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खाता-बही में सबसे सही

बहस की गुंजाइश, उद्योग से मजबूत रिश्ते, प्रतिभाशाली शिक्षक और भविष्य पर नजर के बूते एसआरसीसी ने साल-दर-साल लहराया परचम.

श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स
अपडेटेड 27 जून , 2023

भारत के बेस्ट कॉलेज 2023 : कॉमर्स

नं.1 श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स

सोनाली आचार्जी
परोपकारी-उद्योगपति सर श्री राम ने 1926 में लेडी श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) की स्थापना की थी और तब से यह कॉलेज अपने क्षेत्र का अगुआ रहा है. इसमें सीट हासिल कर लेने वाले छात्रों को कॉर्पोरेट जगत में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिल जाती है. लेडी श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की प्रिंसिपल सिमरित कौर कहती हैं, ''यहां की डिग्री ज्यादा बड़े-बड़े उद्यमों का प्रवेशद्वार है.’’

अपनी विशेषज्ञता पर नए सिरे से ध्यान देते हुए कॉलेज अब पांच क्षेत्रों का नया ढांचा लेकर आया है. ये हैं—विद्वता, संवर्धन, विस्तार, सशक्तीकरण और पर्यावरण. पढ़ाई-लिखाई में नए प्रतिमान जोड़ने के अभियान के साथ विद्वता यहां लंबे समय से परंपरा रही है. कॉमर्स के लगभग सभी विषयों की बहुत सारी किताबें यहां के शिक्षकों ने लिखी हैं.

विचार और अभिव्यक्ति की ऐसी दोतरफा साझेदारी से छात्रों में अनुशासन के प्रति गहरी समझ और लगाव विकसित होता है. यह कॉलेज अपने छात्रों को लीक से हटकर सोचने और पाठ्यक्रम से आगे जाने के लिए भी प्रोत्साहित करता है. वह सीखने और पाठ्यक्रम को समृद्ध बनाने के लिए बढ़-चढ़कर कदम उठाने में यकीन करता है. कौर कहती हैं, ''हम समकालीन और उभरते विषयों पर शिक्षकों, पूर्व छात्रों, विशेषज्ञों और इन विषयों में अगुआई करने वालों की कई सारी व्याख्यान शृंखलाएं, वक्ता सत्र और कार्यशालाएं आयोजित करते हैं.’’

अकादमिक-उद्योग, अकादमिक-अकादमिक और संस्था के पूर्व छात्रों के बीच संवाद के बल पर छात्र/संकाय शैक्षणिक समुदाय, कॉर्पोरेट जगत, राजनीति, खेल और कला की प्रमुख शख्सियतों से जुड़ पाते हैं. बिजनेस एनालिस्ट के रूप में पेटीएम के साथ काम कर रहे पूर्व छात्र उज्ज्वल शर्मा कहते हैं, ''कॉलेज में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से मिलकर मुझे सचमुच बहुत अच्छा लगता था. गेस्ट लेक्चर सबसे प्रेरक और जानकारी से भरे होते थे.’’ हाल में एसआरसीसी के साथ मिलकर काम करने वाली कुछ प्रमुख संस्थाएं हैं: आरबीआइ एकेडमी, आइसीएलएस एकेडमी और वर्ल्ड बैंक.

सख्त शैक्षणिक दिनचर्या के अलावा एसआरसीसी ने पर्यावरण के लिहाज से जिम्मेदार संस्था होने में खासी दिलचस्पी ली और इसके लिए छात्रों के समर्थन और सहायता की मजबूत व्यवस्था स्थापित की है. इसमें संगी-साथी एक दूसरे का विस्तृत मार्गदर्शन करते हैं. कौर कहती हैं, ''हमने अपनी एनवायरनमेंटल प्रोफाइल बढ़ाने और रोल मॉडल के तौर पर उभरने के लिए बड़े कदम उठाए.’’ पिछले साल एसआरसीसी ने सोलर पावर मॉडल अपनाकर इलेक्ट्रिक ग्रिड पर निर्भरता कम कर ली. उन्होंने इन-हाउस ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली भी विकसित की. बारिश के पानी का संचय भी फिर शुरू किया गया है.

कौर कहती हैं, ''हमारे छात्रों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे अगुआ बनें और जोखिम उठाएं. कॉलेज के शानदार प्लेसमेंट और इंटर्नशिप के अलावा छात्र अपनी उद्यमशील और रचनात्मक ऊर्जा को पाठ्यक्रम में भी बाहर निकलने का रास्ता दे सकते हैं.’’

मगर एसआरसीसी महज पेशेवर की तरह बैलेंस शीट पढ़ना सीखने और कॉलेज के बाद सुनहरे करियर का मंसूबा बनाने की जगह भर नहीं है. यहां 50 से ज्यादा सोसाइटी हैं, जिनके जरिए छात्र अपनी अभिरुचियों को चमका सकते हैं. फिर आश्चर्य क्या कि ग्रेजुएट होने के बाद भी छात्र एसआरसीसी के शिक्षकों और अपने संगी-साथियों के साथ करीबी रिश्ते बनाए   रखते हैं. तीसरे साल के छात्र गौतम जैन कहते हैं, ''मैंने यहां जिंदगी भर के कुछ दोस्त बनाए हैं.’’ वे यह भी कहते हैं कि जिंदगी में आगे तो बढ़ना ही होगा पर वे दिल से हमेशा एसआराइट बने रहेंगे. 

गुरु वाणी
‘‘एसआरसीसी अपनी कर्तव्यनिष्ठा और उच्च शिक्षा के सभी आयामों जैसे सीखना-सिखाना, इसका ढांचा, सामुदायिक जुड़ाव और विकास, जो इस कॉलेज के साझेदारों की बेहतरी से जुड़े हैं, से प्रेरित है’’
सिमरित कौर, प्रिंसिपल, एसआरसीसी

पूर्व छात्र की राय
‘‘एसआरसीसी बहुत ही होशियार छात्रों को अपनी तरफ आकर्षित करता है और इसकी फैकल्टी में बड़े-बड़े नाम शामिल रहे हैं. इतने सालों बाद भी जब मैं खुद को परखता हूं तो मुझे इस कॉलेज की अहमियत समझ आती है’’
पंकज जैन, सचिव, पेट्रोलियम मंत्रालय, 1987 बैच

छात्र की जबानी
‘‘एसआरसीसी में हमें ऐसा नहीं लगता कि हम लेक्चर यूं ही सुने जा रहे हैं. दरअसल, इस दौरान डिस्कशन होते हैं और केस स्टडी, प्रोजेक्ट और अलग-अलग फीडबैक सेशन के जरिए हमें उनसे जोड़ा जाता है. हमें कॉर्पोरेट की दुनिया के बारे में भी जानने का मौका मिलता है ताकि उस हिसाब से हम भविष्य के लिए तैयार हो सकें’’
गौतम जैन. बी.कॉम, थर्ड ईयर
पहल

‘‘केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने एसआरसीसी को तीन प्रोजेक्ट दिए हैं. ये हैं: डेवलपमेंट ऐंड डिसेमिनेशन ऑफ नॉलेज, रिसर्च ऐंड कंपीटेंसीज ऑन इकोनॉमिक हिस्ट्री, और विज्डम ऐंड इकोनॉमिक थॉट ऑफ एंशिएंट इंडिया. एसआरसीसी ने सेंटर फॉर इंडियन इकोनॉमिक हिस्ट्री (सीआइईएच) भी स्थापित किया है

इंडियन कॉर्पोरेट लॉ सर्विस एकेडमी, मानेसर के साथ एक समझौते के तहत एसआरसीसी नई भर्तियों के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार करेगा
एसआरसीसी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के साथ 'सर्ज प्राइसिंग’ पर एक प्रोजेक्ट कर रहा है.
 

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