4 साल मोदी सरकार 2.0
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास
जी. किशन रेड्डी, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास, संस्कृति और पर्यटन मंत्री
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से पूर्वोत्तर के आठ राज्य भारत में विकास के नए इंजन बनकर उभरे हैं और इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डीओएनइआर) मंत्रालय की भी अहम भूमिका रही है. पिछले आठ सालों में क्षेत्र के विकास के लिए 55 मंत्रालयों और विभागों के माध्यम से सकल बजटीय सहायता 185 फीसद बढ़ी है. पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की सजग निगरानी का ही नतीजा है कि हर वित्तीय वर्ष बीतने के साथ न केवल वास्तविक व्यय बढ़ा है, बल्कि पहली बार लक्ष्य से ज्यादा भी रहा है.
2022 में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए 6,600 करोड़ रुपए के बजट परिव्यय के साथ शुरू हुई पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल (पीएम-डिवाइन) योजना ने क्षेत्र के विकास को पंख लगाए हैं. कभी 'सुदूर' रहे इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ी है—4,000 किलोमीटर से ज्यादा की सड़क परियोजनाएं जारी हैं, आठ नए हवाईअड्डे चालू हो चुके हैं, 19 नए जलमार्गों की पहचान की गई है और सभी ब्रॉड-गेज लाइनों का विद्युतीकरण हो चुका है.
मणिपुर में भारत के पहले खेल विश्वविद्यालय से लेकर गुवाहाटी में पूर्वोत्तर के पहले एम्स तक, इस क्षेत्र में समावेशी विकास साफ नजर आ रहा है. नॉर्थ ईस्टर्न डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनईडीएफआइ) के माइक्रोफाइनेंस की बदौलत 16 लाख से ज्यादा लोगों ने अपना कौशल बढ़ाया है और लगभग 9,00,000 लोग एमएसएमई का लाभ उठाने में सक्षम हो पाए हैं. पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करके पर्यटन विकास के लिए एक क्षेत्रीय कार्ययोजना तैयार की जा रही है. कृषि क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए भी एक टास्क फोर्स गठित की गई है.
बड़ी उपलब्धि
5,892 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया मंत्रालय के लिए 2023 के बजट में जो पहले 2,800 करोड़ रु था
बाकी सवाल
21,000 करोड़ रु.की रकम 2018-19 से पूर्वोत्तर पर खर्च नहीं कर पाए हैं केद्र के कई मंत्रालय
संस्कृति
आजादी का अमृत महोत्सव (एकेएएम) कार्यक्रम के तहत विभिन्न अभियानों की रूपरेखा तय करने वाले इस नोडल मंत्रालय की निगरानी में 1,36,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. एकेएएम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2021 में भारतीय स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ का साल शुरू होने के तौर पर किया था. इसके तहत होने वाले कार्यक्रमों में हर घर तिरंगा, वंदे भारतम् और कलांजलि जैसे मेगा इवेंट शामिल हैं. संग्रहालय अनुदान योजना के तहत वित्तीय सहायता से प्रधानमंत्री संग्रहालय, जिसका पिछले साल उद्घाटन हुआ, के अलावा आठ नए संग्रहालय बनाए गए हैं. मंत्रालय ने दूसरे देशों में बौद्ध संस्कृति और विरासत को प्रचारित करने के लिए भी कुछ कदम उठाए हैं.
इसमें नेपाल के लुम्बिनी स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर फॉर बुद्धिस्ट कल्चर ऐंड हेरिटेज के निर्माण के लिए धन मुहैया कराना और मंगोलिया में कपिलवस्तु से ले जाए गए बुद्ध के चार पवित्र अवशेषों की 11 दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन शामिल है. भारत से चोरी गई तमाम कलाकृतियों को विदेशों से वापस लाना मंत्रालय की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शुमार है—1947 से 2014 के बीच ऐसी 13 कलाकृतियां ही बरामद हुई थीं, जबकि 2014 के बाद से 228 कलाकृतियों को विदेशों से भारत लाने में सफलता मिली. पर्यटक सुविधाएं मुहैया करने के लिए आदर्श स्मारक के तौर पर केंद्र की ओर से संरक्षित 100 स्मारकों और स्थलों की पहचान की गई है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने ऐसे 92 में से 68 स्मारकों का पता लगाया है, जो 2013 में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में नदारद बताए गए थे.
बड़ी उपलब्धि
3,399 करोड़ रुपए का परिव्यय केंद्रीय बजट में संस्कृति मंत्रालय के लिए
सवाल बाकी
कला और संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए बनी कला संस्कृति विकास योजना के बजटीय आवंटन में पिछले साल के संशोधित अनुमान के मुकाबले गिरावट देखी गई
पर्यटन
पर्यटन राज्य का विषय होने की वजह से केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की भूमिका आमतौर पर उद्योग को मार्गदर्शन और समर्थन देने तक सीमित है. मंत्रालय स्वदेश दर्शन और पीआरएएसएचएडी या प्रशाद योजनाओं के तहत राज्यों को पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता मुहैया करता है. इसी क्रम में हाइ-प्रोफाइल काशी विश्वनाथ मंदिर गलियारा प्रोजेक्ट का दिसंबर 2021 में उद्घाटन हुआ, जिसके तहत वाराणसी के मंदिर घाटों के साथ जुड़े और तीर्थयात्रियों के लिए सहज आवाजाही सुनिश्चित हुई. दुनिया के कोविड-19 से उबरने के बाद पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 6 अक्तूबर 2021 से 31 मार्च 2022 के बीच 1,27,999 मुफ्त पर्यटक वीजा जारी किए गए.
मंत्रालय ने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देखो अपना देश पहल की शुरुआत की. यही नहीं, सभी त्योहारों और लाइव दर्शन की झलक दिखाने वाला मंत्रालय का डिजिटल 'उत्सव पोर्टल' भी है. चार जी-20 बैठकों की मेजबानी के अलावा पर्यटन मंत्रालय टैक्सी ड्राइवरों, होटल कर्मचारियों और गाइडों आदि को जरूरी प्रशिक्षण देकर सभी जी-20 आयोजनों में सहायता प्रदान कर रहा है. पूरे सेक्टर को डिजिटली जोड़ने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन के साथ मंत्रालय केंद्रीय गृह मंत्रालय, पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो और राज्य सरकारों जैसे स्टेकहोल्डर्स को एक मंच पर लाने के लिए समान पर्यटक पुलिस योजना पर अमल में भी जुटा है, ताकि वे पर्यटन जरूरतों को पूरा करने के लिए साथ मिलकर काम कर सकें.
बड़ी उपलब्धि
2021 में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई
डिजिटल उत्सव पोर्टल के जरिए लाइव दर्शन और महोत्सवों का प्रसारण
बाकी सवाल
नई पर्यटन नीति के कोई संकेत नहीं

