4 साल मोदी सरकार 2.0
एमएसएमई
नारायण राणे, एमएसएमई मंत्री
दरअसल, सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) का क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. यह देश की जीडीपी में 30 फीसद का योगदान और 11.3 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है. कोविड-19 महामारी की सबसे तीखी मार इसी क्षेत्र पर पड़ी थी. इसकी हजारों इकाइयों पर ताले पड़ गए. बड़े पैमाने पर बेरोजगार हो चुके लोगों को वापस अपने घर लौटना पड़ा. उनकी दुर्दशा को देखते हुए केंद्र ने एमएसएमई के लिए कौशल प्रशिक्षण और टेक्नोलॉजी की सहायता के अलावा वित्तीय मदद के भी कई कदम उठाए.
मार्च 2020 में लॉकडाउन के कुछ महीने के बाद राहत मिली जब एमएसएमई के लिए आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना का ऐलान किया गया. नवंबर 2022 तक इसके तहत 1.19 करोड़ कर्जों को मंजूरी दी गई, जिनमें 71 फीसद पांच लाख रुपए की सीमा के कर्ज हैं. नारायण राणे के पूर्ववर्ती नितिन गडकरी ने अपने कार्यकाल के दौरान तीन प्रमुख फैसले लिए थे. एक, वर्गीकरण के नए नियम बदले जिससे ज्यादा इकाइयां सहायता लेने की पात्र बनीं. फिर, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा उद्योगों को बराबरी के धरातल पर लाया गया. आखिर में, खुदरा और थोक व्यापारी तथा शहरों में सड़कों पर सामान बेचने वालों को एमएसएमई के तहत लाया गया.
इस साल बजट में इस क्षेत्र के लिए 22,138 करोड़ रुपए रखे गए. सरकार ने यह भी कहा कि वह कर्ज गारंटी योजना में 9,000 करोड़ रुपए डालेगी, जिससे 2 लाख करोड़ रुपए के जमानत-मुक्त और गारंटीशुदा कर्ज दिए जा सकेंगे, जिनकी कर्ज लागत भी 1 फीसद तक कम होगी. इसके अलावा केंद्र ने अनुमानित कराधान के लिए सूक्ष्म इकाइयों की टर्नओवर की सीमा 3 करोड़ रुपए से घटाकर 2 करोड़ रुपए कर दी (अनुमानित टैक्सेशन में करदाता को अपनी कुल कमाई की गणना करके उसके प्रतिशत हिस्से पर कर चुकाना होता है).
इन कदमों के बावजूद अड़चनें कायम हैं. एक तो सरल अनुपालन व्यवस्था की मांग है. सरकार ने हाल ही 50 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाले एमएसएमई के लिए ई-चालान बनाना अनिवार्य कर दिया. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे डिजिटल साक्षरता की कमी से जूझ रही मध्यम आकार की इकाइयों को परेशानी हो सकती है. कुछ ने एमएसएमई के लिए जीएसटी के अलग स्लैब की मांग की है क्योंकि वे बड़ी फर्म के साथ मुकाबला नहीं कर सकतीं. सब्सिडी प्राप्त कर्जों की मांग भी की गई है. अलबत्ता भूराजनैतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए निर्यात में जोखिम चिंता की सबसे बड़ी बात है.
बड़ी उपलब्धि
1.19 करोड़
कर्ज की मंजूरी दी गई एमएसएमई की आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना के तहत, नवंबर 2022 तक
बाकी सवाल
एमएसएमई को चाहिए
सरल अनुपालन व्यवस्था
एमएसएमई उत्पादों के लिए अलग जीएसटी स्लैब

