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सितारों पर नजर

निजी खिलाड़ियों के प्रवेश के साथ भारत का अंतरिक्ष उद्योग ऊंची छलांग लगाने के लिए तैयार

जितेंद्र सिंह, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विभाग के मंत्री
जितेंद्र सिंह, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विभाग के मंत्री
अपडेटेड 9 जून , 2023

4 साल मोदी सरकार 2.0

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

जितेंद्र सिंह, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विभाग के मंत्री

अप्रैल में घोषित नई अंतरिक्ष नीति-2023 के साथ भारत सेकंड स्पेस एज यानी अंतरिक्ष के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी में बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है. इस दिशा में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब ऑपरेशनल स्पेस सिस्टम का निर्माण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नहीं करेगा, बल्कि यह काम गैर-सरकारी संस्थाओं को दिया जाएगा. यह पहल अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण साझीदार बनने में मदद करने के लिए की गई है.

इसरो दुनिया की छठी सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी है और 400 से ज्यादा कंपनियों के साथ निजी अंतरिक्ष तकनीक श्रेणी में दुनिया में पांचवें स्थान पर है. लेकिन उनमें से लगभग 75 फीसद निम्न-से-मध्यम मूल्य की श्रेणी के उत्पादों के निर्माण में शामिल हैं. शायद यह एक कारण है कि वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में देश की हिस्सेदारी 2 फीसद से भी कम है. इसरो अब अपनी दीर्घकालिक परियोजनाओं जैसे चंद्रयान और गगनयान (मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान साल 2024 की अंतिम तिमाही में होने वाली है.

मंत्रालय का विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश बीते नौ साल में दोगुना बढ़कर 2022-23 में 6,002 करोड़ रुपए हो गया है. विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मिलने वाली पीएचडी डिग्रियों की संख्या (करीब 25,000) को देखें तो अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे स्थान पर है. 2019 में नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग ऐंड हारनेसिंग इनोवेशन (निधि) के लॉन्च होने के बाद से भारत ग्लोबल इनोवेशन रैंकिंग में लंबी छलांग लगाकर 40वें स्थान पर पहुंच चुका है.

इस बीच मंत्रालय में जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में लिथियम भंडार मिलने की खबर से उत्साह है. यह धातु इलेक्ट्रिकल वाहनों में लगने वाली बैटरी का बेहद अहम कंपोनेंट होती है. अधिकारियों का दावा है कि इससे भारत की 80 फीसद जरूरत पूरी हो जाएगी.      

परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) को भी इस बात की अनुमति मिल गई है वह पीएसयू के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित कर परमाणु बिजलीघर स्थापित करे. डीएई ने 2021 में न्यूक्लियर दवाओं के विकास के लिए एक रिसर्च रिएक्टर प्रोजेक्ट की परिकल्पना की थी. इससे विश्वस्तर पर औद्योगिक क्षेत्र में भारत की स्थिति पूरी तरह बदल सकती है. इस प्रोजेक्ट के पांच साल में ऑनलाइन होने की उम्मीद की जा रही है.

बड़ी उपलब्धि
2023 की अंतरिक्ष नीति ने निजी क्षेत्र के साझीदारों के लिए दरवाजे खोले

राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में लिथियम भंडार मिलने से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति को बल मिलेगा 

इसरो का चंद्र मिशन चंद्रयान-3 जुलाई में लॉन्च होगा

बाकी सवाल

क्योंकि 75% निजी कंपनियां निम्न स्तर के सहायक उपकरण बनाती हैं

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