मृणि देवनानी
ऋषि तिवारी, 49 वर्ष
संस्थापक-सचिव, आरएसएसडब्ल्यूएलडी,
ग्रेटर नोएडा, यूपी
ऋषि तिवारी ग्रामीण क्षेत्रों और जेलों में ज्ञान का प्रसार करने के लिए काम करने वाली संस्था रंगनाथन सोसाइटी फॉर सोशल वेलफेयर ऐंड लाइब्रेरी डेवलपमेंट (आरएसएसडब्लूएलडी) के संस्थापक-सचिव हैं. तिवारी कहते हैं, ''पिताजी मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में अफसर थे. जब वे भिंड में तैनात थे तो हम जिला जेल के पास रहते थे. मैंने वहां कैदियों को अलग-थलग रहते हुए अवसाद और हताशा में डूबते देखा था.''
2005 में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) फाउंडेशन के हेड लाइब्रेरियन के रूप में ज्वाइन करने के बाद तिवारी की संयोग से बिमटेक के निदेशक हरिवंश चतुर्वेदी से मुलाकात हो गई और उन्होंने चतुर्वेदी से कैदियों को लेकर अपना नजरिया साझा किया. चतुर्वेदी के संरक्षण में 2009 में आरएसएसडब्ल्यूएलडी की नींव रखते हुए तिवारी ने जेलों और ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय स्थापित करना अपना मकसद बनाया. संगठन मुख्य रूप से कैदियों के पुनर्वास, सामुदायिक कल्याण, सामाजिक जागरूकता और दान और पुस्तकालयों के प्रचार के लिए काम करता है.
आधिकारिक तौर पर उत्तर प्रदेश की हर जेल में पुस्तकालय है. हालांकि, आरएसएसडब्ल्यूएलडी के सदस्यों की एक टीम ने पाया कि इनमें से कई उपेक्षित थे. तिवारी कहते हैं, ''हमने उन्हें पुनर्विकसित करने की एक योजना पेश की और इस तरह मार्च 2012 में हमारे पहले 'बिमटेक पुस्तकालय' की शुरुआत हुई. इन प्रयासों से कैदियों के बीच साक्षरता दर में वृद्धि और हिंसा तथा आत्महत्या में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं.''
एआइजी जेल यूपी, शरद कुलश्रेष्ठ, कहते हैं, ''हमारे पास यूपी में 1,00,000 से ज्यादा कैदी हैं. अगर हम 100 कैदियों की भी मानसिकता बदल सके तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी.'' डासना जेल के अधीक्षक विपिन के. मिश्र कहते हैं, ''पुस्तकालय, कैदियों को अपने जीवन की इस अवधि का उपयोग खुद को बौद्धिक रूप से बदलने और विकसित करने के अवसर देते हैं.'' सबसे बड़ी चुनौती अनुमति प्राप्त करना और कानूनी औपचारिकताएं पूरा करना था. तिवारी बताते हैं, ''कैदियों को पुस्तकालयों में लाना भी एक बड़ा काम था और अधिकारियों के समर्थन से यह हकीकत बन गया.
हमने गाजियाबाद, लखनऊ, मेरठ, गौतम बुद्ध नगर, अलीगढ़, इटावा, आगरा, बुलंदशहर, फिरोजाबाद और मथुरा में जिला जेलों में 11 पुस्तकालयों की स्थापना की है और हाल ही में मध्य प्रदेश की ग्वालियर और नरसिंहपुर केंद्रीय जेल में भी पुस्तकालय स्थापित किए हैं.''
परिवर्तन का पैमाना
जेलों में लाइब्रेरी खोलकर तिवारी ने कैदियों के बीच साक्षरता दर सुधारी. इससे हिंसा और खुदकुशी की दर घटी.
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