scorecardresearch

मजबूत नींव पर

आइआइटी रुड़की के आर्किटेक्चर और प्लानिंग डिपार्टमेंट की भविष्य पर पूरी नजर. इसने सस्टेनबिलिटी को अपने शैक्षणिक अभ्यास का हिस्सा बनाया

नं. 1. डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर ऐंड प्लानिंग, आइआइटी रुड़की
नं. 1. डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर ऐंड प्लानिंग, आइआइटी रुड़की
अपडेटेड 27 जून , 2023

भारत के बेस्ट कॉलेज 2023 : आर्किटेक्चर

नं. 1. डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर ऐंड प्लानिंग, आइआइटी रुड़की

प्रशांत श्रीवास्तव
आइआइटी रुड़की के वास्तुकला और योजना यानी आर्किटेक्चर और प्लानिंग विभाग की स्थापना साल 1956 में हुई थी और यह देश में बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (बीआर्क) की डिग्री देने वाले सबसे पुराने संस्थानों में से एक है. इस विभाग में फिलहाल 164 छात्र-छात्राएं बीआर्क की पढ़ाई, 50 छात्र-छात्राएं मास्टर्स प्रोग्राम और 117 छात्र-छात्राएं डॉक्टरल रिसर्च कर रही हैं. मजबूत सांस्थानिक सहायता, अत्यंत हुनरमंद फैकल्टी और अपनी सृजनात्मकता के लिए मशहूर छात्र समुदाय. इसी बूते पर यहां का ईको सिस्टम असल में अब नई से नई उन्नत टेक्नोलॉजी के हिसाब से खुद को ढालने के लिए कमर कसकर तैयार है.

आइआइटी रुड़की के डायरेक्टर प्रो. के.के. पंत कहते हैं, ''आइआइटी रुड़की का आर्किटेक्चर और प्लानिंग विभाग भारत में आर्किटेक्चर की शिक्षा और अभ्यास के भविष्य को गढऩे के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. अपने 65 से ज्यादा वर्षों के समृद्ध इतिहास के साथ इस विभाग ने ऊंची गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने और प्रतिभाशाली पेशेवरों को तैयार करने की वजह से शानदार प्रतिष्ठा हासिल की है.

बहुविषयक पाठ्यक्रम छात्र-छात्राओं को विस्तृत ज्ञान से लैस करता है और टिकाऊ डिजाइन पर जोर देश के भविष्य के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का उदाहरण पेश करता है. इस विभाग ने दिखा दिया है कि देश में आर्किटेक्चर की शिक्षा, रिसर्च और नवाचार में उसे निर्णायक स्थान हासिल है, और वह ऐसे प्रोफेशनल्स तैयार करने को बेसब्र है जो भविष्य के लिए वास्तव में समावेशी और टिकाऊ एजेंडा गढ़ेंगे.’’

आर्किटेक्चर और प्लानिंग विभाग में इंटरडिसिप्लिनरी नजरियों के साथ कई चीजों पर पूरा ध्यान दिया जाता है: जलवायु परिवर्तन से लेकर ऊर्जा संरक्षण और धरोहर वाली चीजों तक; सामाजिक समावेशीकरण से लेकर भविष्य में बनने वाले वास्तु ढांचों सरीखी विभिन्न शहरी और भवन निर्माण से संबद्ध पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े अनुसंधान तक.

अपनी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए इस विभाग के पास कुछ बेहतरीन सुविधाएं हैं. वर्चुअल कोलैबरेटिव टूल्स ने चीजों को अंजाम देने का एक रचनात्मक रास्ता निकाला है. इसके कैंपस में मौजूद सुविधाओं में अत्याधुनिक उपकरणों और सॉफ्टवेयरों से लैस जलवायु विज्ञान लैब, आर्ट लैब और कंप्यूटर लैब शामिल हैं. कार्यशालाओं के लिए भी यहां काफी जगह है.

जलवायु विज्ञान की दिशा में नए पहलू के रूप में नेट जीरो इमिशन लैब और खुल गई, जो भारत-ब्रिटिश कार्यक्रम की सहायता से स्थापित की गई है. अन्य छह नई प्रयोगशालाएं भी काम करने लगी हैं, जिनमें वर्चुअल रियलिटी लैब, एसपीएआरएसएच या स्पर्श (स्पेशियल प्लानिंग रिसर्च) के लिए लैब, शहरी डाइनैमिक्स, सिविक डिजाइन, औद्योगिक डिजाइन, समावेशी डिजाइन (एलआइडी) और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग के लिए अलग-अलग लैब शामिल हैं.

इस क्षेत्र में अपने रिसर्च और प्रोफेशनल कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए यहां की फैकल्टी ने तरह-तरह की कई परियोजनाएं हाथ में ली हैं. कई सारी नेट जीरो लैब के लिए कई अंतरराष्ट्रीय करार किए गए हैं. यह असल में जीरो नेट एनर्जी वाली इमारतों की अवधारणा है. इसमें किसी इमारत में ऊर्जा की कुल सालाना खपत उसी में पैदा होने वाली अक्षय ऊर्जा के बराबर होती है. इस तरह के आपसी संवाद विभाग में एक उम्दा तालीम की बुनियाद का निर्माण करते हैं.

इस आर्किटेक्चर और प्लानिंग विभाग में केवल सबसे प्रतिभावान और हकदार छात्रों का ही दाखिला सुनिश्चित करने के लिए आइआइटी रुड़की काफी कठोर चयन प्रक्रिया का पालन करता है. आर्किटेक्चर और प्लानिंग विभाग के प्रमुख प्रो. गौरव रहेजा का कहना है, ''हमारा नजरिया शैक्षिक, ज्ञानवर्धक और परस्पर संवाद से सीखने वाला होता है.

और इसे हम आर्किटेक्चर और प्लानिंग तक ही सीमित नहीं रखते बल्कि वे कई तरह के आधुनिक ज्ञान हासिल करते हैं. इसके जरिए वे दुनिया में वास्तविक जिंदगी की चुनौतियों का मुकाबला कर पाएंगे. इसके अलावा उद्योग के साथ हमारा काफी अच्छा इंटरफेस है. यहां के मददगार पूर्व छात्र-छात्राएं, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का शानदार समूह, इस तरह की सभी चीजें मिलकर इसके कैंपस के माहौल को अनुकूल और मिलनसार बनाती हैं.’’

गुरु वाणी
‘‘आर्किटेक्चर की पढ़ाई में हमारा नजरिया शैक्षिक, ज्ञानवर्धक और परस्पर संवाद से सीखने वाला होता है. इसको दरअसल छात्र-छात्राओं को जिंदगी की चुनौतियों का मुकाबला करने में मदद मिलनी चाहिए’’
प्रो. गौरव रहेजा
एचओडी, डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर ऐंड प्लानिंग, आइआइटी रुड़की

क्या है खास
■ कई देशों के साथ नेट जीरो लैब के लिए अंतरराष्ट्रीय करार. फैकल्टी ने दक्षिण कोरिया और भूटान में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन दिए
■ फरवरी में एसएमयूएस (स्पेशल मेथड फॉर अर्बन सस्टेनेबिलिटी) पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की मेजबानी की, जिसमें 30 देशों ने हिस्सा लिया
■ टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन, यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो और यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा सहित कई विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ करार
■ हर साल तीन छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत स्विट्जरलैंड की एचएसएलयू यूनिवर्सिटी जाते हैं
■ आर्किटेक्चर विभाग को पिछले साल सबसे ज्यादा संख्या में प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (पीएमआरएफ) मिलीं

पूर्व छात्र की राय
‘‘बीआर्क प्रोग्राम ने डिजाइन और ग्राफिक कम्युनिकेशन सहित विभिन्न विषय क्षेत्रों में एकेडमिक क्रेडिट मुहैया की. एकेडमिक क्रेडिट और व्यावहारिक शिक्षा के साथ इसने मुझे सस्टेनेबिलिटी, ऊर्जा और पर्यावरण तथा सिम्युलेशन आधारित डिजाइन की अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया’’
—श्रेयांश चंद्रा, एचओके डिजाइन, टोरंटो, 
2005 बीआर्क बैच

छात्र की राय
‘‘यहां पढ़ना काफी फायदेमंद रहा...विभाग सहजता से ट्रेनिंग और रिसर्च को साथ-साथ लेकर चलता है, जिससे विविध विषयों में खोज का मौका मिलता है’’ 
—सुयांश रहरिया, बीआर्क, चौथा वर्ष

Advertisement
Advertisement