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जारी है शानदार शो

निरंतर बदलाव से गुजरते मीडिया उद्योग के साथ कदमताल करने के लिए तकनीकी और शैक्षणिक नवाचारों के बल पर आइआइएमसी नई दिल्ली लंबे समय से शीर्ष पर कायम

छात्राओं के साथ प्रोफेसर संजय द्विवेदी, डायरेक्टर जनरल, आइआइएमसी, नई दिल्ली
छात्राओं के साथ प्रोफेसर संजय द्विवेदी, डायरेक्टर जनरल, आइआइएमसी, नई दिल्ली
अपडेटेड 27 जून , 2023

भारत के बेस्ट कॉलेज 2023 : मास कम्युनिकेशन

नं. 1 इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कक्वयुनिकशेन (आइआइएमसी), नई दिल्ली

चार पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए 1965 में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत स्थापित भारतीय जनसंचार संस्थान (आइआइएमसी) के दिल्ली केंद्र में उत्कृष्टताएक आदत है. यह अव्वल संस्थान इंडिया टुडे के बेस्ट कॉलेज सर्वे में पिछले छह साल से जनसंचार संस्थानों के शिखर पर बना हुआ है. यह अकारण नहीं है. हालांकि यह छह कोर्सों में नौ महीने लंबे पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा की पेशकश भी करता है, संचार उद्योग में आइआइएमसी के छात्रों की मांग इन महीनों के दौरान उन्हें मिलने वाले कठोर प्रशिक्षण की वजह से सबसे ज्यादा है.  

बीते सालों में आइआइएमसी का प्रभावशाली प्लेसमेंट रिकॉर्ड इसकी गवाही देता है. इस साल टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टुडे और बिजनेस स्टैंडर्ड सहित 50 से ज्यादा मीडिया घरानों ने जुलाई में कैंपस भर्ती कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है. अंतिम परीक्षा और कैंपस प्लेसमेंट में बैठने से पहले ही छात्रों को नौकरी के व्यक्तिगत ऑफर मिलने लगे हैं. पिछले साल 358 में से प्लेसमेंट अभियान में शरीक होना चुनने वाले 324 छात्रों को नौकरियां मिलीं, जबकि 70 से ज्यादा फर्म ने अभियान में हिस्सा लिया. औसत वेतन पैकेज 4.5 लाख रुपए सालाना था, तो 13 छात्रों को 13 लाख रुपए सालाना की जद में वेतन पैकेज की पेशकश की गई. प्लेसमेंट सेल के प्रमुख प्रोफेसर प्रमोद कुमार इस साल और भी बेहतर आंकड़ों की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि महामारी के बाद उद्योग में ज्यादा अवसर निकल रहे हैं. आइआइएमसी ने छात्रों को नए जमाने की नौकरियों के लिए तैयार करने के लिए तमाम मुमकिन कदम उठाए हैं. मसलन, हाल के सालों में जब ज्यादातर छात्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्मों में नियुक्तियां मिल रही हैं, इसने अपने तीन केंद्रों पर डिजिटल पत्रकारिता का नया कोर्स शुरू किया. हर केंद्र पर इस कोर्स में 20 छात्रों को दाखिला दिया जा रहा है.

बस इतना ही नहीं है. डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने की राह पर अग्रसर यह संस्थान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की अनिवार्यता के अनुरूप पांच नए कोर्स लॉन्च करने के लिए तैयार है. संस्थान सभी कोर्स के पाठ्यक्रम की समीक्षा करता रहा है. जल्द ही यह नई शिक्षा नीति के मुताबिक अकादमिक क्रेडिट प्रणाली शुरू करेगा. आइआइएमसी ने तीन नए प्रकाशन शुरू किए हैं. साथ ही मौजूदा प्रकाशन विषय सामग्री और डिजाइन में सुधार करके फिर से लॉन्च किए गए हैं. 

दरअसल, उद्योग में हो रहे बदलावों के साथ कदमताल करते हुए लगातार नवाचार भी आइआइएमसी दिल्ली की एक पहचान रही है. कैंपस में अत्याधुनिक लाइब्रेरी, दो सभागार, टीवी और कम्युनिटी रेडियो स्टूडियो, हॉस्टल की सुविधा और बहुत-सी प्रयोगशालाएं हैं. प्रत्येक विभाग को एक कंप्यूटर प्रयोगशाला दी गई है. छात्रों को प्रिंट, ऑडियो, टीवी और वेब के तमाम मौजूदा और उभरते एडिटिंग सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण देने के लिए एक नई प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है. महामारी के बाद सारी कक्षाएं 75 लाख रुपए के खर्च से डिजिटल कक्षाओं में बदल दी गईं ताकि स्थिति के हिसाब से भौतिक, वर्चुअल या हाइब्रिड यानी मिश्रित मोड में पढ़ाया जा सके. दिल्ली में हो रहे लेक्चर अन्य केंद्रों के छात्रों को भी सुलभ हैं.

पिछले दो साल में 16 नए संकाय सदस्य संस्थान से जुड़े, जिसके बाद दिल्ली कैंपस में सभी कोर्स में दाखिल 300 से ज्यादा छात्रों के लिए शिक्षकों की कुल क्षमता 27 हो गई. संकाय में अब कोई पद खाली नहीं है. आइआइएमसी के डायरेक्टर जनरल प्रो. संजय द्विवेदी कहते हैं, ''यह देखकर कि केंद्र दो से बढ़कर छह हो गए हैं, हमने सरकार से संकाय को 40 नए पद देने को कहा. मंत्रालय ने तुरंत 20 की मंजूरी दे दी और कहा कि पहले 20 पदों में से 75 फीसद भर जाने पर 20 और पदों की मंजूरी दी जाएगी.''

आइआइएमसी को अपने क्षेत्र का बेहतरीन संस्थान बनाने में शिक्षकों की अहम भूमिका तो है ही, प्रो. द्विवेदी का मानना है कि दिल्ली केंद्र को अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा भी मिलता है. वे कहते हैं, ''यह राष्ट्रीय राजधानी में है, जिसे पत्रकारिता का मक्का माना जाता है. आइआइएमसी के लिए सिखाने-पढ़ाने के बेहतरीन संसाधन हासिल करना आसान है.'' आइआइएमसी के कई पूर्व छात्र उद्योग के स्थापित नाम हैं और गेस्ट फैकल्टी के तौर पर अक्सर कैंपस में आते हैं.

संस्थान में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर 80 से ज्यादा पेशेवर हैं. द्विवेदी कहते हैं, ''तो ऐसा नहीं है कि बस नियमित शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं. उद्योग से जुड़े पेशेवर लोग छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हैं. फोटोग्राफर फोटोग्राफी पढ़ाएगा, टीवी ऐंकर स्क्रीन प्रेजेंस और कैमरे की तरफ देखकर बोलने की बारीकियां प्रदर्शित करेगा.'' दूसरे संस्थानों के विपरीत आइआइएमसी का पाठ्यक्रम व्यावहारिक प्रशिक्षण पर ज्यादा जोर देता है. ग्रेजुएट होने तक छात्रों को फील्ड में काम करने का 360 डिग्री प्रशिक्षण मिल जाता है. हरेक कोर्स इस तरह तैयार किया गया है कि छात्र प्रिंट, टीवी या डिजिटल सभी किस्म के मीडिया में जाने का जोखिम उठा सकें. उद्योग के दिग्गजों के साथ नियमित बातचीत की वजह से आइआइएमसी के छात्र काम के पहले ही दिन किसी भी न्यूजरूम में फिट हो सकते हैं.

आइआइएमसी में दाखिला अब नई केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के जरिए मिलता है. सीयूईटी का विकल्प चुनने से आइआइएमसी को अपने नेटवर्क का विस्तार करने और सबसे दूरदराज के इलाकों के छात्र हासिल करने में मदद मिली. पहले अपने दम पर वह मुट्ठी भर केंद्रों पर प्रवेश परीक्षा आयोजित कर पाता था, जिसकी वजह से दूर दराज इलाकों से आने वाले कई मेधावी छात्रों के छूट जाने का खतरा रहता था. डीन प्रोफेसर गोविंद सिंह कहते हैं, ''अब बैचों में भारत की विविधता की सच्ची झलक मिलने लगी है.''

अलबत्ता भाषा पर छात्रों की पकड़ आइआइएमसी के कर्ताधर्ताओं के लिए गंभीर चिंता का सबब है, जिसकी दोषी स्कूल स्तर की शिक्षा भी है. सीयूईटी का परीक्षा मॉडल छात्रों की भाषा और किस्सागोई के हुनरों को जांचने की गुंजाइश नहीं देता. स्कूल शिक्षा में भाषा पर ध्यान न दिया जाना भी आइआइएमसी के प्रोफेसरों के लिए चीजें और मुश्किल बना देता है. द्विवेदी कहते हैं, ''मैं पूरी जिम्मेदारी से यह बात कह रहा हूं. स्कूलों में जिस किस्म की पढ़ाई हो रही है, छात्र भाषा अच्छी तरह नहीं सीख रहे हैं. माता-पिता और शिक्षक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं. भाषा संचार का प्राथमिक औजार है. हम छात्र को सिखा सकते हैं, पर अपने नौ महीने लंबे कोर्स में भाषा की पढ़ाई की कमियों को नहीं पाट सकते. हम उम्मीद करते हैं कि नई शिक्षा नीति का अमल इस संकट को दुरुस्त करेगा.'' संस्थान अब सीयूईटी से उत्तीर्ण छात्रों के भाषा के हुनर की जांच करने के लिए परीक्षा की एक नई परत जोड़ने पर विचार कर रहा है. 

गुरु वाणी

''आइआइएमसी का जोर थियरी से अधिक प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर है. यहां छात्र इंडस्ट्री के टॉप लोगों से सीखते हैं. इसलिए वे पहले दिन से ही न्यूजरूम के लिए तैयार रहते हैं''
प्रोफेसर संजय द्विवेदी, डायरेक्टर जनरल, आइआइएमसी, नई दिल्ली

पहल
दिल्ली सहित आइआइएमसी के तीन केंद्रों पर डिजिटल पत्रकारिता के नए कोर्स शुरू किए गए

डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने की राह पर बढ़ते हुए आइआइएमसी यूजीसी की तरफ से अनिवार्य पांच नए कोर्स शुरू करने को तैयार 

नई शिक्षा नीति के अनुसार, आइआइएमसी अकादमिक क्रेडिट प्रणाली शुरू करेगा

छात्रों को मौजूदा और उभरते एडिटिंग सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण देने के लिए नई प्रयोगशाला की स्थापना

तीन नए प्रकाशन शुरू किए गए, पुराने प्रकाशनों को नए सिरे से डिजाइन करके दोबारा लॉन्च  किया गया

छात्र की राय
''आइआइएमसी में मिला उद्योग का अनुभव क्लासरूम और न्यूजरूम के बीच का फासला पाट देता है''
मोहित सैनी, रेडियो और टीवी जर्नलिज्म

कोर्स के छात्र

पूर्व छात्र की राय
''आइआइएमसी उन दूसरी संस्थाओं से बहुत अलग और खास है जिनमें मैं पढ़ा हूं. विकासशील देशों के बैचमेट के साथ एक साल बिताने और शानदार रिसोर्स पर्सन व फैकल्टी मेंबर्स से सीखने के बाद मैंने समझा कि संचार विकास का सबसे अहम औजार है''

समुद्र गुप्त कश्यप
राज्य सूचना आयुक्त, असम, विकास पत्रकारिता के लिए पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (1985-86)

आकांक्षी पत्रकारों की चुनौतियां

सबसे बड़ी चुनौती एआइ से है. पत्रकारों को नए हुनरों से लैस होना होगा

पाठक और दर्शक जानकारी की बाढ़ के बीच विश्वसनीयता खोज रहे हैं. पत्रकारों को किस्सागोई की नई शैलियां विकसित करके विश्वसनीयता का निर्माण करते रहना होगा 

पत्रकार को महज वही नहीं देना चाहिए जो पाठक या दर्शक चाहते हैं, बल्कि निरी सूचना और ज्ञान के बीच भेद करने में उनकी मदद करनी होगी. पत्रकारिता को भविष्य में और शिक्षाप्रद होना होगा
प्रो. संजय द्विवेदी, डायरेक्टर जनरल, आइआइएमसी

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