4 साल मोदी सरकार 2.0
महिला और बाल विकास
स्मृति ईरानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री
कहा जाता है कि कोई भी सभ्य समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब उसमें महिलाओं का सशक्तीकरण हो और विकास में उनकी समान भागीदारी हो. भारत में इसी मोर्चे पर सुधार की काफी गुंजाइश है और इसीलिए महिला और बाल विकास मंत्रालय के काम राष्ट्रीय योजनाओं में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं. पिछले साल मंत्रालय ने अपने काम को तीन श्रेणियों में बांटा. पोषण और बुनियादी शिक्षा के लिए सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0, महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए मिशन शक्ति, और बाल कल्याण के लिए मिशन वात्सल्य. इन तीनों श्रेणियों में क्रमश: 20,989 करोड़ रु.,10,916 करोड़ रु. और 1 लाख करोड़ रु. आवंटित किए गए और तीन श्रेणियां में अब तक अच्छा प्रदर्शन हो रहा है.
सरकार आंगनवाड़ी कार्यक्रम के तहत देश भर में लगभग 2,00,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को अपग्रेड करने की योजना बना रही है. इन केंद्रों को बेहतर बुनियादी ढांचा, इंटरनेट और स्मार्ट लर्निंग सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी. सरकार ने 12 लाख स्वास्थ्य जांच उपकरणों के अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच लगभग 11 लाख स्मार्टफोन भी वितरित किए हैं. 2021 में लॉन्च किए गए पोषण ट्रैकर ऐप से अब तक लगभग 9.8 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं. इसके अलावा, लगभग 2.79 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत वित्तीय सहायता दी गई है. सुरक्षा के मामले में मंत्रालय ने हिंसा से प्रभावित महिलाओं को कानूनी और चिकित्सा सहायता मुहैया करने के लिए राज्यों में 730 वन-स्टॉप सेंटर स्थापित किए हैं.
हालांकि जो लक्ष्य हासिल किए जाने हैं, उनके मुकाबले ये कदम साधारण दिखाई देते हैं. यूनिसेफ का अनुमान है कि लगभग 15 लाख लड़कियों की शादी अभी भी कानूनी उम्र से पहले हो जाती है. देश में 2017 से 2021 के बीच कुल 35,493 दहेज हत्याएं हुईं. इसके अलावा एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर (प्रति 1 लाख जनसंख्या पर घटनाओं की संख्या) 2020 में 56.5 फीसद से बढ़कर 2021 में 64.5 फीसद हो गई. 2020 और 2021 के बीच बच्चों के खिलाफ अपराध में भी 16.2 फीसद की बढ़ोतरी हुई. 2020 में 1,29,000 मामले बढ़कर 2021 में 1,49,000 हो गए. मंत्रालय के हिस्से में खर्च के लिए 25,449 करोड़ रु. आए हैं जो 2023 में राजमार्गों को दिए गए बजट का दसवां हिस्सा हैं. इसी से प्राथमिकताओं का अंदाजा लगाया जा सकता है.
बड़ी उपलब्धियां
98 करोड़ लोग अब तक जुड़ चुके हैं पोषण ट्रैकर ऐप से. इस ऐप से आंगनवाड़ियों, उनके कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की निगरानी की जाती है
1 लाख हेल्थ मॉनिटरिंग डिवाइसेज, स्मार्टफोन बांटे गए हैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच
बाकी सवाल
33 लाख बच्चे भारत में कुपोषण का शिकार. इनमें से आधे से ज्यादा अति-गंभीर कुपोषर की श्रेणी में शामिल
-सोनाली आचार्जी
अल्पसंख्यक मामले
इतनी चौड़ी खाई
मौजूदा योजनाएं तो एक तरफ, केंद्र को अल्पसंख्यकों के कल्याण के बारे में गंभीरता और ईमानदारी से विचार करना चाहिए
प्रधानमंत्री मोदी की अगुआई वाली सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के बारे में बीते चार सालों में मिली-जुली राय रही. इसे धन का आवंटन आलोचना का प्रमुख विषय रहा. पिछले वित्त वर्ष में मंत्रालय के लिए बजट अनुमान 5,020.5 करोड़ रुपए था, जिसे बाद में संशोधित करके 2,612.66 करोड़ रुपए कर दिया गया. ऊपर से तुर्रा यह कि इस साल मार्च तक महज 712.5 करोड़ रुपए खर्च किए जा सके. इस साल का 3,097 करोड़ रुपए का बजट पिछले साल के शुरुआती आवंटन के मुकाबले 38 फीसद कम है. कई लोगों ने पढ़ो परदेश, नया सवेरा, मौलाना आजाद राष्ट्रीय फेलोशिप सरीखी योजनाओं और मैट्रिक-पूर्व स्कॉलरशिप के खासे बड़े हिस्से को बंद किए जाने की भी आलोचना की.
हालांकि अल्पसंख्यकों के लिए और खासकर महिलाओं के मोर्चे पर कई कदम भी उठाए गए. तालीम में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित 30 फीसद सीटें अब लड़कियों के तय कर दी गई हैं. नेतृत्व विकास योजना नई रोशनी के तहत 2019 के बाद करीब 40,000 महिलाओं को प्रशिक्षण मुहैया किया गया. यही नहीं, इस साल 4,314 जितनी बड़ी तादाद में महिलाएं पुरुष साथी के बगैर हज करेंगी, जो इस नियम से छुटकारा दिलाने वाले 2018 के सुधार के बाद सबसे ज्यादा हैं.
बड़ी उपलब्लि
4,314 महिलाएं इस साल पुरुष साथी के बगैर हज करेंगी, जो इस नियम से छुटकारा दिलाने वाले 2018 के सुधार के बाद सबसे ज्यादा हैं
बाकी सवाल
पिछले साल के शुरुआती आवंटन के मुकाबले इस साल बजट में 38 फीसद की कटौती कर दी गई
-कौशिक डेका

