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नीति नियंता

वे बड़ी नीतियों और सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों को डिजाइन करने और उनके कार्यान्वयन के लिए प्रधानमंत्री मोदी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार बने हुए हैं

राजीव गौबा,  63 वर्ष, कैबिनेट सचिव
राजीव गौबा, 63 वर्ष, कैबिनेट सचिव
अपडेटेड 30 मई , 2023

ऊंचे और असरदार : अफसरशाही

5. राजीव गौबा, 63 वर्ष, कैबिनेट सचिव

क्योंकि वे बड़ी नीतियों और सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों को डिजाइन करने और उनके कार्यान्वयन के लिए प्रधानमंत्री मोदी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार बने हुए हैं. उन्होंने अगस्त 2019 में पद संभाला था और उन्हें पहले ही दो सेवा विस्तार मिल चुके हैं (नवीनतम विस्तार अगस्त 2023 तक है). उन्हें एक और विस्तार मिलने तथा आगामी लोकसभा चुनावों के पहले तक इस पद पर बने रहने की उम्मीद है

क्योंकि गौबा देश के सर्वोच्च सेवारत नौकरशाह हैं और लोक सेवकों को प्रशिक्षित करने तथा उनकी दक्षता को बढ़ाने के लिए व्यापक मानव संसाधन क्षमता-निर्माण कार्यक्रम मिशन कर्मयोगी की देखरेख में वे काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

अतीत की अहमियत पर्यावरण और वन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में राजीव गौबा ने कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री जयराम रमेश के साथ काम किया था. यही नहीं, पटना विश्वविद्यालय में वे भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के बैचमेट थे

क्योंकि रॉ प्रमुख सामंत गोयल के साथ राजीव गौबा ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के कार्यान्वयन के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस कदम के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया. अब वहां चुनाव कराने की तैयारी चल रही है

तगड़ी चौकसी

6. अजय कुमार भल्ला, 62 वर्ष, केंद्रीय गृह सचिव

क्योंकि 1984 बैच के असम मेघालय काडर के आइएएस अधिकारी अजय कुमार भल्ला साल 2019 से गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं और उन्हें एक-एक साल के तीन सेवा विस्तार मिल चुके हैं. यह उनकी क्षमताओं पर नरेंद्र मोदी सरकार के भरोसे का सबूत है

उग्रवाद नियंत्रण में विशेषज्ञता जब बात जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति का जायजा लेने और पूर्वोत्तर राज्यों के विद्रोही समूहों से संवाद की आती है, भल्ला मोदी सरकार के महत्वपूर्ण व्यक्ति होते हैं

क्योंकि भल्ला कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह के मामले से उपजी विपरीत परिस्थितियों के मद्देनजर पंजाब की नाजुक स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. ब्रिटेन की अपनी हाल की यात्रा में भल्ला ने विशेष रूप से ब्रिटेन में शरण हासिल करने वाले खालिस्तान समर्थकों की ओर से भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया 

क्योंकि गृह सचिव के रूप में भल्ला ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) सरीखे प्रमुख और विवादास्पद कानूनों के पारित होने और राम मंदिर ट्रस्ट की स्थापना तथा कोविड-19 प्रबंधन के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने की प्रक्रिया की देखरेख की

उस्तादों के उस्ताद

7. एस.के. मिश्र, 63 वर्ष, निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय

क्योंकि आइआरएस अधिकारी मिश्र देश की सबसे सख्त जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के प्रमुख हैं. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से धन शोधन निवारण अधिनियम के सभी प्रावधान बरकरार रखे जाने के साथ ही एजेंसी को असीमित शक्तियां मिल चुकी हैं और वह एक नई सीबीआइ बनकर उभरी है. इसने देश के कुछ सबसे हाइ-प्रोफाइल मामलों की जांच का जिम्मा संभाल रखा है

क्योंकि ईडी एक ऐसी एजेंसी के तौर पर उभरी है जो राजनैतिक हवाओं का रुख बदल सकती है—विपक्षी दलों का दावा है कि ईडी जांच के डर से कई लोगों ने या तो केंद्र में सत्तासीन भाजपा से हाथ मिला लिया है या उसकी सदस्यता ग्रहण कर ली है. राजनीति में मिश्र को पसंद और नापसंद करने वाले, दोनों तरह के लोग हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि वे किस पाले में खड़े हैं

कितनी तरह की रुचियां आइआरएस में शामिल होने से पहले मिश्र सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करते थे. वे रोजाना 10 किमी दौड़ते हैं और उपवास भी करते हैं. उन्हें उर्दू शायरी में खासा दिलचस्पी है

क्योंकि ईडी निदेशक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद वे तीन बार विस्तार पा चुके हैं, जिससे उन्हें 2018 में नियुक्ति के बाद मूल कार्यकाल से इतर तीन और साल का समय मिला है. उनके पहले सेवा विस्तार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इस पर सरकार ने पहले अध्यादेश और बाद में संसद में विधेयक लाकर ईडी और सीबीआइ निदेशकों को सशर्त पांच साल का कार्यकाल देने का प्रावधान कर दिया

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