ऊंचे और असरदार : रसूखदार
41. दीपिका पादुकोण, 37 वर्ष, अभिनेत्री
क्योंकि वे बड़े बजट की फिल्मों का जाना-माना चेहरा हैं. पठान (2023) की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद दीपिका की अगली दो फिल्में—बहुभाषी प्रोजेक्ट के और फाइटर—भी बजट और ऐक्शन के लिहाज से बड़ी हैं और 2024 की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शुमार हैं
क्योंकि उनकी लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. वे विदेशी असाइनमेंट के लिए सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाली भारतीय हस्तियों में से एक हैं—चाहे कान में जूरी सदस्य बनना हो, कतर में फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी के अनावरण का मौका या फिर इस साल ऑस्कर में प्रेजेंटर के तौर पर शामिल होना
क्योंकि मौजूदा समय में वे कार्तिए और लुई विटॉन जैसे लग्जरी ग्लोबल ब्रांड सहित 14 ब्रांड की पसंदीदा मॉडल हैं
इत्ती-सी खुशी: दीपिका को डायटिंग शेड्यूल को ताक पर रखकर चुपके से घर के बने चॉकलेट केक की एक-दो बाइट खा लेना पसंद है
पसंदीदा जगहें: जब व्यस्त शेड्यूल से ब्रेक की जरूरत महसूस होती है, तो दीपिका को 'धूप, रेत और समुद्र' के बीच छुट्टी बिताना भाता है
क्योंकि वे द लिव लव लॉफ फाउंडेशन के जरिए भारत में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और नीतियों की पैरोकारी करने में सबसे आगे हैं. ग्रामीण क्षेत्र के लिए उसके कार्यक्रम में देश के चार राज्यों के 3,247 लाभार्थी और कार्यकर्ता शामिल हैं
हिंदी पट्टी के सुर्खीबाज
42. सुधीर अग्रवाल, 55 वर्ष, एमडी, दैनिक भास्कर ग्रुप
क्योंकि अमूमन जैसे 'जेरॉक्स' का मतलब फोटोकॉपी और ठंडा मतलब कोका-कोला हो गया है, उसी तरह देश की हिंदी भाषी पट्टी में भास्कर, अखबार का पर्याय बन गया है
क्योंकि हिंदी, मराठी और गुजराती में 6.63 करोड़ पाठकों और सात राज्यों के 30 रेडियो स्टेशनों से प्रसारित अपने एफएम चैनल के साथ यह ब्रांड देश की सबसे अधिक आबादी वाली और राजनीति के लिहाज से सबसे अहम बेल्ट को कवर करता है
क्योंकि 1977 में भोपाल में शुरू एक संस्करण से बढ़कर अब 11 राज्यों में 62 संस्करण तक पहुंच जाने के साथ दैनिक भास्कर ने यह साबित कर दिया है कि प्रिंट मीडिया भी मुनाफेदार हो सकता है
समय के साथ सुधीर अग्रवाल ने तीन साल पहले भविष्य पर नजर के साथ दैनिक भास्कर ऐप को लॉन्च किया. प्रिंट बिजनेस में, आम तौर पर यही माना जाता है कि 75 फीसद कमाई विज्ञापनों से और 25 फीसद ग्राहकी से आना चाहिए. अग्रवाल ऐप के साथ इसे उलट देना चाहते हैं: यानी 75 फीसद कमाई ग्राहकी से और बाकी विज्ञापन के जरिए
अफसोस अंग्रेजी अखबारों के बीच धाक नहीं जमा पाए. दैनिक भास्कर ग्रुप ने तीन अंग्रेजी दैनिक—नेशनल मेल, डीएनए मुंबई और डीबी पोस्ट—लॉन्च किए लेकिन बाद में उसे अपने कदम पीछे खींचने पड़े. अग्रवाल कहते हैं, ''अंग्रेजी दैनिकों के बीच जगह बनाने की कोशिश का सबसे बड़ा सबक यही रहा कि आपको अपने मैदान में ही टिके रहना चाहिए''

