जाबिर करात, 30 वर्ष
संस्थापक, ग्रीन वर्म्स, कोझिकोड
केरल के तमारास्सेरी में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जाबिर करात हमेशा से कुछ अलग करना चाहते थे. दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर जाबिर को 2012 में गांधी फेलोशिप मिली और उन्होंने मुंबई नगरपालिका के स्कूलों में सीखने की क्षमता में सुधार के लिए डिजाइन की गई टीम के एक अंग के रूप में काम करना चुना. चारों तरफ कचरे के ढेर और सरकारी अफसरों की ओर से बरती जा रही उपेक्षा को देखते हुए जाबिर ने वैज्ञानिक रूप से कचरे के प्रबंधन के तरीके खोजने की ठानी.
कूड़ा निस्तारण के तरीकों की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करने और इसमें आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए उन्होंने कुछ समय के लिए कचरा बीनने वाले के रूप में भी काम किया. नवंबर 2014 में उन्होंने ग्रीन वर्म्स की स्थापना की, जो कोझिकोड में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक स्टार्ट-अप था.
जाबिर कहते हैं, ''हमने स्थानीय स्तर पर इसे मात्र 300 किलो कचरे के प्रबंधन के साथ शुरू किया. आज हम रोज 35 टन बायोडिग्रेडेबल और 850 टन गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का प्रबंधन करते हैं. हम इस साल 3.8 करोड़ रु. से ज्यादा का कारोबार कर चुके हैं और अगले साल हमारा लक्ष्य 8 करोड़ रु. का है.'' ग्रीन वर्म्स ने बायोगैस, खाद बनाने और अन्य मूल्य वर्धित उत्पाद बनाने के लिए अब तक 36,000 टन गीले कचरे का उपयोग किया है.
लगभग 27,720 टन सूखे कचरे का पुनर्नवीनीकरण किया गया और 63,720 टन कचरे को लैंडफिल से हटाया गया. ग्रीन वर्म्स अब अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक विश्वसनीय नाम है. यह स्थानीय स्व-शासन निकायों, कॉर्पोरेट घरानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ भागीदारी और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक समाधान प्रदान करता है. फर्म में अब 22 पूर्णकालिक कर्मचारी और 142 ठेका मजदूर कार्यरत हैं.
जाबिर कहते हैं, ''जब हमने कचरे से होने वाली बर्बादी के क्षेत्र में काम करने की शुरुआत की तो ज्यादातर लोग हमें गिरी नजरों से देखते थे. उन्होंने एक अच्छा काम न चुनने के लिए मेरा मजाक उड़ाया. लेकिन केरल में एक बेहतर माहौल बनाकर मैंने उन्हें गलत साबित कर दिया है.'' वे हंसते हुए आगे जोड़ते हैं, ''आज लोग मेरा मोबाइल नंबर जाबिर वेस्ट (कचरा) के रूप में सेव करते हैं!''
परिवर्तन का पैमाना
स्थानीय स्व-शासन निकायों के साथ मिलकर कचरा प्रबंधन के उपाय लागू करने का काम कर रहे.
केरल में लोग कचरा प्रबंधन के काम को लेकर बहुत हीन भावना रखते हैं. वे समझते हैं, यह तो सरकार का काम है.
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