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बस काम की रफ्तार

दो साल पहले रेल मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद से वैष्णव सुधारों को गति देने के लिए बाधाओं को दूर करने में जुटे

अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
अपडेटेड 9 जून , 2023

4 साल मोदी सरकार 2.0

रेल

अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री

जुलाई 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व आइएएस अधिकारी अश्विनी वैष्णव को बहुत स्पष्ट संदेश के साथ रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी. उन्हें न सिर्फ उन अड़चनों को दूर करना था जो सुधारों में रोड़े अटका रहे थे, बल्कि यह भी आश्वस्त करना था कि परिवर्तन जमीन पर नजर आए. वैष्णव बिना कोई समय गंवाए नई और तेज रफ्तार वंदे भारत ट्रेनों को पटरी पर लाने और देश के रेलवे स्टेशनों का रंग-रूप बदलने के काम में जुट गए. वैष्णव ने अपने पूर्ववर्तियों सुरेश प्रभु और पीयूष गोयल की निजी खिलाड़ियों से ट्रेनों के संचालन की योजना को चुपचाप दफन दिया और रेल के लिए पूंजीगत सामान निर्माण में निजी पूंजी के निवेश पर ध्यान केंद्रित किया.

वैष्णव ने इंडिया टुडे को बताया, ''हम अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं जो सहयोग और साझेदारी में सक्षम हो. उस क्षेत्र में निजी पूंजी का स्वागत है.'' मंत्री ने कहा कि रेलवे को ''अधिक कुशल, उपभोक्ताओं के लिए अधिक आरामदायक और आधुनिक तकनीक से लैस'' करने का कार्य प्रगति पर है. स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित सेमी-हाइ-स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें इस योजना के केंद्र में हैं, जो ऐसे समय में अपना नेटवर्क फैला रही हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलेट ट्रेन का सपना अभी पटरी से नहीं उतरा है. 2019 में संसदीय चुनाव से ठीक पहले दिल्ली और वाराणसी के बीच पहली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद से अब तक 19 और ट्रेनें शुरू की गई हैं, और वित्त वर्ष 24 में अन्य 67 ट्रेनों के शुरू होने की उम्मीद है.

प्रीमियम राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में अधिक आरामदायक यात्रा प्रदान करने के लिए वैष्णव ने वित्त वर्ष 2026 तक 400 वंदे भारत ट्रेनों को चालू करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था लेकिन इस काम को जितनी तेजी से आगे बढ़ाने उम्मीद की जाती थी, वह तेजी फिलहाल नजर नहीं आ रही है. फिलहाल जो वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं उनमें सिर्फ चेयर कार हैं जिनका इस्तेमाल 7-8 घंटे की यात्रा के लिए किया जाता है. स्लीपर कोच बनाने के लिए भी अब प्रोटोटाइप तैयार किए जा रहे हैं. और प्रतिक्रिया उत्साहजनक है. 27 मई को नवीनतम दिल्ली-देहरादून वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए टिकटों की बिक्री शुरू होने के कुछ ही मिनटों में पहले तीन दिनों के लिए सारी टिकटें बुक हो गईं.

निरंतर बढ़ते रेलवे नेटवर्क की जरूरतों को पूरा करने के लिए मंत्रालय अभूतपूर्व गति से नए ट्रैक भी बना रहा है. वित्त वर्ष 22 में 2,900 किमी नई पटरियां बिछाई गई थीं, वित्त वर्ष 23 में 5,200 किमी नई पटरियां बिछाई गईं, जो उल्लेखनीय प्रगति है. मंत्री कहते हैं, ''यह सिर्फ एक साल में स्विट्जरलैंड का पूरा रेलवे नेटवर्क जोड़ने जैसा है.''

मृदुभाषी वैष्णव पिछले कई वर्षों से पर्दे के पीछे से मोदी को विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों के लिए परामर्श देते रहे हैं. आज जब यह जिम्मेदारी खुद उनके कंधों पर है तो वे इसकी सबसे जटिल बाधाओं को दूर करने के लिए अपने क्षेत्र-विशिष्ट ज्ञान के साथ-साथ संवाद कौशल का भरपूर उपयोग कर रहे हैं. पिछले साल मार्च में बिजली संकट के दौरान रेलवे की क्षमता में वृद्धि इसकी एक मिसाल है. वैष्णव स्वीकर करते हैं, ''मैं राजनीति में नया हूं लेकिन मुझे रेलवे और तकनीक की समझ है. मैं अपनी जानकारी के अनुसार सबसे अच्छे नतीजे देने की कोशिश करता हूं.''

विभिन्न सुधारों के बीच, मंत्रालय स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच को तैनात कर रहा है. इसके अलावा 1,275 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास कर रहा है, अधिक कुशल लोकोमोटिव और कोच बनाने की क्षमता का निर्माण कर रहा है और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) यानी मालगाड़ियों के लिए अगल पटरी बिछाने के काम में तेजी ला रहा है. डीफसी पर पहली ट्रेन को दिसंबर 2020 में हरी झंडी दिखाई गई थी. पश्चिमी और पूर्वी दोनों कॉरिडोर पर लगभग 80 प्रतिशत ट्रैक चालू हो गए हैं और 1,00,000 से अधिक मालगाड़ियां इन पटरियों से होकर गुजर चुकी हैं.

धीमी गति से चलने वाली मालगाड़ियों के लिए समर्पित ट्रैक की व्यवस्था होने से रेलवे को यात्री ट्रेनों में सुगम और तेज रफ्तार यात्रा आश्वस्त करने और मालगाड़ियों की गति बढ़ाने में मदद मिल रही है. स्टेटिस्टा के आंकड़ों के मुताबिक, 2000-2020 में देश में मालगाड़ी की औसत रफ्तार 23-24 किमी प्रति घंटा थी. 2020 और 2023 के बीच यह बढ़कर 40 किमी प्रति घंटे तक हो गई. हालांकि इनका अभी भी चीन की मालगाड़ियों से दूर-दूर तक कोई मुकाबला नहीं है जो अपने हाइ-स्पीड रेलवे नेटवर्क पर 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं. लेकिन वैष्णव का मानना है कि भारतीय रेलवे सही पटरी पर है और यह चौंकाने वाली रफ्तार पकड़ेगी. इसी की उम्मीद की जानी चाहिए. ठ्ठ

''मैं राजनीति में नया हूं. लेकिन रेलवे और टेक्नोलॉजी की समझ मुझमें है. मैं जो बेहतर जानता हूं, वही करता हूं और अच्छे से अच्छे नतीजे देने की कोशिश करता हूं.''
अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री

बड़ी उपलब्धियां
20 वंदे भारत ट्रेनें शुरू की गईं 2019 से

5,200 किमी, 2022-23
2,900, किमी, 2021-22

बाकी सवाल
भारत 40 किमी/घंटा मालगाड़ी की रफ्तार

चीन 350 किमी/घंटा

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