ऊंचे और असरदार
5. राहुल गांधी, 52 वर्ष, कांग्रेस नेता
क्योंकि नाकामी के गहरे दलदल से वे दोबारा उठ खड़े हुए, विजयी मुस्कान के साथ अपने हौसले को बुलंद किया और देश के एक कोने से दूसरे कोने तक 4,080 किमी. की दूरी एक-एक कदम रखकर पूरी की. राहुल की भारत जोड़ो यात्रा ने न केवल मायूस पड़ी कांग्रेस में जान फूंक दी और पार्टी को विपक्ष में पुख्ता जगह दिला दी, बल्कि राहुल को भी गंभीर नेता के तौर पर स्थापित कर दिया. इसका चुनावी फायदा भी मिला, कांग्रेस कर्नाटक को वापस पा गई, भारत जोड़ो यात्रा सात जिलों की जिन 51 सीटों से गुजरी, उनमें 37 पर कांग्रेस ने जीत हासिल की
क्योंकि वे अब देश के सबसे मुखर और प्रभावशाली विपक्षी नेता हैं, जो प्रधानमंत्री पर सीधे निशाना साधने से कभी नहीं कतराते. भारतीय राजनीति में उनके प्रभाव का यही प्रमाण है कि उनके हर कदम और हर बयान पर मोदी के कैबिनेट सहयोगी और भाजपा आइटी सेल की तरफ से जवाबी हमला बोला जाता है
अपनी पोस्ट खुद उनके पास सोशल मीडिया टीम है, पर वे अक्सर ट्वीट खुद पोस्ट करते हैं जो उनकी हाजिरजवाबी और चुटीली शैली का परिचय देती हैं
क्योंकि भले सांसद के रूप में उन्हें अयोग्य घोषित किया जा चुका हो, राहुल गांधी अब भी देश की सबसे पुरानी पार्टी का चेहरा हैं. लगभग 200 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होगा. लिहाजा, पार्टी में जान फूंकने और हौसले बुलंद करने में उनकी भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है
6. ममता बनर्जी, 68 वर्ष, प. बंगाल की मुख्यमंत्री
बंगाल की शेरनी
क्योंकि ममता तो बस ममता हैं—ऊर्जा और जोश का अथाह भंडार और अपनी अनूठी राजनैतिक शैली वाली. उनकी तृणमूल कांग्रेस ने भले राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो दिया हो और केंद्र सरकार बंगाल के लिए मनरेगा और पीएमएवाइ के फंड रोककर भले पश्चिम बंगाल पर शिकंजा कस रही हो, उनकी पार्टी पर भले कई तरह के मुकदमों की तलवार लटकी हुई हो लेकिन ज्योति बसु के बाद से आज तक कोई उन्हें सियासी तौर पर खारिज करने की गलती नहीं कर सका है
क्योंकि जिस तरह 2011 में बंगाल में 34 साल का वाम शासन खत्म हुआ था उसी तर्ज पर उन्होंने 2024 में केंद्र में 'पोरिबर्तन' का आह्वान किया है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को विपक्ष की धुरी बनाने की सोची थी. कांग्रेस के उभार के बाद वह सोच तो थोड़ी धुंधली पड़ गई है लेकिन भाजपा के खिलाफ उनकी मुखरता ममता की जगह किसी भी गठबंधन में अग्रिम पंक्ति में बनाती है
क्या पक रहा है? ममता को खाना बनाना बहुत भाता है और वे तरह-तरह के पकवान बनाकर अक्सर अपने परिजनों के सामने पाक कला का हुनर दिखाती हैं. बताया जाता है कि मछली के पकवान वे बहुत शौक से पकाती हैं. इसके अलावा चॉकलेट भी उनकी कमजोरी है
क्योंकि आक्रामक तेवर वाले उनके व्यक्तित्व के पीछे धारदार रणनीतिक युक्ति वाला दिमाग है. उन्होंने भाजपा को आक्रामक हिंदुत्व वाले एजेंडे पर घेरते हुए रामनवमी पर हावड़ा और रिसड़ा के तनावों को भी अपने हक में भुना लिया. उससे ठीक पहले सागरदिघी उपचुनाव में मुसलमान वोट बैंक तृणमूल से छिटकने का संकेत मिला था. वे उन नेताओं में नहीं जो इस तरह की चीजें बैठकर देखती रह जाएं
7. नीतीश कुमार, 72 वर्ष, बिहार के मुख्यमंत्री
विपक्ष के सूत्रधार
क्योंकि श्रीमान भरोसेमंद राजनैतिक जोड़-जुगाड़ में माहिर हैं. कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के बीच खाई को पाटने के बाद नीतीश 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा तैयार करने में महत्वपूर्ण सूत्रधार बनकर उभरे हैं
क्योंकि अगस्त 2022 में नीतीश ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर बिहार में वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य के साथ हाथ मिलाया और सरकार गिराने-बनाने के खेल की चैंपियन मानी जाने वाली भगवा पार्टी को उसके ही खेल में पटखनी दे दी
मीठा प्रेमी वैसे तो वे चीनी के सेवन को लेकर खासे सतर्क रहते हैं लेकिन रसगुल्ला उनकी कमजोरी है, खासकर दिल्ली के लाजपत नगर की एक दुकान के रसगुल्ले तो उन्हें खूब लुभाते हैं
क्योंकि नीतीश खुद प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार होने की बात को खारिज कर देते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद संख्या टेढ़ी हो जाती है तो वे छुपे रुतम साबित हो सकते हैं

