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2010 की गर्मी ने उमर को नेता बनाया

पचहत्तर साल के अपने जीवन में फारूक अब्दुल्ला ने पांच कार्यकाल में 12 साल तक जम्मू और कश्मीर पर राज किया है. उनके 42 वर्षीय बेटे उमर अब्दुल्ला का बतौर मुख्यमंत्री यह तीसरा साल है. फारूक के पिता शेख अब्दुल्ला ने अपने जीवन का अधिकतर हिस्सा जेल में बिताया था, कभी महाराजा हरि सिंह ने तो कभी भारत सरकार ने उन्हें जेल भेजा.

अपडेटेड 20 जनवरी , 2013

पचहत्तर साल के अपने जीवन में फारूक अब्दुल्ला ने पांच कार्यकाल में 12 साल तक जम्मू और कश्मीर पर राज किया है. उनके 42 वर्षीय बेटे उमर अब्दुल्ला का बतौर मुख्यमंत्री यह तीसरा साल है. फारूक के पिता शेख अब्दुल्ला ने अपने जीवन का अधिकतर हिस्सा जेल में बिताया था, कभी महाराजा हरि सिंह ने तो कभी भारत सरकार ने उन्हें जेल भेजा. इसके बावजूद वे तीन कार्यकाल में 12 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे. दिसंबर की एक सर्द सुबह टहलते हुए मोरों और नीली-काली आंखों वाली लुका-छिपी करती बिल्ली के बीच 11, तीनमूर्ति लेन स्थित अपने आवास पर फारूक हमें मिले. उमर अभी-अभी जम्मू से आए हैं और तुरंत स्कूल से लौटे अपने दोनों भानजों से मिल रहे हैं (बहन सारा और उनके पति सचिन पायलट के बच्चे). उमर कहते हैं कि फारूक कहीं ज्यादा मिलनसार और बेबाक हैं और अगर उन्हें ''किताबों और संगीत के साथ एक कमरे में बंद कर दें तो आप उनका असली रूप देख पाएंगे.” उमर, खुद अपने शब्दों में, उतने ही उदार हैं, लेकिन एकांत प्रेमी हैं. उमर अपने पिता के शुक्रगुजार हैं कि वे अपने तरीके से उन्हें जम्मू और कश्मीर का राजकाज चलाने दे रहे हैं, निर्देशित नहीं कर रहे, जैसा कुछ मामलों में देखा जा सकता है. फारूक का मानना है कि 2010 में 117 लोगों की मौत ने उमर को एक 'बेहतर इंसान’ बनाया. उमर का कहना है कि उन्हें कड़ी मेहनत से परहेज नहीं और उनका कहीं जाने का इरादा नहीं है. इंडिया टुडे की एडिटर कावेरी बामज़ई और सीनियर एडिटर प्रिया सहगल ने जम्मू और कश्मीर के सबसे मुश्किल हालात की गवाह रही दो पीढिय़ों के बीच बेहतरीन संवाद को अपनी कलम से दर्ज किया है.

• आप 12 साल तक सत्ता में रहे और उमर तीन साल से मुख्यमंत्री हैं. तब और अब के कश्मीर के बीच क्या फर्क है?
फारूक अब्दुल्ला ओह, वह कश्मीर में बड़े बदलावों का दौर था. मेरे लोग मारे गए, मेरे कार्यकर्ता मारे गए, मेरे मंत्रियों को आइईडी (इमोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से उड़ा दिया गया. उन्होंने मुझे मारने की मंशा से असेंबली पर भी हमला किया. लेकिन अच्छी बात यह रही कि भारत सरकार और यहां की जनता मेरे साथ खड़ी रही. मैंने 1990 में इस्तीफा दिया और सबसे खराब दौर की शुरुआत 1991 में हुई. कई लोगों को लगा कि हालात सुधरेंगे नहीं और कश्मीर हमारे हाथ से चला जाएगा. लेकिन 2002 में चीजें बदलनी शुरू हुईं.

• किस तरह के बदलाव?
फारूक हमने आतंकवाद से टक्कर ली. हम कमजोर नहीं पड़े, हमने कहा कि कोई और तरीका नहीं है, हमें लडऩा ही होगा. सेना ने हमारा सहयोग किया. फिर मैंने एकीकृत कमान की शुरुआत की. फिर पाकिस्तान को एहसास हुआ कि आतंकवाद खुद उसके खिलाफ जा रहा है और बुरा असर डाल रहा है. 9/11 के बाद ही दुनिया को महसूस हुआ कि आतंकवाद अब ग्लोबल खतरा बन चुका है.Omar Abdullaha

• उमर ने जिस तरह पिछले तीन साल काम किया है, आप क्या सोचते हैं?
फारूक उमर का सबसे खराब दौर 2010 था. जब 117 युवाओं की मौत हुई थी.
• उस समय वे आपसे सलाह लेने आए?

फारूक सवाल सलाह का नहीं है. जब यह हुआ, तो वे टूटने की कगार पर थे. उनके साथ सिर्फ दोस्त थे और अपनी हिम्मत. खुदा का शुक्र है वह समय बीत गया. उन्होंने सबक लिया और आज वे जो हैं, उसी की देन है.

उमर मुझे नहीं लगता कि देश में कहीं भी किसी राज्य के स्तर पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी है. इसकी कई वजहें हैं. किसी भी राज्य में ऐसी विविधता नहीं जो जम्मू और कश्मीर में है. भारत के पड़ोसियों के साथ विदेश नीति का असर और किसी राज्य पर उतना नहीं जितना जम्मू और कश्मीर के मामले में है. कहीं भी इतनी सत्ता विरोधी ताकतें काम नहीं करती हैं.

• उमर में कैसे बदलाव आया है? आज आप उन्हें कैसे देखते हैं?
फारूक मुझे लगता है कि 2010 की गर्मियों में हुई घटनाओं ने राजनीति की इनकी समझदारी में काफी इजाफा किया है, बताया है कि चीजें कैसी होनी चाहिए. वे एक बेहतर इंसान बने हैं. पहले से कहीं ज्यादा बेहतर. उसी दौर से उबरकर वे नेता बन सके.

• कभी ऐसा भी समय आया जब उमर के पूछे बगैर आप खुद इन्हें लेकर बैठे हों और इनसे बात की हो?
फारूक हां. मसलन, 2009 में सेक्स संबंधी आरोपों पर जब उमर ने असेंबली में इस्तीफा दे दिया था (विपक्षी पीडीपी ने 2009 में आरोप लगाया था कि 2006 के एक सेक्स स्कैंडल में मुख्यमंत्री शामिल थे). मैंने इन्हें सलाह दी, ''आप ऐसा करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? आप गठबंधन के सहयोग से मुख्यमंत्री बने हैं और आपको ऐसा कुछ भी करना है तो गठबंधन सहयोगी से पहले बात करनी चाहिए.” मैं उखड़ गया था. फिर इन्होंने मुझसे कहा, ''लेकिन डैड, मैं अपने बच्चों का सामना कैसे करूंगा? मैं उन्हें कैसे बताऊंगा कि देखो मैं वैसा नहीं हूं जैसा उन्होंने कहा है? मैं अपने दोस्तों और बीवी के सामने कैसे जाऊंगा?” मैंने कहा, ''मैं समझ सकता हूं, पर तुमने अब कर ही दिया तो फिर झेलना भी पड़ेगा. ठीक है, गवर्नर को जांच करने दो. तब तक कोई बड़ा कदम मत उठाना.” वे काफी भावनात्मक हैं.

• वालिद से आपके रिश्ते कैसे थे?
फारूक हमारा लालन-पालन अधिकतर मां ने ही किया. पिता तो अक्सर जेल में रहते थे. लेकिन वे कड़ा अनुशासन रखते थे. मुझे उनका एक बार का थप्पड़ याद है.

• और उमर से आपके रिश्ते?
फारूक मैं काफी नरम रहा. मेरी बीवी ने इन्हें बड़ा किया. समय की पाबंदी और पैसे का अनुशासन वहीं से मिला है. सनावर के लॉरेंस स्कूल ने इन्हें पैरों पर खड़ा होना सिखाया.omar abdullah

• जब उन्होंने राजनीति में आने की इच्छा जताई, तो क्या आप चौंके थे?
फारूक वे (बीवी मॉली) मेरी जिंदगी की गवाह रही हैं. कहने के लिए जिंदगी होती है बस—आप सवेरे निकल जाते हैं और रात में लौटते हैं. कहां खाना है, कहां नहीं खाना है. तो जब उमर ने राजनीति करने की इच्छा जताई, मैंने उन्हें फोन करके बताया, ''मॉल, अब क्या करें?” उन्होंने कहा, ''वे चाहते हैं तो उन्हें किस्मत आजमाने दीजिए.” मैंने कहा, 'गुडलक’. 2002 में जब ये हारे थे, इन्होंने बड़ी हिम्मत से उसका सामना किया था.

उमर मुझे नहीं लगता कि मेरे पिता को हैरत हुई होगी. जब चीजें इनके हिसाब से नहीं चलती हैं, तो मां से बचने का यह इनका तरीका होता है.

• 2002 के चुनाव में हार का आप पर क्या असर हुआ?
उमर मुझे लगता है कि 2002 में सीधे कुर्सी पर बैठ जाना ठीक नहीं होता. मुझे इसके कारण राज्य के बारे में और ज्यादा जानने-समझने का मौका मिला. पर्सनल ग्रोथ के मामले में ऐसा नहीं है कि आप चुनाव हारकर ही वो सब सीखते हैं, जीत कर भी सीख सकते हैं. लेकिन इसने मुझे विनम्रता की सीख दी. मैं सार्वजनिक घोषणाओं में बहुत जल्दबाजी करता था, विपक्ष में होने के दौरान इसे दुरुस्त करने का मौका मिला. और मुझे लगता है कि सबसे बड़ा सबक यह मिला कि विपक्ष में रहते हुए जनता से आपका संपर्क सीधा और जमीनी रहता है क्योंकि आपके पास सरकारी हेलीकॉप्टर की सुविधा नहीं होती. अपने राज्य का भूगोल जानने का इससे बेहतर तरीका नहीं कि आप यहां-वहां गाड़ी चलाकर पहुंच गए, मैंने यही किया. इससे मुझे जमीनी सबक सीखने को मिले, लोग कैसे सोचते हैं.

• होटल कारोबार में ज्यादा खुश रहते?
उमर मुझे शक है, वह कितना उबाऊ होता!

• कश्मीरी मानसिकता समझ आई?
उमर क्या कोई ऐसा दावा कर सकता है? मैं खुद उस मानसिकता को साझ करता हूं और अपने भीतर भी जटिलताएं देखता हूं. जो लोग 2010 की गर्मियों में बगावत कर रहे थे उन्होंने बाद में वोट दिए.

• भरोसे की कमी के बारे में जो कश्मीरी लोग बात करते हैं, उसका क्या?
उमर आप उन्हें दोष दे सकती हैं? पिछले 20-22 साल में उन पर जो गुजरी है, उसे देखिए. हर संस्थान जिस पर उन्होंने भरोसा किया, नाकाम रहा है, चाहे अदालतें हों, पुलिस हो, सरकार, सिविल सोसायटी या फिर सियासी नेतृत्व.

• क्या आप अपने बेटों को भविष्य के नेता के तौर पर देखते हैं?
उमर ईमानदारी से कहूं, तो नहीं. मुझे उम्मीद है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व करने वाला मैं आखिरी अब्दुल्ला हूं. किसी के आने-जाने से पार्टी नहीं रुकती. वह आगे बढ़कर अपना नेता चुन ही लेती है. अगर मेरे बच्चे राजनीति में आते भी हैं, तो मैं उम्मीद करूंगा कि तब तक मैंने राजनीति छोड़ दी हो और वे अपनी राह खुद बना सकें.

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