षी प्रजाति, बुगुन लिओसिचला की खोज के साथ सुर्खियों में आया. इस चिड़िया का नाम इस क्षेत्र में रहने वाले बुगुन समुदाय के नाम पर रखा गया था. पहाड़ी इलाके में विविध वनस्पतियों वाले इस घने जंगल में वॉर्ड्स ट्रोगोन, स्क्लेटर्स मोनल और रूफस-नेक्ड हॉर्नबिल सहित 450 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं.
हेमिस नेशनल पार्क, लद्दाख
लेह से सिर्फ 10 किमी उत्तर में 4,400 वर्ग किमी का यह विशाल जंगल हिम तेंदुओं या स्नो लेपर्ड के लिए मशहूर है. यह पक्षी प्रेमियों के भी रडार पर है, जो स्नो पार्ट्रिज, स्नो पिजन, लैमर्जियर और हिमालयन स्नोकॉक जैसी ज्यादा ऊंचाई वाली प्रजातियों को देखने के लिए वसंत बीतने और गर्मी के शुरुआती दिनों में आते हैं.
मंगलाजोडी वेटलैंड्स, ओडिशा
मीठे पानी का यह वेटलैंड ओडिशा में देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील चिल्का के ठीक पश्चिम में खोरधा जिले में स्थित है. यहां भुवनेश्वर से सड़क या ट्रेन से आसानी से पहुंचा जा सकता है. मछुआरे उथले पानी वाले दलदल में सर्दी के मौसम में चपटे तल वाली नावें खेते हैं. स्थानीय समुदाय द्वारा संचालित मंगलाजोडी इको-पर्यटन केंद्र सफारी करवाता है. इसके गाइड कभी अवैध शिकारी हुआ करते थे. वे इलाके की अपनी जानकारी का बढिय़ा इस्तेमाल करते हैं. सर्दियों में रूडी शेल्डक, नॉर्दर्न पिंटेल, स्लेटी-ब्रेस्टेड रेल, गैडवॉल, कॉमन टील और ग्लॉसी आइबिस के शानदार नजारों के लिए के लिए मंगलाजोडी जरूर जाएं.
काजीरंगा नेशनल पार्क, असम

एक सींग वाले गैंडे का घर काजीरंगा, पक्षियों के लिए भी इतना ही आकर्षक है. इसके जंगलों, घास के मैदानों और नदी के प्राकृतिक ठिकानों में 470 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां हैं. पक्षी प्रेमी सर्दियों में यहां बंगाल फ्लोरिकन, पेलाज फिश ईगल और स्वॉम्प फ्रैंकोलिन को देखने के लिए आते हैं.
केवलादेव घाना नेशनल पार्क, राजस्थान
यह कभी भरतपुर रियासत की निजी शिकार गाह हुआ करती थी. देश के सबसे मशहूर पक्षी दर्शन स्थलों में से एक केवलादेव घाना का नाम इसके वनक्षेत्र में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर के नाम पर रखा गया है. अंग्रेजों के जमाने में इस वेटलैंड में कितनी तरह की चिड़ियां रहती थीं, इसका अंदाजा शिकार के नाम पर मारे गए जलपक्षियों को दर्ज करने वाली एक पट्टिका से लगता है. यहां दिल्ली, मथुरा और आगरा से सड़क और ट्रेन से आसानी से पहुंच सकते हैं. भरतपुर आने के लिए अक्तूबर से फरवरी तक सबसे बढ़िया मौसम रहता है. लेकिन इस पार्क के मुख्य आकर्षण साइबेरियन क्रेन को दो दशकों से नहीं देखा गया है. वैसे, अन्य प्रजातियों में सारस क्रेन, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, डालमेशियन पेलिकन, यूरेशियन स्पूनबिल और डस्की ईगल-उल्लू शामिल हैं.

सालिम अली बर्ड सैंक्चुएरी, थट्टेकड़, केरल
दिवंगत पक्षी विज्ञानी डॉ. सालिम अली ने सबसे समृद्ध पक्षी आवास के रूप में इस जगह की तारीफ की थी. थट्टेकड़ केरल के एर्णाकुलम जिले में पश्चिमी घाट के पांव पर एक छोटा अभयारण्य है, जो पेरियार नेशनल पार्क के मैदानी इलाके से लगता है. यहां के पर्णपाती जंगल मालाबार ग्रे हॉर्नबिल, श्रीलंका फ्रॉगमाउथ, ब्लैक बाजा, ग्रेट ईयर्ड नाइटजर, रूफस बैबलर और क्रिमसन-थ्रोटेड बारबेट सहित कई तरह की पक्षी प्रजातियों का घर है. जंगल के एंट्रेंस के पास होमस्टे के साथ ही भोजन और रहने की व्यवस्था है और वहीं से विशेषज्ञों की देखरेख में घूमने की सुविधा है.
रंगनाथिटु बर्ड सैंक्चुएरी, कर्नाटक
मैसूरू के पास तेजी से बहने वाली कावेरी नदी के टापुओं की इस शृंखला को 1940 में डॉ. सालिम अली के आग्रह पर संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था. चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों के जंगलों, नदी के रीड बेड और उठी हई चट्टानों वाला ये द्वीप पेंटेड स्टॉर्क, इंडियन रिवर टर्न, ग्रेट थिक-नी, स्पॉट-बिल्ड पेलिकन और स्ट्रीक-थ्रोटेड स्वैलो जैसे पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण प्रजनन स्थल हैं.
नल सरोवर बर्ड सैंक्चुएरी, गुजरात
गुजरात का सबसे बड़ा आर्द्रभूमि या वेटलैंड पक्षी अभयारण्य, नल सरोवर, अहमदाबाद के पश्चिम में सिर्फ एक घंटे की ड्राइव पर स्थित है. यहां 200 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं. पक्षी प्रेमी यहां ग्रेटर फ्लैमिंगो, इंडियन स्कीमर, पाइड एवोसेट और कॉमन क्रेन को देखने के लिए जाड़े के मौसम में आते हैं.
सुंदरबन नेशनल पार्क, पश्चिम बंगाल
गंगा के डेल्टा के घने मैंग्रोव वनों वाला यह संरक्षित क्षेत्र नालों और सहायक नदियों से घिरे 54 द्वीपों में फैला हुआ है. हालांकि इसे राजसी रॉयल बंगाल टाइगर के घर के रूप में जाना जाता है, लेकिन यह अनोखा ईकोसिस्टम है जो मास्क्ड फिनफुट और मैंग्रोव पिट्टा जैसे पक्षियों को पनाह देता है. यह विभिन्न प्रकार की किंगफिशर प्रजातियों को देखने के लिए भी सबसे अच्छी जगह है, जिनमें ब्राउन-विंग्ड किंगफिशर, ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर और कॉलर किंगफिशर शामिल हैं.

एक ओर जहां बर्डिंग से हमें बहुत खुशी मिलती है, वहीं यह समझना जरूरी है कि इंसानी गतिविधियों से चिड़ियों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है. संरक्षण निकायों के कंसोर्शियम की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट, द स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स, 2023, इस गंभीर तथ्य पर जोर देती है कि भूमि-उपयोग परिवर्तन, शहरीकरण, खराब होते ईकोसिस्टम, मोनोकल्चर, बीमारी, बुनियादी ढांचे का विकास, पालतू व्यापार, शिकार, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की वजह से हमारी 39 फीसद चिड़ियों की संख्या तेजी से कम हुई है.
चूंकि बर्डिंग से संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटकों की तादाद बढ़ जाती है, लिहाजा ऑपरेटरों पर पर्यटन गतिविधियों को सस्टेनेबल तरीके से संचालित करने का दबाव रहता है. जिम्मेदार बर्डर घोंसले की फोटोग्राफी, पक्षियों को लुभाने के लिए कॉल प्लेबैक से बचने और अपना कचरा वापस लाने जैसी नैतिक प्रथाओं का पालन करते हुए पक्षियों और उनके पर्यावरण को कम से कम परेशानी के साथ अपने शौक का आनंद लेने की पहल करते हैं. अपने पक्षी गाइड को चुनने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वे नैतिक और जिम्मेदार पर्यटन के लिए सभी जरूरी नियमों का पालन करते हों.
हैप्पी बर्डिंग!

