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अनजाने नायकः फैलती रोशनी

आज एमजीपी उत्तर प्रदेश के छह जिलों—सीतापुर, गोंडा, बहराइच, सिद्धार्थनगर, बाराबंकी और लखीमपुर खीरी में मौजूद है. यह 8,000 से ज्यादा घरों और 2,000 से ज्यादा सूक्ष्म उद्यमों को बिजली देता है. और मामला सिर्फ सौर ऊर्जा के सुलभ होने का ही नहीं है बल्कि इससे स्वास्थ्य के खतरे भी कम होते हैं, जिससे फायदा ही होता है.

रोशन भविष्य मेरा गांव पावर के चेयरमैन सुनीत आर्य उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में भसिया गांव के ब
रोशन भविष्य मेरा गांव पावर के चेयरमैन सुनीत आर्य उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में भसिया गांव के ब
अपडेटेड 25 दिसंबर , 2019

मेरा गांव पावर, 2010

उत्तर प्रदेश

जब निखिल जयसिंहानी, ब्रायन माइकल शाद और संदीप पांडे ने 2010 में मेरा गांव पावर (एमजीपी) अभियान शुरू किया तब इसके पीछे बड़ा सामान्य विचार था—उत्तर प्रदेश के पिछड़े जिलों के गांवों को रोशन करने के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग उससे भी कम कीमत पर करना जितने में चिराग जलाने के लिए मिट्टी के तेल की लागत आती है.‌ जिन घरों में बिजली नहीं पहुंची है, उनके लिए कंपनी का सोलर होम प्रोजेक्ट उम्मीद की किरण थी. प्रत्येक प्रोजेक्ट में एक सोलर पैनल हब है. इस छोटे से ग्रिड से 10-15 घरों को बिजली दी जाती थी. उपभोक्ताओं से हर हफ्ते पैसा लिया जाता था.

आज एमजीपी उत्तर प्रदेश के छह जिलों—सीतापुर, गोंडा, बहराइच, सिद्धार्थनगर, बाराबंकी और लखीमपुर खीरी में मौजूद है. यह 8,000 से ज्यादा घरों और 2,000 से ज्यादा सूक्ष्म उद्यमों को बिजली देता है. और मामला सिर्फ सौर ऊर्जा के सुलभ होने का ही नहीं है बल्कि इससे स्वास्थ्य के खतरे भी कम होते हैं, जिससे फायदा ही होता है. एमजीपी का अनुमान है कि उसके लैंप ने हर घर को सालाना 140 किलो कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद की है.

2018 में इस कंपनी के मालिकान बदल गए और फिलहाल तीन निवेशक इसकी मालिक हैं—लग्जम्बर्ग की इनसिटर सीड एसए, फ्रांस की एन्जी रैसेम्बलियर्स डीएनर्जीज एसएएस और बेकल्जियम की ईडीएफआइएमसी-इलेक्ट्रिफाइ. क्लीन टेक और हाइ-टेक कंपनियों में काम कर चुके इसके चेयरमैन सुनीत आर्य को बिजली उद्योग का लंबा अनुभव है. आर्य का कहना है, ''मैंने ऐसा कुछ करने का फैसला किया जिससे भारत के गांवों की जिंदगी बेहतर हो.'' लेकिन आगे समस्याएं भी हैं.

सरकार के ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम में तेजी आने के साथ ही कंपनी को कुछ उपभोक्ताओं से हाथ धोना पड़ा. लेकिन आर्य अब भी सौर ऊर्जा की क्षमता पर भरोसा कर रहे हैं. इसके अलावा, फोर्ब्स मैगजीन ने पिछले साल अपनी एक रिपोर्ट में द एनर्जी ऐंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट के एसोसिएट डायरेक्टर देबजीत पालित के हवाले से बताया कि उत्तर प्रदेश में 1.46 करोड़ घरों में बिजली नहीं पहुंची है. हजारों लोगों की जिंदगी रोशन करने के लिए यह एमजीपी जैसी कंपनियों के लिए बड़ा अवसर है.

''मैंने ऐसा कुछ करने का फैसला किया जिससे भारत के गांवों के लोगों की जिंदगी बेहतर हो''

परिवर्तन का पैमाना

एमजीपी उत्तर प्रदेश के पिछड़े जिलों में 8,000 से ज्यादा घरों और 2,000 से ज्यादा उद्यमों को बिजली मुहैया कराता है.

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