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सुधर रही सप्लाइ

पिछली गर्मियों में बिजली की दुश्वारियों के लिए आलोचना झेल चुके विद्युत मंत्रालय ने इस साल कुछ भी राम भरोसे नहीं छोड़ा

आर.के. सिंह, ऊर्जा मंत्री
आर.के. सिंह, ऊर्जा मंत्री
अपडेटेड 9 जून , 2023

4 साल मोदी सरकार 2.0, 

ऊर्जा

आर.के. सिंह, ऊर्जा मंत्री

गरमी के दिनों में इस बार ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह चैन की सांस ले सकते हैं. दरअसल, इस बार मौसम अब तक थोड़ा खुशगवार जो है. मगर चीजें पिछली गरमी में इतनी बेहतर न थीं, जब असामान्य रूप से तपते मार्च में बिजली की मांग उछलकर 128.47 अरब यूनिट पर पहुंच गई थी. इससे समूची ऊर्जा शृंखला को कड़े इम्तिहान से गुजरना पड़ा और आर.के. सिंह को इस बात के लिए आलोचना झेलनी पड़ी कि वे गरमी के मौसम के जल्दी धमक पड़ने और कोविड-19 के बाद अर्थव्यवस्था की बहाली की बदौलत मांग में उछाल आने का पूर्वानुमान नहीं लगा सके. असर दूरगामी थे. देश के कई हिस्सों को 12 से 16 घंटे की बिजली कटौती का सामना करना पड़ा.

इस तजुर्बे से सबक लेते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने इस साल कमर कस ली. गरमी के इन दिनों में देश में बिजली की अधिकतम मांग 230 गीगावॉट पहुंचने का अनुमान लगाते हुए मंत्रालय ने बिजली कंपनियों को कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों का पहले से समुचित रख-रखाव करने की हिदायत दी, ताकि तपती गरमी के अप्रैल और मई महीनों में व्यवधानों से बचा जा सके.

आयातित कोयले पर आधारित सभी संयंत्रों से भी कहा गया कि 16 मार्च से 15 जून के बीच उन्हें पूरी क्षमता से काम करना होगा. इसके अलावा सभी ताप बिजली संयंत्रों से भी कहा गया कि उन्हें समयबद्ध तरीके से अपने भंडार जमा करके रखने होंगे. नतीजा यह हुआ कि 25 मई को देश के 165 घरेलू कोयला-आधारित ताप बिजली संयंत्रों में से महज 28 क्रिटिकल स्टॉक वाली श्रेणी में थे, जबकि पिछले साल इन्हीं दिनों करीब 90 संयंत्र ऐसे थे (कोयले के भंडार को क्रिटिकल स्तर पर तब माना जाता है जब बिजली संयंत्रों के पास 26 दिन के उत्पादन के लिए जरूरी कोयले के 25 फीसद से कम स्टॉक होता है).

अलबत्ता प्रमुख सुधार अब भी अधर में लटके हैं और इन्हें तेज रफ्तार से आगे बढ़ाना चाहिए. हालांकि पिछले साल आर.के. सिंह ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम पर संसद की मंजूरी लेने में कामयाब रहे, जिससे गैर-जीवाश्म स्रोतों के इस्तेमाल, देश में कार्बन बाजारों की स्थापना और विशाल आवासीय इमारतों को ऊर्जा संरक्षण व्यवस्था के दायरे में लाने का रास्ता साफ हो गया. लेकिन बिजली अधिनियम 2003 में संशोधनों पर राज्यों और श्रम यूनियनों के बीच आम राय बनाने में वे कम ही आगे बढ़ पाए हैं.

विधेयक पिछले साल अगस्त में पेश किया गया था, जिसे फिर स्थायी समिति को भेज दिया गया. प्रस्तावित संशोधनों से वितरण के स्तर पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और राज्य कई वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) रख सकेंगे. उनमें राज्य नियामकों की बनावट और नियामकों की नियुक्ति पर भी नए सिरे से विचार की कोशिश की गई है. राष्ट्रीय टैरिफ नीति में सब्सिडी जारी करने और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण सरीखे जिन बदलावों पर विचार किया जा रहा है, उनसे उम्मीद है कि यह सुधार राज्यों को बिजली क्षेत्र में और अनुशासन लाने तथा अपने घाटे को कम करने के लिए प्रेरित करेगा.


बड़ी उपलब्धियां

कोयला-आधारित कुल 165 थर्मल पावर प्लांट्स में से 90 पिछले साल क्रिटिकल स्टॉक पर थे. इस साल यह संख्या महज 28

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