भारत के बेस्ट कॉलेज 2023 : बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशंस
नं. 1 डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस, क्राइस्ट, बेंगलूरू
अजय सुकुमारन
क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के रिसेप्शन एरिया में रखा इन्फॉर्मेशन कियोस्क, यहां के ऑनलाइन नोटिस बोर्ड, कॉन्फ्रेंस रूम के तय कार्यक्रम और यहां तक कि प्रवेश प्रक्रिया का भी कुछ हिस्सा—ये सब यहां के छात्रों के विकसित किए गए ऐप के इस्तेमाल से चलते हैं. इन ऐप को यहां के कंप्यूटर साइंस विभाग के बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशंस (बीसीए) कोर्स के तीसरे साल के छात्रों ने विकसित किया है. 1990 में स्थापित यह विभाग आज चहल-पहल से भरे कैंपस में अपनी डिजिटल छाप छोड़ रहा है.
विभाग प्रमुख डॉ. अशोक इमैनुएल वी. कहते हैं, ''ढेरों छात्र अब मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने को उत्सुक हैं.’’ वे बताते हैं कि हाल में नेशनल एसेसमेंट ऐंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (एनएएसी या नैक) के दौरे के वक्त आम तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन की जगह अब टैबलेट ने ले ली है, जिसमें बीसीए के तीन छात्रों के हाथों विकसित ऐप पहले से लोड थे. इमैनुएल कहते हैं, ''हमने तो दूसरे विभागों को भी ऐप दिए. यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि थी.’’
इस मोर्चे पर छात्रों की रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल विभाग ने एक्टिविटी क्लब लैबरिंथ का दायरा बढ़ाकर इसमें नए फोकस एरिया शामिल किए, मसलन उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पायथन, इंटरनेट ऑफ थिंग्ज (आपस में जुड़ी डिवाइसेज का नेटवर्क जो इंटरनेट पर एक-दूसरे के साथ संवाद और डेटा का आदान-प्रदान करता है), और दूसरी मोबाइल तथा वेब टेक्नोलॉजी). इमैनुएल कहते हैं, ''प्रोडक्ट्सा डेवलप करने में हमें इसका अच्छा फायदा भी मिला.’’
तो क्राइस्ट के बीसीए कोर्स की खास खूबियां आखिर क्या हैं? डॉ. इमैनुएल इसका जवाब इस तरह देते हैं, ''पाठ्यक्रम, यहां की फैकल्टी और इंडस्ट्री के साथ उसके रिश्ते.’’ फैकल्टी के टीचर नियमित रूप से मिल-बैठकर पाठ्यक्रम पर अच्छे से चर्चा करते हैं और इंडस्ट्री के ताजातरीन रुझानों के साथ उसका तालमेल कायम करते हैं. वे कहते हैं, ''दरअसल, हमने आने वाले सालों के लिए पूरे पाठ्यक्रम को नए सिरे से गढ़ा है.’’
वे यह भी जोड़ते हैं कि इसमें जोर पढ़ाई से हासिल निष्कर्षों को और आगे ले जाने पर है. इसके अलावा प्रैक्टिकल वर्क को ज्यादा तवज्जो दी गई है. ऑग्मेंटेड रियलिटी (एआर)/वर्चुअल रियलिटी (वीआर) और ड्रोन सरीखी उभरती टेक्नोलॉजी की मांग को पूरा करने के लिए यह डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी अब एक अनुसंधान और विकास (रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट) इकाई स्थापित कर रही है. विभागाध्यक्ष इमैनुएल के शब्दों में, ''हमारा सपना है कि छात्र ऊपर गिनाए गए क्षेत्रों में रिसर्च और प्रोजेक्ट के काम हाथ में लें.’’
वे यह भी बताते हैं कि टेक्नोलॉजी से अपडेट रहने और अपने हुनर विकसित करने के लिए शिक्षकों को भी ऑनलाइन कोर्स करने को प्रोत्साहित किया जाता है. वे कहते हैं, ''इंडस्ट्री कनेक्ट वह दूसरा क्षेत्र है जिसमें हम विशेषज्ञों को लाकर छात्र, उद्योग और संस्थान के बीच फासले को कम करने की कोशिश करते हैं.’’
दरअसल, कोरोना महामारी ने इस संस्थान के लिए भी आपदा में अवसर मुहैया करने का काम किया. उसी दौरान रिमोट लर्निंग के अनुभव जोड़े गए थे. इसने संस्था को यह मौका दिया कि वह छात्रों को अलग-अलग तरह के हुनर अपनाने का अभियान लॉन्च करने को प्रेरित करे. इसमें जरूरी किस्म के और एडवांस्ड दोनों तरह के हुनर हों. वाइस चांसलर डॉ. फादर जोसफ सी.सी. बताते हैं कि 2022-23 में पूरी तरह ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने का बदलाव अपनी ही तरह की चुनौतियां लेकर आया. उनके शब्दों में, ''सबसे बड़ी चुनौती तो छात्रों को कैंपस की संस्कृति, यहां की तहजीब समझाने की थी.’’
इस साल कंप्यूटर एप्लिकेशन विभाग से ग्रेजुएशन करने वाले प्रणव प्रकाश का कहना है कि उन्होंने हैकेथॉन और ग्रुप डिस्कशन सरीखे आयोजनों में हिस्सा लिया. और कैंपस में इस तरह की विभिन्न पाठ्येतर गतिविधियों ने सॉफ्टवेयर और सॉफ्ट स्किल्स दोनों को मांजने/चमकाने में उनकी खासी मदद की. वे बताते हैं, ''एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ अपनी दो महीने की इंटर्नशिप के दौरान मुझे खासा समृद्ध करने वाला अनुभव मिला.’’ और फिर उसी कंपनी में उन्हें नौकरी का प्रस्ताव भी मिल गया.
गुरु वाणी
‘‘मोटे तौर पर विश्वविद्यालय और खासकर कंप्यूटर साइंस विभाग का सबसे अहम अप्रोच रहा है दमदार और अपडेटेड पाठ्यक्रम पर. इंडस्ट्री के नए बदलावों को इसमें समाहित किया जाता है. और थियरी की पढ़ाई के दौरान भी हम छात्रों में प्रैक्टिकल अप्रोच विकसित करने पर जोर देते हैं’’
डॉ. फादर जोसफ सी.सी.
वाइस चांसलर, क्राइस्ट
डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी
पूर्व छात्र की राय
‘‘मैं गांव में पला-बढ़ा हूं. मैं एक ऐसे इंस्टीट्यूट में पढ़ा जहां पूरे भारत से लोग कई पहलुओं/विषयों को समेटकर तैयार किया गया बीसीए करने आते हैं. इसमें मनोविज्ञान जैसे विषय भी शामिल हैं. यहां पढऩे से मेरा नजरिया व्यापक हुआ है’’
अल्फ्रेड ओ.वी.
केरल में असिस्टेंट कलेक्टर (अंडर ट्रेनिंग); 2017 बैच
तकनीक में बढ़ते कदम
■ विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक इमैनुएल वी. के मुताबिक, उनका डिपार्टमेंट अब ऑग्मेंटेड रियलिटी और ड्रोन जैसे अनछुए क्षेत्रों में कदम रख रहा है
■ इस साल विभाग ने कंप्यूटेशनल साइंसेज और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज पर पहली इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस की मेजबानी की
■ यहां तक कि एन्न्टिविटी क्लब लैबरिंथ में पूरा फोकस पायथन से लेकर इंटरनेट ऑफ थिंग्ज जैसी नई तकनीकों पर है
छात्रा की राय
‘‘फैकल्टी हमें कई प्रोजेक्ट में भाग लेने के लिए प्रेरित करती है. औद्योगिक अनुभव हासिल करने के भी कई रास्ते हैं ’’ —एबिगेल एना स्मिथ बीसीए, फोर्थ सेमेस्टर

