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अनजाने नायकः सहूलत का पहिया

अग्रवाल राज्य सरकार के लिए एक बड़ी परेशानी का अच्छा समाधान ढूंढ़ निकालने वाले अधिकारी बन गए हैं. जहानाबाद में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) रहते हुए उन्होंने नक्सलवाद के लिए कुख्यात रहे जिले को विकास का प्रतीक बनाने से लेकर पानी की किल्लत वाले नालंदा जिले को, डीएम रहने के दौरान कृषि के लिए पहचाने जाने वाले जिले में बदल दिया.

प्रदूषण पर पहरा  प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट देने वाले वाहन के साथ संजय अग्रवाल
प्रदूषण पर पहरा प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट देने वाले वाहन के साथ संजय अग्रवाल
अपडेटेड 25 दिसंबर , 2019

अमिताभ श्रीवास्तव

संजय अग्रवाल, 43 वर्ष

सचिव, बिहार परिवहन विभाग, पटना

नियंत्रित प्रदूषण (पीयूसी) सर्टिफिकेट के नियमों का उल्लंघन करने पर 10,000 रुपए तक का जुर्माना बिहार के मोटर चालकों के लिए बड़ी समस्या थी. पटना में हर साल 1,75,000 से अधिक वाहन पंजीकृत होते हैं, पर शहर में केवल 100 प्रदूषण परीक्षण केंद्र थे.

राज्य के परिवहन विभाग के सचिव और 2002 बैच के आइएएस अधिकारी संजय अग्रवाल ने तत्काल इस अंतर और इसकी परेशानी को भांप लिया. नए केंद्र खोलने के अलावा, नए मोटर वाहन अधिनियम के प्रभावी होने के ठीक एक पखवाड़े के भीतर उन्होंने 'मोबाइल प्रदूषण जांच वाहन' भी लॉन्च किए. पटना में अब ऐसे 10 वाहन उपलब्ध हैं, जिन्हें बुलाया जा सकता है.

अग्रवाल कहते हैं, ''लोग इन वाहनों को अपनी हाउसिंग सोसाइटी में बुला सकते हैं और मिनटों में मौके पर जारी पीयूसी प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं. हमारी योजना बिहार के सभी जिलों में ऐसे वाहन शुरू करने की है. यह ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा मददगार है क्योंकि हमारे पास गांवों में बहुत कम प्रदूषण परीक्षण केंद्र हैं.'' और सबसे अच्छी बात कि यह सुविधा बिना किसी अतिरिक्त कीमत पर उपलब्ध है. विभाग ने सेवा प्रदाता के साथ राजस्व साझेदारी का एक मॉडल तैयार किया है.

अग्रवाल राज्य सरकार के लिए एक बड़ी परेशानी का अच्छा समाधान ढूंढ़ निकालने वाले अधिकारी बन गए हैं. जहानाबाद में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) रहते हुए उन्होंने नक्सलवाद के लिए कुख्यात रहे जिले को विकास का प्रतीक बनाने से लेकर पानी की किल्लत वाले नालंदा जिले को, डीएम रहने के दौरान कृषि के लिए पहचाने जाने वाले जिले में बदल दिया. अग्रवाल उससे कहीं आगे बढ़कर काम करने का जज्बा दिखाते हैं जो किसी नौकरशाह से अपेक्षित है.

नालंदा में एक वैकल्पिक सिंचाई प्रणाली विकसित करने की कोशिश के बजाए, उन्होंने मौजूदा सिंचाई नहरों की सफाई और पुनरुद्धार को मनरेगा से जोड़कर स्थानीय लोगों के सक्रिय समर्थन से समस्या का निदान कर दिया. नालंदा में ग्रामीण विकास योजनाओं के उत्कृष्ट कार्यान्वयन के लिए उन्हें 2012 में प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए चुना गया था.

संजय ने परिवहन सचिव के रूप में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और पिछले वित्तीय वर्ष में सरकारी राजस्व में 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की है. पिछले साल मई में पटना में सिटी बस सेवा शुरू करने का श्रेय भी उन्हें जाता है. शुरुआत के छह महीने के भीतर इन बसों में रोजाना 50,000 से अधिक यात्री सफर करते हैं. उन्होंने परिवहन विभाग में कई नई योजनाएं शुरू कीं हैं जिनमें ई-पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रणाली, डीलर पॉइंट रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स के ऑनलाइन भुगतान जैसे उपाय शामिल हैं.

'गांवों के उपभोक्ताओं के लिए इस कदम का महत्व ज्यादा है क्योंकि वहां प्रदूषण जांच केंद्र बहुत कम हैं''

परिवर्तन का पैमाना

प्रदूषण जांच करने वाली गाड़ी पटना में चल रही है जिससे लोग घरों के पास वाहन का प्रदूषण सर्टिफिकेट ले सकते हैं.

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