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बिसात पर वजीर

प्रधानमंत्री के पास जाने से पहले आखिरी बार कोई फाइल वही देखते हैं. कई बार महत्वपूर्ण पदों पर बैठे राजनेताओं तथा नौकरशाहों, टेक्नोक्रेट की नियुक्ति के मामलों में भी कोई फाइल उनकी टेबल से गुजरने के बाद ही प्रधानमंत्री के पास पहुंचती है

पी.के. मिश्र, 74 वर्ष, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव
पी.के. मिश्र, 74 वर्ष, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव
अपडेटेड 30 मई , 2023

ऊंचे और असरदार : अफसरशाही

2. पी.के. मिश्र, 74 वर्ष, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव

क्योंकि 1972 बैच के गुजरात काडर के ये आइएएस अफसर सबसे ताकतवर नौकरशाह हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार हैं. महत्वपूर्ण सुधारों और सरकारी नियुक्तियों से लेकर प्रमुख नीतियां लागू करने तक में मिश्र सरकार के लिए खासी अहमियत रखते हैं

क्योंकि वे फाइनल फिल्टर हैं, यानी प्रधानमंत्री के पास जाने से पहले आखिरी बार कोई फाइल वही देखते हैं. कई बार महत्वपूर्ण पदों पर बैठे राजनेताओं तथा नौकरशाहों, टेक्नोक्रेट की नियुक्ति के मामलों में भी कोई फाइल उनकी टेबल से गुजरने के बाद ही प्रधानमंत्री के पास पहुंचती है. राज्यों में होने वाली नियुक्तियों में भी उनकी राय बहुत मायने रखती है. उनकी विकेंद्रीकृत कार्यशैली नौकरशाहों का टैलेंट पूल तैयार करने में मददगार रही है

बेहद विनम्र साथ काम करने वालों का कहना है कि इतने ताकतवर और प्रभावशाली अफसर होने के बावजूद वे बेहद शांत और विनम्र स्वभाव वाले हैं

आपदा प्रबंधन में माहिर वे आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञ हैं और 2003 में गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सीईओ के तौर पर साल 2001 में भुज भूकंप के बाद हालात से निबटने के लिए संयुक्त राष्ट्र का पुरस्कार हासिल कर चुके हैं

क्योंकि मोदी सरकार के सबसे बड़े सुधारों में से एक को लागू करने की राह उन्होंने ही खोली. इसमें योग्यता के साथ वरिष्ठता, यानी सर्वश्रेष्ठ नौकरी के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति के चयन पर विचार करने के अलावा बाबुओं की कार्यकुशलता बढ़ाना और नौकरशाही की बाधाएं दूर करने की प्रतिबद्धता भी शामिल है

राष्ट्र का प्रहरी

3. अजित डोभाल,  78 वर्ष, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

क्योंकि अजित डोभाल पिछले 10 साल से भारत के सुरक्षा और रणनीतिक मामलों को संभाल रहे हैं, जो कि संभवत: देश के किसी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) का सबसे लंबा कार्यकाल है. डोभाल के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फरवरी में असामान्य रूप से उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक बैठक हुई, और इस दौरान उन्होंने यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों को लेकर भारत का रुख साझा किया. यह मुलाकात इस लिहाज से दुर्लभ मानी जा रही है क्योंकि पुतिन आम तौर पर केवल राष्ट्राध्यक्षों के साथ ही बैठक करते हैं

क्योंकि डोभाल ने वाशिंगटन डीसी में कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लिया और इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल ऐंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (आइसीईटी) की पहली बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व किया. आइसीईटी पर साल 2022 में मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के बीच सहमति बनी थी

ऊपर वाले का खौफ राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के इस शीर्षस्थ अधिकारी की धर्म में गहरी आस्था है. हाल में उन्होंने मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में 'भस्म आरती' में हिस्सा लिया और 'जलाभिषेक' भी किया

क्योंकि डोभाल अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में अपने समकक्षों के साथ प्रस्तावित साझा रेल परियोजना को आगे बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं. यह परियोजना समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से भारत को न केवल खाड़ी और अरब देशों से जोड़ेगी बल्कि बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के जरिए अपनी पैठ बनाने के चीन के प्रयासों का मुकाबला भी करेगी

क्योंकि चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी की आक्रामकता से निबटने में भारतीय सेना का रुख तय करने के मामले में डोभाल का कार्यालय अहम भूमिका निभाता है

वित्तीय प्रबंधक

4. शक्तिकांत दास, 64 वर्ष, गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक

क्योंकि उन्होंने दो बड़े संकटों—कोविड-19 और यूक्रेन जंग—के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की कमान संभाली तथा युद्ध के बाद बढ़ती महंगाई और गिरते रुपए की चुनौतियों से भी लड़े. दूसरी ओर इन चुनौतियों की वजह से कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मंदी के कगार पर पहुंच गईं

क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने बढ़ती महंगाई पर लगाम कसे रखी. इस प्रक्रिया में रिजर्व बैंक ने मई 2021 के बाद मुद्रास्फीति को 6 फीसद की ऊपरी सीमा के करीब बनाए रखने के लिए ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी जारी रखी

क्योंकि शक्तिकांत दास कठिन समय में भी भारत के बैंकिंग क्षेत्र को लचीला और खुद को संभलने में समर्थ बनाए रखने के प्रति आश्वस्त करने वाली एक आवाज हैं. वास्तव में भारतीय रिजर्व बैंक का स्ट्रेस टेस्ट बताता है कि भारतीय बैंक संकटकाल में भी अपना कैपिटल बफर न्यूनतम जरूरत से ऊपर बनाए रखने में सक्षम होंगे

डिजिटल अभियान: भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल दिसंबर में मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलूरू और भुवनेश्वर में अपनी डिजिटल मुद्रा ई-रुपी की पायलट परियोजना शुरू की

शैक्षिक पृष्ठभूमि: शक्तिकांत दास दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में पोस्टग्रेजुएट हैं और फिर उसके बाद उन्होंने आइआइएम बैंगलोर से वित्तीय प्रबंधन का कोर्स किया

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