भारत के बेस्ट कॉलेज 2023 : इंडिया टुडे-एमडीआरए बेस्ट कॉलेज सर्वे, 2023
यह कदम जितना बड़ा था, उतनी धूमधाम से नहीं आया. इससे आखिर देश के कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया का आमूलचूल कायापलट हो जाना तय था. कोविड-19 महामारी की वजह से एक दूसरी क्रांति यानी ऑनलाइन पढ़ाई-लिखाई की तरफ छलांग तो पहले ही लगाई चुकी थी. कोविड के बाद की दुनिया में देश में उच्च शिक्षा के सर्वोच्च शासकीय निकाय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 2022 की गर्मियों में उस बदलाव का सूत्रपात किया जिसे सीयूईटी कहा जाता है और जो कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा) के पहले अक्षरों से मिलकर बना है. इसमें छात्रों की वैचारिक पढ़ाई-लिखाई और तार्किक ढंग से सोचने की क्षमता की जांच की जाती है, उस तोतारटंत पढ़ाई की नहीं, जिसमें उन्हें अंक तो मिल जाते हैं पर समझ नहीं मिलती. राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के जरिए आयोजित इस चयन परीक्षा का नतीजा केंद्रीय विश्वविद्यालयों और दूसरे सहभागी संस्थानों में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिले की कसौटी बनेगा.
सीयूईटी के पहले संस्करण पर कोविड की छाया पड़ गई, जिससे पिछले साल के सत्र में देर हुई. इससे सबक सीखकर देश भर के छात्र इस साल फिर सीयूईटी में बैठे हैं, जिससे उन्हें अपना भविष्य का रास्ता तय करने वाला कोर्स और कॉलेज चुनने में मदद मिलेगी. सीयूईटी के आने से कट-ऑफ अंक की उस व्यवस्था का पटाक्षेप हो गया है, जो हाल के वर्षों में बेतुके स्तर पर पहुंच गई थी. छात्र अब कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में अपने प्रदर्शन के बंधक बनकर नहीं रह जाएंगे. सीयूईटी उन्हें बराबरी का मैदान देता है, ताकि अंक देने की ज्यादा उदार प्रणाली अपनाने वाले बोर्ड के छात्रों को दूसरों पर बढ़त न मिले. इसके बजाए सभी एक रंग-रूप की परीक्षा में बैठें और उन्हें अपनी पसंद का कॉलेज और कोर्स चुनने का समान अवसर मिले. न ही छात्रों और उनके माता-पिता को कॉलेजों में दाखिले के वक्त गर्मियों में बड़े शहरों में डेरा डालना पड़ेगा, इस उधेड़बुन में कि उन्हें उस कॉलेज और कोर्स में दाखिला मिलेगा या नहीं जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया है. छात्र अपने गृहनगर से ही प्रवेश परीक्षा में बैठ सकेंगे और कॉलेज विशेष में दाखिले की तस्दीक होने के बाद ही उन्हें वहां जाना होगा.
सीयूईटी छात्रों को आजादी भी दे रहा है, क्योंकि इसमें वे उन विषयों को चुन सकते हैं जिनमें वे चाहते हैं कि उनका मूल्यांकन हो. वे 10+2 में अपने पढ़ गए विषयों की सूची में से छह अलग-अलग विषयों में इस परीक्षा में बैठ सकते हैं. इसका मतलब है कि वे उन विषयों में परीक्षा दे सकते हैं जिनमें उन्हें लगता है कि वे सहज हैं या जिनमें वे करियर बनाना चाहते हैं. इसका यह भी मतलब है कि छात्रों को न केवल किसी कॉलेज की समग्र प्रतिष्ठा बल्कि उनके संबंधित विभागों की खूबियों और खासियतों के बारे में जानने की भी जरूरत होगी. कोई कॉलेज किसी धारा विशेष में सबसे अच्छा हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि एक विषय विशेष का उसका विभाग भी सबसे अच्छा हो.
इसीलिए इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे ने अपने 27वें संस्करण में एक नई श्रेणी—अलग-अलग विषयों में सर्वश्रेष्ठ कॉलेज—शुरू की है. इस कवायद के पहले साल दो धाराओं कला और विज्ञान के तहत 12 विषयों की पहचान की गई है. ये हैं अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान. मूल्यांकन कॉलेजों की तरफ से दिए गए वस्तुपरक डेटा पर आधारित है.
इस साल हमने 14 मुख्य धाराओं में बेस्ट कॉलेज सर्वे के नतीजे, उनका विश्लेषण और मार्गदर्शन आसानी से सुलभ करवाने के लिए बिल्कुल नया ऑनलाइन पोर्टल (https://bestcolleges.indiatoday.in) भी शुरू किया है, जिस पर संवाद और पूछताछ भी की जा सकती है. पोर्टल पर कॉलेजों की पिछले छह साल की रैंकिंग भी दिखाई गई है. इस पर न केवल समग्र रैंक देखा जा सकता है, बल्कि गुणवत्ता के पांच व्यापक मानदंडों—भर्ती की गुणवत्ता और प्रशासन, अकादमिक उत्कृष्टता, बुनियादी ढांचा तथा रहन-सहन का अनुभव, व्यक्तित्व तथा नेतृत्व विकास, और प्लेसमेंट तथा करियर—पर चुनिंदा कॉलेजों की एक-दूसरे से तुलना भी की जा सकती है.
पोर्टल दर्शकों को कोर्स, एडमिशन फीस, कट-ऑफ, प्लेसमेंट, फैकल्टी और इंडस्ट्री कनेक्ट से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए कॉलेजों के अलग-अलग पन्नों पर भी ले जाएगा. यह सब इसे जानकारियों और विश्लेषण का ऐसा कुबेर का खजाना बना देता है, जो हरेक संबंधित व्यक्ति को कॉलेज का सही आकलन करने में मदद कर सकता है.
ताजातरीन घटनाक्रमों से हमेशा बाखबर रहने और उनके मुताबिक निरंतर बदलाव की यह कोशिश इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे को देश भर के कॉलेजों का विश्वसनीय और सिलसिलेवार आकलन बना देती है. इसे प्रतिष्ठित मार्केट रिसर्च एजेंसी मार्केटिंग ऐंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट (एमडीआरए) ने अंजाम दिया है. इस काम में दो दशकों के अनुभव के बाद यह सर्वे उच्च शिक्षा संस्थानों की रैंकिंग के मामले में निर्णायक और अंतिम निष्कर्ष के रूप में उभरा है.
यह सर्वे एक और किस्म की तालीम भी देता है. यह इस बात का भी खाका खींचता है कि देश में उच्च शिक्षा की संस्थाएं कहां-कहां स्थित हैं. इससे क्षेत्रीय असमानता की तस्वीर फौरन साफ हो जाती है. तमाम स्ट्रीम के टॉप 10, टॉप 25 और टॉप 50 कॉलेजों में सबसे ज्यादा राष्ट्रीय राजधानी के कॉलेज हैं, जो दिल्ली को देश में उच्च शिक्षा का केंद्र बना देते हैं. फिर कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरू है. तिस पर भी उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2020-21 के मुताबिक, 180 कॉलेजों के साथ कॉलेजों का सबसे कम घनत्व, बिहार के साथ, दिल्ली में है—18 से 23 बरस की हर 1,00,000 आबादी पर महज आठ. इसके विपरीत, 1,058 कॉलेजों के साथ बेंगलूरू अर्बन देश का सबसे ज्यादा कॉलेजों वाला जिला है.
सबसे परेशान करने वाली हकीकत यह है कि देश के 700 से ज्यादा जिलों में महज 50 में 32 फीसद कॉलेज हैं. यकीनन यह चिंता का विषय है. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि कॉलेजों के घनत्व के लिहाज से राज्यों में कर्नाटक सबसे आगे है, जहां 18 से 23 बरस की हर 1,00,000 आबादी पर 62 कॉलेज हैं. अच्छा होगा कि सरकारें और नीति-निर्माता इस पर ध्यान दें और उच्च शिक्षा की गुणवत्तापूर्ण संस्थाओं के क्षेत्रीय बंटवारे में समानता लाने की दिशा में काम करें.
इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे अपेक्षाकृत नए कॉलेजों पर भी रोशनी डालता है, खासकर इसी शताब्दी यानी पिछले दो दशकों में स्थापित कॉलेजों पर, जिन्होंने लगातार बढ़ता सुधार दिखाया है. बड़े शहरों के कॉलेज या ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध कॉलेजों को दरअसल किसी परिचय की जरूरत नहीं. मगर किसी कॉलेज की उम्र का उसकी प्राचीरों के भीतर दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता पर असर नहीं होता.
हमारा सर्वे इस बात का सटीक आकलन प्रस्तुत करता है कि हाल के वर्षों में किसी कॉलेज ने कैसा प्रदर्शन किया, वह अपनी प्रतिष्ठा और कीर्ति के सहारे ही हैं या भविष्य की कामयाबियों के लिए भी कुछ कर रहा है. सर्वे की रैंकिंग को ज्यादा समावेशी बनाने के लिए देश के बहुत-से श्रेणी 2 और श्रेणी 3 के शहरों के टॉप तीन कॉलेजों को भी शामिल किया गया है. इसलिए हैरानी नहीं कि इसमें शामिल होने वाले कॉलेजों की संख्या बीते पांच साल में लगभग दोगुनी यानी 2018 में 988 से इस साल 1,715 हो गई है.
शिक्षाविद् मानते हैं कि इस कवायद ने यहां तक कि छोटे शहरों के कॉलेजों के बीच भी प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा की है और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी है. इसका फायदा अंतत: देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र के साथ ही छात्रों और देश को होगा. 1997 से ही, जब हमारा यह सफर शुरू हुआ, जिस बात ने हमें प्रेरित किया, वह यह है कि देश के कॉलेजों में हो रहे सकारात्मक बदलावों को पकड़ना और उनके बीच प्रतिस्पर्धा को इस तरह बढ़ावा देना ताकि वे सामूहिक उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ें और बेहतर शिक्षा दें.
सर्वेक्षण की पद्धति
कॉलेजों की रैंकिंग इस तरह की गई
देश के 43,000 से ज्यादा कॉलेजों के साथ इंडिया टुडे ग्रुप की कॉलेज रैंकिंग छात्रों के लिए करियर का बेहद अहम फैसला आसान बनाने और नियोक्ता, अभिभावक, पूर्व छात्र, नीति-निर्माता, आम जनता तथा संस्थाओं सरीखे तमाम संबंधित लोगों और निकायों को रास्ता दिखाने का प्रयास करती है. 2018 से यह सर्वे दिल्ली स्थित मार्केट रिसर्च एजेंसी मार्केटिंग ऐंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट्स (एमडीआरए) के साथ मिलकर किया जा रहा है. इस साल जमीनी काम दिसंबर 2022 और जून 2023 के बीच किया गया. कॉलेजों को 14 स्ट्रीम—कला, विज्ञान, कॉमर्स, मेडिकल, डेंटल साइसेंज, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, लॉ, मास कम्युनिकेशन, होटल मैनेजमेंट, बीबीए, बीसीए, सोशल वर्क और फैशन डिजाइन—में रैंक दी गई.
निष्पक्ष और वस्तुपरक रैंकिंग के लिए एमडीआरए ने प्रत्येक स्ट्रीम के 112 से ज्यादा प्रदर्शन संकेतकों को चुस्त-दुरुस्त किया और पांच व्यापक मानदंडों—'प्रवेश गुणवत्ता और ऌप्रशासन', 'अकादमिक उत्कृष्टता', 'बुनियादी ढांचा और रहन-सहन का अनुभव', 'व्यक्तित्व और नेतृत्व विकास' और 'करियर में प्रगति और प्लेसमेंट'—के तहत एकत्र किया. कॉलेजों का आकलन इस पर भी किया गया कि उन्होंने महामारी से निबटने की तैयारी कैसे की.
वास्तविक, प्रासंगिक और सटीक जानकारी के लिए एमडीआरए ने मौजूदा साल के डेटा के आधार पर कॉलेजों का मूल्यांकन किया और हरेक मानदंड पर उन्हें अंक दिए. इसके अलावा, इस साल के सर्वे में कॉलेजों को उनकी तरफ से दिए गए वस्तुपरक डेटा के आधार पर अर्थशास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, हिंदी और संस्कृत सरीखे मुख्य विषयों में रैंक दी गई.
रैंकिंग देने का काम कई चरणों में किया गया.
प्रत्येक स्ट्रीम में कॉलेजों की सूची तैयार करने के लिए एमडीआरए के डेटा आधार की विस्तृत डेस्क समीक्षा और फिर दोबारा रिसर्च की गई. उन्हीं कॉलेजों पर विचार गया जो पूर्णकालिक और कक्षाओं में चलाए जा रहे कोर्स पेश करते हैं, और 2022 तक ग्रेजुएट हो चुके तीन बैच निकाल चुके हैं. 12 स्ट्रीम में अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए रैंक दी गई. मास कम्युनिकेशन और सोशल वर्क में पोस्टग्रेजुएट कोर्स का मूल्यांकन किया गया.
विभिन्न स्ट्रीम के मानदंडों और उप-मानदंडों को तैयार करने के लिए अपने क्षेत्र का समृद्ध अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों से सलाह ली गई. बेस्ट कॉलेजों के निर्धारण के लिए बेहद अहम संकेतक सावधानी और सतर्कता से तय किए गए और उनके सापेक्ष भारांश को अंतिम रूप दिया गया. सालाना आधार पर निष्पक्ष तुलना के लिए मानदंडों के पिछले दो साल के भारांशों में कोई बदलाव नहीं किया गया.
सभी 14 स्ट्रीम में प्रत्येक के लिए विस्तृत वस्तुपरक प्रश्नावली तैयार की गई जो इंडिया टुडे तथा एमडीआरए की वेबसाइटों पर सार्वजनिक कर दी गई. एमडीआरए ने योग्यता की कसौटी पूरा करने वाले करीब 10,000 कॉलेजों से संपर्क किया और वस्तुपरक डेटा मांगा. सत्यापित हार्ड और सॉफ्ट प्रतियां मांगी गई और पिछले साल से 101 ज्यादा कुल 1,715 योग्य कॉलेजों ने समय सीमा के भीतर सांस्थानिक डेटा और उसके साथ ढेरों समर्थक दस्तावेज प्रस्तुत किए.
सर्वे में कॉलेजों से वस्तुपरक डेटा प्राप्त करने के बाद एमडीआरए ने जानकारियों का सत्यापन किया और डेटा के नाकाफी/गलत या पुराना होने पर फिर कॉलेजों का दरवाया खटखटाया.
धारणात्मक सर्वे 27 शहरों में 1,861 लोगों (585 वरिष्ठ संकाय सदस्य, 309 नियोक्ता/पेशेवर, 393 करियर एक्सेलेटर और 574 अंतिम वर्ष के छात्र) के बीच किया गया. शहर चार क्षेत्रों में बंटे थे—
उत्तर: दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, लखनऊ, कोटा, अमृतसर, चंडीगढ़, लुधियाना और रुड़की
पूर्व: कोलकाता, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, पटना और रायपुर
पश्चिम: मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, इंदौर, पणजी और नागपुर
दक्षिण: चेन्नै, बेंगलूरू, हैदराबाद, कोच्चि और कोयंबत्तूर
उनसे संबंधित अनुभव क्षेत्र की राष्ट्रीय और क्षेत्रीय रैंकिंग ली गई और उसे क्रमश: 75 फीसद और 25 फीसद भारांश दिए गए. उन्होंने पांचों प्रमुख मानदंडों में से प्रत्येक पर 10 अंकों के पैमाने पर संस्थाओं का आकलन भी किया.
वस्तुपरक अंकों की गणना में संचित डेटा का ही इस्तेमाल नहीं किया गया. निष्पक्ष तुलना के लिए छात्रों की संख्या के आधार पर डेटा को सामान्य बनाया गया. अंतिम अंक निकालने के लिए वस्तुपरक और धारणात्मक सर्वे से प्राप्त कुल अंकों को 11 पेशेवर कोर्स के लिए 60:40 के अनुपात में और कला, विज्ञान तथा कॉमर्स के अकादमिक कोर्स के लिए 50:50 के अनुपात में जोड़ा गया.
शोधकर्ताओं, सांख्यिकीविदों और विश्लेषकों की विशाल टीम ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया.
एमडीआरए टीम में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अभिषेक अग्रवाल की अगुआई में डायरेक्टर अविनाश झा, असिस्टेंट रिसर्च मैनेजर वैभव गुप्ता, रिसर्च एग्जीक्यूटिव आदित्य श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव-ईडीपी मानवीर सिंह थे.

