4 साल मोदी सरकार 2.0
कोयला, खान और खनिज, संसदीय कार्य
प्रह्लाद जोशी
कोयला, खान और खनिज, संसदीय कार्य मंत्री
गरमी में इस बार अच्छी-खासी बारिश ने कोयला, खान और खनिज मंत्री प्रह्लाद जोशी को चैन की सांस लेने का मौका दे दिया. 2022 में बिजली की मांग मार्च-अप्रैल में चरम पर पहुंच गई थी, जिससे ऊर्जा क्षेत्र पर बेतहाशा दबाव बढ़ गया. इसके बाद से ही जोशी ने अपनी नजरें पूरी तरह आपूर्ति शृंखला पर टिका रखी थीं-अधिक से अधिक कोयला मंगाना और फिर उसे देशभर के बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने के इंतजाम करना. पिछले साल अप्रैल-मई में देश के 165 थर्मल पावर प्लांट्स में से लगभग 90 में कोयला क्रिटिकल स्टॉक वाली स्थिति में पहुंच गया तो जोशी को निजी के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की खदानों से 6.62 करोड़ टन कोयला मंगाना पड़ा था.
इस साल उन्होंने कोयले के पर्याप्त भंडारण के लिए पहले ही योजना बना ली थी. वित्त वर्ष 2023 में भारत का कोयला उत्पादन 89.308 करोड़ टन (2021-22 में उत्पादित 77.821 करोड़ टन से 14 फीसद अधिक) रहा, जिसमें से 77.035 करोड़ टन सरकारी स्वामित्व वाली कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड से आया, और बाकी निजी खदानों से. एक साल में जोशी ने अपना ध्यान नई खदानों के विकास और मौजूदा खदानों से निकासी सुविधा बेहतर बनाने पर केंद्रित किया है.
साल 2015 में कोयला खदान विशेष प्रावधान अधिनियम (सीएमएसपी) पारित होने के बाद से कोयला खनन नीति में बदलाव आया है. जोशी ने 2021 में खनन कानूनों को उदार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया, जिससे राज्यों को नीलामी करने और उस पर मिलने वाली रॉयल्टी अपने पास रखने की अनुमति मिली. उदार नीति के बावजूद, कमजोर भूमि कानूनों, कोयले की कम मांग, निर्यात प्रतिबंध और सीआइएल के वर्चस्व की वजह से निजी खदान मालिकों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. मार्च 2023 में भारत ने वाणिज्यिक खनन के लिए सातवें दौर की नीलामी शुरू की, जिसमें 106 खदानों के लिए बोली लगाई गई.
पिछले तीन साल में छह चरणों के दौरान 87 खदानों की नीलामी हुई है. जोशी की योजना कोयला उत्पादन को 1.01 अरब टन तक पहुंचाने की है, जिसमें करीब 16.2 करोड़ टन उत्पादन निजी खदानों में होगा. सियासी पहलू की बात करें तो जोशी पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के भी करीबी माने जाते हैं. वे भाजपा के रणनीतिकार और चुनाव प्रबंधक हैं तथा संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर हर सत्र में अपने कौशल का परिचय देते रहे हैं. खासकर ऐसे मौकों पर जब विपक्षी दल प्रस्तावित कानूनों की आलोचना करते हैं और उनकी अपनी पार्टी कानूनों को पारित कराना चाहती है.
बड़ी उपलब्धि
भारत का कोयला उत्पादन
कोयला एवं खनिज खनन कानूनों में सुधार
खनन क्षेत्र में निजी निवेश को मंजूरी
बाकी सवाल
भारत का कोयला आयात

