मेक ए डिफरेंस (एमएडी या मैड), स्थापना: 2006, कोच्चि
सोनाली आचार्जी
2010 में जब मिशेल ओबामा भारत आई थीं, तो उन्हें मुंबई में कुछ अनाथ बच्चों के साथ हॉपस्कॉच खेलते और 'रंग दे बसंती' पर नृत्य करते देखा गया था. वे सभी भारत में अनाथ बच्चों के लिए काम कर रहे सबसे बड़े युवा-स्वयंसेवी नेटवर्क 'मेक ए डिफरेंस' (एमएडी) के मुंबई चैप्टर से जुड़े बच्चे थे. ओबामा के साथ उस मुलाकात के बाद एमएडी को राष्ट्रव्यापी लोकप्रियता मिली. 2006 में मात्र 20 वर्ष की आयु में एमएडी की स्थापना करने वाले जितिन नेदुमाला ने बच्चों के हित में काम करना संयोगवश शुरू किया था. जब वे 19 साल के थे, तब अपने एक करीबी दोस्त को खोने की पीड़ा से उबरने के लिए उन्होंने कोच्चि के एक अनाथालय में स्वेच्छा से काम करना शुरू किया था.
वहां, दूसरों के संघर्षों पर ध्यान केंद्रित करने से उन्हें आंतरिक प्रसन्नता मिली. वे कहते हैं, ''पहली बार मैं अपने आप से बड़ी किसी चीज पर ध्यान केंद्रित कर पाने में सफल हो सका था.'' नेदुमाला कहते हैं, ''एमएडी का जन्म इसलिए हुआ क्योंकि मैं उस समाज से नाराज था जिसमें बच्चों की अच्छी देखभाल और मदद करके उन्हें गरीबी के चक्र से बाहर निकालने के प्रयास करने के बजाय, हम उन्हें 18 साल की उम्र तक सिर्फ जीवित रखते और फिर उनसे हाथ झाड़ लेते हैं.'' आज नेदुमाला को सबसे ज्यादा संतुष्टि एमएडी से मिलती है.
इस स्वयंसेवी संगठन ने पिछले 17 वर्षों में लगभग 20,000 स्वयंसेवकों के साथ काम करते हुए एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो बच्चों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आने वाली गरीबी से बचने में मदद कर सकता है. नेदुमाला बताते हैं कि उन्होंने और उनके साथ काम करने वालों ने महसूस किया कि बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने भर से मदद नहीं मिलेगी क्योंकि केवल शिक्षित किए जाने के बाद भी उनमें से कई बच्चे आगे चल कर ड्रग्स बेचने के आरोप में गिरफ्तार हुए, खराब किस्म के रिश्तों में फंसे तथा उनमें आत्मघाती प्रवृत्तियां व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे सामने आए. इसलिए, एमएडी ने एक समग्र कार्यक्रम तैयार किया.
नेदुमाला के पढ़ाए बच्चों की पहली पीढ़ी अब वयस्क हो चुकी है; उनमें से ज्यादातर शादीशुदा हैं और औसतन 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह कमाते हैं. एमएडी ने उन्हें अपना घर बनाने के लिए ब्याज मुक्त ऋण भी प्रदान किया है. नेदुमाला के शब्दों में, ''मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि मैंने हजारों बच्चों की मदद की है. मैंने सिर्फ उन 10 बच्चों के जीवन में अंतर पैदा किया है जिनके साथ मैंने व्यक्तिगत रूप से एक दशक से अधिक समय तक काम किया है. वे मेरे पारिवारिक सदस्य जैसे हैं.''
खुशी के सूत्र
''गहरी खुशी का अनुभव पाने के लिए लंबे समय तक दूसरों की मदद करनी होती है''
—जितिन नेदुमाला
संस्थापक, एमएडी

