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हरफनमौला

वे मेक इन इंडिया, आकांक्षी जिला कार्यक्रम, स्टार्ट अप इंडिया और एसेट मॉनेटाइजेशन प्रोग्राम सहित मोदी शासन में कुछ प्रमुख सुधारों के सूत्रधार रहे हैं

अमिताभ कांत, 67 वर्ष, भारत के जी 20 शेरपा
अमिताभ कांत, 67 वर्ष, भारत के जी 20 शेरपा
अपडेटेड 30 मई , 2023

ऊंचे और असरदार : रसूखदार

8. अमिताभ कांत, 67 वर्ष, भारत के जी 20 शेरपा

क्योंकि नीति आयोग के सीईओ के रूप में छह साल की सेवा के बाद जुलाई 2022 में अमिताभ कांत को भारत के जी20 का शेरपा चुना गया, जब जी20 की अध्यक्षता भारत को मिली. जी20 नेताओं के बीच आपसी बातचीत और आम सहमति बनाने की जिम्मेदारी कांत के कंधों पर ही है

क्या चाहा, क्या पाया बताते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद अमिताभ कांत की नजर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) के अध्यक्ष पर थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यह कहते हुए नीति आयोग का सीईओ बना दिया कि कांत सीसीआइ की नौकरी के लिए नहीं बने हैं

क्योंकि वे मेक इन इंडिया, आकांक्षी जिला कार्यक्रम, स्टार्ट अप इंडिया और एसेट मॉनेटाइजेशन प्रोग्राम सहित मोदी शासन में कुछ प्रमुख सुधारों के सूत्रधार रहे हैं

क्योंकि वे अब विभिन्न मंचों पर जलवायु परिवर्तन और अक्षय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और फ्रंटियर टेक्नोलॉजी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और ड्रोन जैसे मुद्दों की वकालत कर रहे हैं

चतुर शिकारी

9. प्रवीण सूद, 59 वर्ष, निदेशक, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ)

क्योंकि वे देश की उस शीर्ष जांच एजेंसी के प्रमुख हैं जो कई हाइ-प्रोफाइल मामलों की पड़ताल कर रही है. हाल के वर्षों में एजेंसी का प्रदर्शन काफी सुधरा है, जिसके मामलों में सजा की दर साल 2021 में 68 फीसद से बढ़कर पिछले साल 75 फीसद पर पहुंच गई

क्योंकि ईडी की तरह उनके नेतृत्व में सीबीआइ का प्रदर्शन भी राजनैतिक सत्ता संतुलन को बदलने की क्षमता रखता है. पिछले पांच साल में सीबीआइ ने भाजपा सहित 11 पार्टियों (पार्टी-वार संख्या का जिक्र नहीं है) के सांसदों/विधायकों के खिलाफ कुल 56 मामले दर्ज किए हैं 

क्योंकि वे मोदी सरकार के चहेते अफसर रहे हैं. कर्नाटक के मौजूदा उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख डी.के. शिवकुमार पिछले साल जब नेता विपक्ष पद पर थे, तब उन्होंने सूद को भाजपा का एजेंट और नालायक तक कह डाला था. यही नहीं, अपनी पार्टी के सत्ता में आने पर इस आइपीएस अफसर के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही थी. अब कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतते ही सूद को कर्नाटक से बाहर बुला लिया गया और सीबीआइ प्रमुख के पद पर नियुक्त कर दिया गया

पढ़ाई आगे की आइआइटी दिल्ली से पढ़े सूद ने 2003 में सेवा से विश्राम लिया था ताकि वे आइआइएम बैंगलोर और सिराक्यूज यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क से पब्लिक पॉलिसी और मैनेजमेंट के पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स कर सकें

पूंजी की पहरेदार

10. माधवी पुरी बुच, 57 वर्ष अध्यक्ष, सेबी

क्योंकि मार्च 2022 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की पहली महिला प्रमुख के रूप में पद संभालने के बाद उन्होंने नियामक को और अधिक विकासपरक और सुविधाजनक बनाने की पहल की है. उन्होंने सभी विभागों के सेबी स्टाफ को पूरी सक्रियता के साथ उद्योग तथा बाजार के भागीदारों से जोड़ा और उनकी प्रतिक्रिया जानी. इसका इस्तेमाल उन्होंने नीतियों को बेहतर बनाने में किया

क्योंकि उनका मानना है कि टेक्नॉलोजी एक 'जादू की छड़ी' है जो अनुपालन, लागत में कमी और नियंत्रण जैसे मामलों में बाजार के विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के लिए मददगार साबित हो सकती है. साथ ही सेटलमेंट के मामले में दुनिया के सबसे तेज बाजारों में से एक के तौर पर भारतीय शेयर बाजारों के बदलाव पर नजर रख सकती है

क्योंकि उन्होंने पुराने कानूनों में जरूरी बदलाव समेत कई बड़ी पहलकदमियां कीं, चाहे बात शेयर बाइबैक की हो या म्यूचुअल फंड न्यासियों की भूमिका, वैकल्पिक निवेश उपाय, पब्लिक ईश्यू या रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट या फिर निवेशकों के लिए शिकायत निवारण तंत्र की

ना, आइएएस नहीं सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली और आइआइएम अहमदाबाद की पूर्व छात्रा बुच साल 2002 के बाद से सेबी की ऐसी पहली प्रमुख हैं जो आइएएस अफसर नहीं हैं

एम.जी. अरुण, कौशिक डेका, अमरनाथ के. मेनन, अनिलेश एस. महाजन और प्रदीप आर. सागर

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