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तेलंगानाः असली हैदराबादी बिरयानी की खोज

हैदराबादी बिरयानी दुनिया भर में मशहूर है. आखिर असली हैदराबादी बिरयानी में ऐसा क्या खास है कि यहां के लोग अपने इस पकवान पर इतना इतराते हैं?

हैदराबाद का जायका
हैदराबाद का जायका
अपडेटेड 17 दिसंबर , 2018

मुझे अब तक एक ऐसा कोई दूसरा शहर नहीं मिला है जिसके लोगों में बिरयानी के लिए वैसा जुनून दिखता हो जैसा हैदराबादियों में पाया जाता है. सोशल मीडिया पर आप बिरयानी को लेकर कोई चर्चा शुरू करें, हैदराबादी इस चर्चा को तुरंत अपने हक में कर लेंगे. आपको भारत के लगभग हर क्षेत्र में उस इलाके की अपनी खास बिरयानी मिल जाएगी. फिर भी "हैदराबादी बिरयानी'' आपको पूरे देश के साथ ही साथ दुनिया भर के सभी "भारतीय'' रेस्तरांओं के मेन्यू कार्ड पर दिख जाएगी. क्या अब भी आपको शिकायत होगी कि आखिर हैदराबादी लोग अपने शहर के सबसे मशहूर पकवान पर क्यों इतराते हैं?

हैदराबाद के बाहर के रेस्तरांओं में हैदराबादी बिरयानी के नाम पर जो बिरयानी परोसी जाती है, उसके जायके, उसके मिजाज में रेस्तरां-दर-रेस्तरां फर्क दिख जाता है. कुछ मसालेदार होंगी, कुछ नहीं होंगी. कुछ में ऊपर से पुदीने या फिर धनिए की पत्तियां छिड़की हो सकती हैं. कुछ में ऐसा नहीं भी हो सकता है. हैदराबादी नाम से बिकने वाली कुछ बिरयानी में चावल के ऊपर गाढ़े और गीले मसाले की परत भी दिख सकती है.

तो "ओरिजिनल'' वाली हैदराबादी बिरयानी दरअसल होती कैसी है? बिरयानी का जबरदस्त दीवाना होने के नाते मैंने भी सोचा कि क्यों न उसी शहर में इसकी पड़ताल की जाए जिसका नाम इसके साथ जुड़ता है. मैंने हैदराबाद की कई ऐसी जगहों को खंगाला, जो अपनी बिरयानी के लिए प्रसिद्ध हैं और मैं यहां केवल बिरयानी की सबसे पुरानी और सबसे प्रसिद्ध दुकान होटल पैराडाइज की बिरयानी की बात ही नहीं कर रहा. पैराडाइज के अलावा भी कई ऐसे रेस्तरां हैं जिनकी बिरयानी हैदराबादियों की पसंदीदा है. फिर भी मैं आपको तीन ऐसी जगहें बताता हूं जहां की बिरयानी मुझे बहुत पसंद आई. उनमें से दो पुराने शहर में हैं तो एक आधुनिक हैदराबाद में.

कैफे बहार, बेगमपेट

कैफे बहार जहां स्थित है, वह आधुनिक शहर कहलाता है. इस कैफे में बैठने के लिए वातानुकूलित और गैर-वातानुकूलित दोनों तरह के इंतजाम हैं और यह जगह हमेशा ग्राहकों से भरी रहती है. यहां की बिरयानी के ऊपर भी मेरे पैतृक स्थान कोलकाता की "स्पेशल'' बिरयानी की तरह उबले अंडे दिख जाते हैं. इसमें आलू नहीं डाला जाता और इसमें चावल की मात्रा ज्यादा है लेकिन तेलंगाना के लोग चावल से बहुत प्यार करते हैं.

बिरयानी में चावल दाना-दाना साबुत, अलग-अलग और बहुत सुंदर दिखता है. मीट और मसालों के स्वाद को हावी नहीं होने दिया जाता और बिरयानी पकाते समय इस बात का पूरा ख्याल रखा जाता है कि उक्वदा किस्म वाले चावल की पूरी गुणवत्ता निखरकर आए. चावल के बीच-बीच में आपको मसाले भी बिखरे हुए दिख जाएंगे और ये आपकी स्वाद ग्रंथियों को लुभाते रहते हैं. यखनी के मसालों में बहुत ज्यादा मिर्च, तेल या जरूरत से ज्यादा मसाले नहीं होते.

बिरयानी में चावल और मटन (बकरे का मांस) का अनुपात वैसा ही था जैसा कोलकाता की बिरयानी में होता है, 80रू20 का. जबकि मुंबई की बिरयानी में चावल की मात्रा इससे कम और मटन ज्यादा होता है. वहां चावल और मटन 60रू40 के अनुपात में रहता है. और हां, यहां बिरयानी का मटन बहुत नरम भी है. कुल मिलाकर आप उंगलियां तक चाट जाएंगे.

शादाब, पुराना हैदराबाद

मैंने पुराने हैदराबाद जाकर यहां की बिरयानी का स्वाद चखा तो समझ आया कि लोगों को शादाब की बिरयानी यूं ही पसंद नहीं आती.

यह रेस्तरां भी ग्राहकों से भरा रहता है. इनके पास परिवार के साथ आए लोगों के लिए बैठने के अलग से इंतजाम हैं और यदि आप अकेले हैं तो आपको टेबल शेयर करनी होगी. यहां भी, एक बड़े प्लेट में भरकर बिरयानी परोसी जाती है. हालांकि ज्यादातर लोग पूरी प्लेट चट कर जाते हैं फिर भी इक्के-दुक्के तो ऐसे होते ही हैं जिनके प्लेट की बिरयानी उनकी भूख से ज्यादा हो जाती है.

यहां की बिरयानी की खासियत उसका मटन है. मैंने इस शहर में जितनी जगह बिरयानी खाई, उनमें से सबसे ज्यादा रसीला मटन यहीं का था. सुगंधित और रसेदार भी. बिरयानी में नल्ली-गूदा था जिसे खाने के बाद चूसा भी जा सकता था.

आप जैसे चाहें वैसे खाएं, यहां कोई आपके खाने के अंदाज को देखकर आपका मूल्यांकन नहीं करेगा. आप हैदराबादी बिरयानी के दीवाने हैं, तो शादाब आपका दिल से इस्तकबाल करता है. यहां की बिरयानी में मसाला तो है लेकिन वह मसाला इस पकवान का आनंद बढ़ाता है, अपने बेहिसाब तीखेपन या गर्मी से खाने वाले को परेशान नहीं करता. मेरे ख्याल से यहां की बिरयानी में कूटे हुए मिर्च की गर्मी भी थी जो बहार में नहीं थी. तेलंगाना के मिर्च प्रेमियों के लिए यह बिरयानी वाकई एक फुल चटपटा व्यंजन है.

शाह गौस, पुराना हैदराबाद

शाह गौस की शहर में कई शाखाएं हैं लेकिन इनके मूल रेस्तरां की तुलना में दूसरी शाखाओं में कम भीड़ दिखती है. इनके मूल रेस्तरां में माहौल बहुत बढिय़ा है. यह माहौल बिरयानी का स्वाद इतना बढ़ा देता है, जितना शायद बिरयानी के साथ परोसा जाने वाला मिर्च का सालन और रायता भी नहीं बढ़ाता. शादाब की तरह, शाह गौस की बिरयानी में लाल मिर्च की मध्यम गर्मी नजर आ रही थी.

यहां बिरयानी की प्लेट कई साइज में उपलब्ध है.

सबसे "छोटे'' साइज वाली बिरयानी की प्लेट में भी इतनी बिरयानी थी कि मेरे जैसे कई लोग खा लें. ईमानदारी से कहूं तो पूरी बिरयानी को एक बार में खाना मेरे जैसे इनसान के बूते की बात नहीं, इसके लिए तो कोई हट्टा-कट्टा, अच्छी खुराक वाला व्यक्ति ही चाहिए.

चावल के दाने लंबे, एक दूसरे से अलग और सुगंधित थे. मटन के टुकड़े भी आकार में अच्छे और मुलायम थे. मसाला ग्रेवी जैसा नहीं था, फिर भी चावल सूखा-सूखा नहीं था. मसाले संतुलित थे और इसमें लाल मिर्च भी अपनी मौजूदगी का एहसास कराती थी, फिर भी कुल मिलाकर बिरयानी बहुत लजीज थी और उसने मेरे पसीने निकाल दिए. हैदराबाद जाकर हैदराबादी बिरयानी का जायका लेने का मौका मिले, तो उसे हाथ से जाने मत दीजिएगा. ठ्ठ

हैदराबाद का जादू

यहां बिरयानी में चावल मुख्य भूमिका में होता है, मटन नहीं

जबां पे लागा-लागा रे

यहां की बिरयानी में मसाले ज्यादा तेज नहीं होते

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