4 साल मोदी सरकार 2.0
नागर विमानन
ज्योतिरादित्य सिंधिया नागर विमानन मंत्री
बीते तीन साल दो बड़े वैश्विक संकटों—पहले, कोविड-19 महामारी और फिर यूक्रेन-रूस युद्ध—के कारण विघ्न-बाधाओं से भरे थे. आर्थिक असर के लिहाज से विमानन सबसे बुरी तरह से प्रभावित सेक्टर्स में रहा. इसमें गिरते रुपए और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत में बढ़ोतरी को और जोड़ लें तो भारत में विमानन कंपनियों को भारी घाटा उठाना पड़ा. जेट एयरवेज के दिवालिया होने के चार साल बाद मई में गो फर्स्ट का भी वही हाल हुआ.
उद्योग का कुल घाटा बढ़ता रहा तो केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय को महज नियामक की नहीं बल्कि मददगार की भूमिका निभानी पड़ी. फुर्तीले और सजे-धजे ज्योदिरादित्य सिंधिया की अगुआई में मंत्रालय ने 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एटीएफ पर मूल्य संवर्धित कर (वैट) घटाने के लिए मना लिया. घरेलू मेंटनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सेवाओं पर वस्तु और सेवा कर भी 18 फीसद से घटाकर 5 फीसद कर दिया गया.
इस बीच हवाई अड्डों का विस्तार जारी है. 2019 के बाद 11 ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट काम करने लगे हैं. क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने और हवाई सफर को सस्ता करने के लिए 2016 में घोषित उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना ने भी प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की. 2019 के बाद इस योजना के तहत 38 हवाई अड्डे काम करने लगे हैं.
कुल मिलाकर 30 जनवरी तक दूसरे और तीसरे पायदान के शहरों में 72 हवाई अड्डों को जोडऩे वाले 459 मार्गों तक नेटवर्क का विस्तार हो चुका है, जिनमें नौ हेलीपोर्ट और दो वॉटर एरोड्रोम भी शामिल हैं. 2020 में कृषि उड़ान योजना शुरू होने के बाद इसके तहत आने वाले 58 हवाई अड्डों को भी इनमें जोड़ लीजिए, जो जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं और कृषि उपजों की ढुलाई के लिए बनाए गए हैं.
इसके अलावा ड्रोन टेक्नोलॉजी की आर्थिक और सामरिक अहमियत को पहचानते हुए केंद्र सरकार ने ड्रोन नीति को उदार बनाया, ड्रोन और उनके पुर्जे बनाने के लिए प्रोत्साहन लाभ दिए और मित्रवत देशों को ड्रोन के निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां स्थापित करने पर काम कर रही है. उद्योग के अनुमान के मुताबिक अगले तीन सालों में 1,00,000 से ज्यादा ड्रोन पायलटों की जरूरत होगी.
डीडीसीए ने 48 ड्रोन स्कूलों को मंजूरी दे दी है. नागरिक विमानन मंत्रालय भारत में उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) की संख्या बढ़ाने और विमान एमआरओ की सुविधाओं में बढ़ोतरी पर भी ध्यान दे रहा है. डीजीसीए ने 2022 में 1,061 कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किए, जो पिछले दशक में किसी भी साल से ज्यादा हैं.
अब जरूरत इस बात की है कि भारत अपने हवाई अड्डों का फायदा उठाकर कतर, सिंगापुर और दुबई की तरह वैश्विक केंद्र बने. मंत्रालय को ऐसा आर्थिक माहौल बनाने में भी मददगार होना चाहिए जिससे हवाई सफर मुसाफिरों के लिए सस्ता और विमानन कंपनियों के लिए व्यावहारिक हो.

