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कैफे कॉफी डेः मेल-मुलाकात का पसंदीदा ठिकाना

एक सुघड़ माहौल में दोस्तों के साथ कॉफी का एक कप लेकर बैठिए तो सुकून के उन पलों में क्या कुछ नहीं हो सकता. कैफे कॉफी डे ने अपने इस मिजाज की सोच को ही अपनी टैग लाइन बना लिया. वह अपने इस मकसद में कामयाब रहा है कि उसके ही खेतों में उगी कॉफी पीने के लिए उसके ग्राहक थोड़ा बेफिक्र होकर बैठें

गर्मागरमः काफी के साथ बर्गर का मजा
गर्मागरमः काफी के साथ बर्गर का मजा
अपडेटेड 12 दिसंबर , 2018

शहर में किसी बिजनेस मीटिंग के लिए जगह की तलाश में हैं या दोस्तों के साथ मिलने-मिलाने का प्रोग्राम बना रहे हैं तो कैफे कॉफी डे (सीसीडी) ऐसे मौकों के लिए आपके वास्ते एक बेहतर विकल्प हो सकता है. कॉफी, शेक, ड्रिंक्स के साथ गार्लिक ब्रेड, मसका मसाला बन, क्रिस्पी वेज वड़ा जैसे हल्के-फुल्के ऑप्शन तो हैं ही, साथ ही अगर लंच या डिनर के समय पर पहुंचे हैं और कुछ भारी खाने का मन है तो राजमा चावल, पनीर चावल, नूडल्स, पिज्जा, वेज रैप, बर्गर जैसे विकल्प भी आपके पास होंगे. कैफे कॉफी डे में बैठने की व्यवस्था या माहौल भी इस तरह तैयार किया जाता है कि लोग घंटों यहां बैठ कर अपना समय बिताना पसंद करते हैं और थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ ऑर्डर करते रहते हैं.

हमने सीसीडी में कैपुचिनो कॉफी ऑर्डर की. यह यहां सबसे ज्यादा बिकने वाली चीज है, खासकर सर्दियों में. गर्मियों में कोल्ड कॉफी, शेक्स और कूल ब्लू जैसे ड्रिंक्स भी डिमांड में रहते हैं. यह लंच से पहले करीब 1 बजे का समय था तो कॉफी के साथ क्रिस्पी वेज वड़ा ऑर्डर किया. एक्सप्रेसो शॉट और टोन्ड दूध से बनी कॉफी के साथ क्रिस्पी वेज वड़ा का मेल काफी अच्छा है. टमाटर, धनिए से बनी चटनी इन क्रिस्पी वड़ों के स्वाद को और बढ़ा देती है.

सीसीडी के ब्रू मास्टर ने बताया कि एक कप कॉफी बनाने के लिए हम 30 एमएल एक्सप्रेसो शॉट और 140 एमएल दूध का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद चोको पाउडर को ऊपर से छिडका जाता है. कॉफी के कप के ऊपर बना पत्ती, दिल या कोई और आकृति दरअसल ब्रू मास्टर की कला होती है. इसके लिए किसी मशीन या तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जाता.

ब्रू मास्टर इस तरह से कप में दूध को डालते हैं कि ये आकृतियां खुद व खुद बन जाती हैं. कॉफी का स्वाद बढ़ाने के लिए सीसीडी आपको ऐड ऑन का विकल्प भी देता है यानी कुछ मनपंसद चीजें डालकर आप अपनी कॉफी का स्वाद और बढ़ा सकते हैं. मसलन, कोल्ड कॉफी में लोग आइसक्रीम डालकर खाना पसंद करते हैं. इसी तरह पिज्जा पर चीज की टॉपिंग कराकर आप इसका स्वाद बढ़ा सकते हैं.

सीसीडी के जिस कैफे में हम पहुंचे वह गोल्ड रश कैफे था. यहां के मेन्यू में कॉफी, केक, लाइट ईट, बर्गर, रैप, सैंडविच, ब्रेड, पिज्जा, सिग्नेचर मील, होलसम सलाद, वेलनेस रेंज, सिपर एन चिलर्स जैसे ढेर सारे विकल्प थे. ये मेन्यू सीसीडी के अलग-अलग कैफे में अलग-अलग हो सकते हैं. सीसीडी के मुख्यतः चार तरह के कैफे होते हैं. एक्सप्रेस, स्क्वायर, नॉर्मल कैफे और गोल्ड रश. एक्सप्रेस कैफे शुरुआती कैफे होते हैं. यहां मेन्यू लिमिटेड होता है. हालांकि कॉफी की कीमत अन्य कैफे से कम होती है.

ये कैफे कम जगह में खुल जाते हैं. हॉस्पिटल, बस स्टैंड, पेट्रोल पंप पर सामान्यतया ये कैफे मिलते हैं. इसके अलावा स्क्वायर में ऑर्डर कस्टमर की टेबल से लिया जाता है, जिसका मैन्यू गोल्ड रश की तरह ही होता है. इसके अलावा नॉर्मल और गोल्ड रश कैफे सेमी सेल्फ सर्विस वाले होते हैं यानी आपको ऑर्डर काउंटर पर देना होगा, जो टेबल पर दे दिया जाएगा. सीसीडी जाने से पहले आप अपनी जरूरत देख लें और उसी आधार पर कैफे का चयन करें.

सीसीडी में खाने-पीने के सामान की कीमत अन्य कैफे की तुलना में कम होती है. मसलन, एस्प्रेसो कैफे में आपको 99 रुपए में कॉफी मिल जाती है, वहीं गोल्ड रश कैफे में कैपुचिनो का दाम 140 रुपए होता है. हाल में ही सीसीडी ने टोटली वर्थ इट मेन्यू नाम से नया मेन्यू लॉन्च किया है. इसमें खाने के सामान की शुरुआत 29 रुपए के मसका मसाला बन से होती है.

इसके अलावा 69 रुपए में क्रिस्पी वेग कुलचा, 99 रुपए में राजमा चावल, 149 रुपए में बटरी चिकल कीमा राइस जैसे ऑप्शन हैं. दूसरी कॉफी चेन से तुलना करेंगे तो कैफे कॉफी डे में खाने-पीने के सामान की कीमत किफायती लगेगी.

कैसे हुई शुरुआत

कैफे कॉफी डे की शुरुआत जुलाई 1996 में बेंगलूरू की ब्रिगेड रोड से हुई. पहली कॉफी शॉप इंटरनेट कैफे के साथ खोली गई. इंटरनेट उन दिनों देश में पैठ बना रहा था. इंटरनेट के साथ कॉफी का मजा नई उम्र के लिए खास अनुभव था. जैसे-जैसे व्यवसायिक इंटरनेट अपने पैर फैलाने लगा, सीसीडी ने अपने मूल व्यवसाय कॉफी के साथ रहने का फैसला किया और देशभर में कॉफी कैफे के रूप में बिजनेस करने का निर्णय लिया. शुरुआती 5 वर्षों में कुछेक कैफे खोलने के बाद सीसीडी आज देश की सबसे बड़ी कॉफी रिटेल चेन बन गई है. इस समय देश के 247 शहरों में सीसीडी के कुल 1,758 कैफे हैं. खास बात यह है कि कंपनी फ्रैंचाइजी मॉडल पर काम नहीं करती और सभी कैफे कंपनी के अपने हैं.

कैफे कॉफी डे के संस्थापक वी.जी. सिद्धार्थ का नाता ऐसे परिवार से है जिसका जुड़ाव कॉफी की खेती की 150 वर्ष पुरानी संस्कृति से है. उनके परिवार के पास कॉफी के बागान थे, जिसमें महंगी कॉफी उगाई जाती थी. यह व्यापार के लिए सहायक हुआ, जो बाद में परिवार के लिए एक सफल व्यापार के रूप में स्थापित हुआ. '90 के दशक में कॉफी मुख्यतः दक्षिण भारत में ही पी जाती थी और इसकी पहुंच पांच सितारा होटल तक ही थी. सिद्धार्थ कॉफी को आम पहुंच तक ले जाना चाहते थे. सिद्धार्थ का सपना और परिवार की कॉफी बिजनेस में गहरी समझ ही कैफे कॉफी डे की शुरुआत का कारण था.

कैफे कॉफी डे के मुक्चय कार्यकारी अधिकारी वेणु माधव कहते हैं, "सीसीडी की खासियत इसकी पोजिशनिंग (युवाओं के हैंगआउट के लिए सही जगह) है. सीसीडी में उन्हें आकर्षित करने वाला माहौल और वाजिब दामों में अच्छी क्वालिटी का खाना-पीना मिलता है. इसके अलावा सीसीडी की एक और खासियत यह है कि कैफे में परोसी जाने वाली कॉफी को वह अपने बगान खुद ही उगाता है.''

सीसीडी की टैगलाइन "ए लॉट कैन हैपन ओवर कॉफी'' दरअसल इसकी पोजिशनिंग को अच्छी तरह स्पष्ट करती है. सप्ताह के दौरान किसी सीसीडी में जाएंगे तो लोग आपको वहां मीटिंग करते, युवा दोस्तों के साथ टाइम बिताते या लैपटॉप पर काम करते दिख जाएंगे. बड़ी बिजनेस डील से लेकर लोगों को सच्चा प्यार मिलने तक की कहानियां सीसीडी के साथ जुड़ी हैं. ठ्ठ

फुर्सत

का अड्डा

नोएडा सेक्टर 18 के डीएलएफ मॉल में सीसीडी

सफरनामा

पहला सीसीडी

1996 में बेंगलूरू में एक इंटरनेट कैफे के साथ

देश में विस्तार

देश के कुल 247 शहरों में 1,758 कैफे

विदेशों में विस्तार

नवंबर 2005 में पहला कैफे वियना, ऑस्ट्रिया में खुला

जीत का मंत्र

अफोर्डेबिलिटी, एक्सेसिबिलिटी और एक्सेप्टेबिलिटी सीसीडी की सफलता का राज

खासियत

कैफे में परोसी जाने वाली कॉफी को खुद उगाते हैं

पसंदीदा खान-पान

कैपुचिनो कॉफी, कोल्ड कॉफी, शेक्स और स्नैक्स

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