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इतनी चौड़ी खाई

मौजूदा योजनाएं तो एक तरफ, केंद्र को अल्पसंख्यकों के कल्याण के बारे में गंभीरता और ईमानदारी से विचार करना चाहिए

 अर्जुन मुंडा, आदिवासी मामलों के मंत्री
अर्जुन मुंडा, आदिवासी मामलों के मंत्री
अपडेटेड 9 जून , 2023

4 साल मोदी सरकार 2.0 

आदिवासी मामले

अर्जुन मुंडा, आदिवासी मामलों के मंत्री

साल 2022 भारत के आदिवासियों के लिए कई अहम मील के पत्थरों का गवाह बना. देश ने पहला आदिवासी राष्ट्रपति चुना, आदिवासी मुद्दों के लिए पहली शोध संस्था स्थापित हुई, और उनके कल्याण पर नए सिरे से ध्यान दिया गया. अर्जुन मुंडा की अगुआई वाले आदिवासी मामलों के मंत्रालय का बजट 2013-14 में 4,296 करोड़ से बढ़ाकर 2019-20 में 6,815 करोड़ रुपए और 2023-24 में 12,462 करोड़ रुपए कर दिया गया.
2020 में केंद्र और मेटा के साझा प्रयास से लॉन्च किए गए 'गोइंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स' का उद्देश्य बीते साल शुरू हुए इसके दूसरे चरण में 10 लाख आदिवासी युवाओं को डिजिटल हुनरों से लैस करना है. सेहत के मोर्च पर 177 आदिवासी जिलों में अब 15,041 आयुष्मान भारत केंद्र हैं. पिछले साल ट्राइबल टीबी अभियान के तहत टीबी के लिए 10 लाख लोगों की जांच की गई. इसके अलावा आदिवासी इलाकों में नियमित स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जा रहे हैं.

बड़ी उपलब्धि
1 लाख युवाओं के डिजिटल हुनर को गोल (गोइंग ऑनलाइन ऐज लीडर्स 2.0) पहल के तहत बढ़ाना 

बाकी सवाल
वन (संरक्षण) नियम, 2022 और वनाधिकार कानून, 2006 में विरोधाभास के कारण आदिवासियों के लिए भूमि उपयोग से जुड़ी चुनौतियां

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