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विशेषांकः दौड़ में आगे 

मर्सिडीज भारत में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने वाला पहली प्रीमियम कार निर्माता कंपनी बन गई है—योगेंद्र प्रताप ने इस वाहन को चला कर देखा.

बराबर वालों में बेहतर मर्सिडीज बेंज ईक्यूसी, 1886 एडिशन
बराबर वालों में बेहतर मर्सिडीज बेंज ईक्यूसी, 1886 एडिशन
अपडेटेड 2 अगस्त , 2021

ऑटो स्पेशल फर्स्ट ड्राइव

मर्सिडीज ईक्यूसी का व्हीलबेस वही है जो जीएलसी में है और यह जीएलसी से थोड़ी लंबी, कम चौड़ी और नीची है. ये बदलाव संभवत: वायुगतिकी को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं. और, हालांकि दोनों मॉडलों का आधार समान है, फिर भी ईक्यूसी और जीएलसी में समानताएं बहुत कम हैं.

यद्यपि ईक्यूसी का एक मानक मॉडल है, लेकिन जो हमें चलाने के लिए मिला वह 'संस्करण 1886’ था. मानक मॉडल और 1886 की डिजाइन में बहुत छोटे-छोटे अंतर हैं—फ्रंट फेंडर पर अलग तरह की बैजिंग के साथ  फ्रंट ग्रिल और एलॉय पहियों में अंतर है. इसमें 10-स्पोक वाले 20-इंच के पहिए लगे हैं जिसमें हर दूसरा स्पोक हाई ग्लॉस फिनिश के काले रंग पर नीली ईक्यू रेखाओं वाला है. कार देख कर नहीं लगता कि यह कोई इलेक्ट्रिक व्हीकल है. 

इसका बाहरी डिजाइन अच्छा माना जा सकता है, लेकिन नए लेआउट वाले डैशबोर्ड, एयरकंडिशनर वेंट और इंफोटेनमेंट स्क्रीन के साथ इसका अंदरूनी हिस्सा रोमांचक है. इसमें सभी मर्सिडीज एसयूवी में दिखने वाले छोटे एयर वेंट के बजाए लंबे एयर वेंट्स स्वागत योग्य बदलाव है, जबकि तांबई रंग की प्रमुखता ऊंचे दर्जे का अहसास कराती है.

1886 बैजिंग के साथ गोल्डन बेज स्टिचिंग वाली ड्यूल मटीरियल सीटें इसे मर्सिडीज के आला दर्जे के केबिनों में से एक बनाती हैं. अंदरूनी सजावट भले इलेक्ट्रिक हो, लेकिन आकार के हिसाब से इसमें अंदर की जगह बहुत ज्यादा नहीं है. केबिन तरह-तरह के सहायता और इंफोटेनमेंट सिस्टम से भरा हुआ है जिसमें नवीनतम एनटीजी 6 एमबीयूएक्स सिस्टम और 'हे मर्सिडीज’ के रूप में एक आभासी सहायक लगाए गए हैं. 

इसके स्टीयरिंग व्हील पर लगे पैडलों का उपयोग गियर बदलने के लिए नहीं किया जाता (क्योंकि इसमें कोई गियर नहीं हैं) बल्कि इनसे बैटरी की स्थिति जानी जाती है. सभी टेस्ट में इसे एक बार चार्ज करने पर 400 किमी से अधिक की दूरी तक जाने वाला बताया गया है, लेकिन हमारी टेस्ट ड्राइव में यह 350 किमी से कुछ ज्यादा थी.

ऑन-बोर्ड चार्जर 7.5 किलोवाट आवर तक की एसी चार्जिंग को सपोर्ट करता है जबकि कंबाइंड चार्जिंग सिस्टम 100 किलोवाट तक की फास्ट चार्जिंग में सक्षम है. कंपनी का दावा है कि सामान्य वाल चार्जर से ईक्यूसी बैटरी को 10 प्रतिशत से पूरी तरह चार्ज होने में 20 घंटे लगेंगे जबकि कंपनी की ओर से दिया गया वॉल बॉक्स इसे 10 घंटे में चार्ज कर देगा. इसके अलावा 50 किलोवाट आवर के डीसी फास्ट चार्जर से इसे 90 मिनट में पूरी तरह से चार्ज किया जा सकता है.

जहां तक इसे चलाने की बात है, तो इक्यूसी किसी स्पोर्ट्सकार की तरह से तेज है. थ्रॉटल (या पेडल) की प्रतिक्रिया गजब की है, जबकि वाहन का वजन और ऑल-व्हील ड्राइव पहियों को मिल रहे काफी अधिक टॉर्क का उपयोग करने की क्षमता देते हैं. इसका केबिन शांत है और यहां तक कि मोटर की आवाज भी नहीं आती.

इसके सस्पेंशन सवारी का आरामदेह अनुभव प्रदान करते हैं और शहरी सड़कों पर हमारी ड्राइव के दौरान इनका अनुभव उत्कृष्ट था (हालांकि औद्योगिक कस्बे मानेसर में कई स्पीडब्रेकर्स से पर गुजरते हुए हमारे मन में ग्राउंड क्लीयरेंस के बारे में संदेह था).

अब जबकि अधिकांश निर्माता विद्युत-नियंत्रित स्टीयरिंग विकसित करने पर लगे हैं, तब इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि ईक्यूसी का स्टीयरिंग मिले संकेतों के प्रति काफी प्रतिक्रियाशील और प्रत्यक्ष है. वास्तव में यह कुछ अन्य मर्सिडीज में दिए जा रहे स्टीयरिंग सेट अप से बेहतर लगा.

पावर: 408 बीएचपी
टॉर्क: 760 एनएम
0-100 केएमपीएच:
5.1 सेकेंड
रेंज:445-471 किमी (दावा)
कीमत: 1.4 करोड़ रु. (अनुमानित)

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