उनमें से एक महान खिलाड़ी है तो दूसरा महान बनने की ओर बढ़ रहा है. हम कपिल देव के होटल सुइट के लिविंग रूम में विराट कोहली का इंतजार कर रहे थे. 53 साल के हो चुके महान खिलाड़ी काफी विनम्र हैं. वे उस समय बड़ी ही समझदारी से पेश आए जब 24 वर्षीय विराट कोहली तय समय से तीन घंटे देरी से पहुंचे. उन्होंने कहा, ‘‘कोई बात नहीं. भारत में सेलिब्रिटी क्रिकेटर होना आसान नहीं है. मैं समझता हूं कि विराट के लिए लोगों की मांगों से बचकर निकलना कितना मुश्किल होता है. यह उसका दौर है.’’ कपिल देव भी 24 वर्ष के ही थे, जब उनकी कप्तानी में भारत ने पहली बार वर्ल्ड कप जीता था. कोहली ने 2011 में जब वर्ल्ड कप ट्रॉफी अपने हाथ में उठाई, तब वे सिर्फ 23 वर्ष के थे. टीवीटीएन के स्पोर्ट्स एडिटर विक्रांत गुप्ता के साथ बातचीत में कपिल ने कहा कि यदि कोहली ने एक क्रिकेटर के करियर में आने वाली अड़चनों का सामना कर लिया तो दिल्ली के इस युवा खिलाड़ी के बैट से 10,000 रन बनने का हरभजन सिंह का अनुमान सही साबित हो सकता है. कोहली स्वीकृति में सिर हिलाते हैं, ‘‘सर, यह आप ही कह सकते हैं.’’
कपिल, 2007 में आपने विराट के बारे में कहा था, ‘‘बड़ा अच्छा मुंडा है.’’ उनमें क्या खास है? और विराट, क्या कपिल ने आपसे बात की थी?
कपिल देव: नहीं, मैंने उनसे ऐसा नहीं कहा था. उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला था और मैंने उनका काफी नाम सुना था. मैं खेल के प्रति उनके रवैए और जिस तरीके से वे खेलते थे, उसे पसंद करता था.
विराट कोहली: मुझे सर से पहली मुलाकात याद है. उन्होंने मुझे बधाई दी थी. तब तक मैंने उन्हें सिर्फ टीवी पर देखा था.
मौजूदा भारतीय टीम जीतना चाहती है. कपिल, जब आपने शुरुआत की थी, तब तो ड्रॉ को भी जीत की तरह माना जाता था.
कपिल: तब हम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बच्चे थे. हमें भरपूर प्यार, लगाव और पहचान मिलती थी. आज के क्रिकेटरों के साथ भी ऐसा ही है. पर हम अपनी प्राइवेट लाइफ भी अच्छे से जीते थे.
विराट, क्या आप इसे पसंद करते हैं कि आपकी एक प्राइवेट लाइफ हो?
कोहली: बिल्कुल. मैं उस जमाने में वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड की अलग तरह की तेज गेंदबाजी की ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा. मैं उस जमाने के बल्लेबाजों की तारीफ करना चाहूंगा क्योंकि क्रिकेट में काफी प्रतिस्पर्धा थी, पर्याप्त सुरक्षा उपाय भी नहीं होते थे.
अगर कपिल आइपीएल टी20 खेलते हैं तो क्या आप उन्हें अपनी टीम में चाहेंगे?
कोहली: वे हमारे लिए सबसे कीमती खिलाड़ी होते. वे होनहार तेज गेंदबाज और बल्लेबाज थे.
आप दोनों काफी कम उम्र में वर्ल्ड कप जीत चुके हैं. 1983 में क्रिकेट बोर्ड के पास टीम का सम्मान करने के लिए पैसा नहीं था. लता मंगेश्कर ने एक कॉन्सर्ट किया और इससे मिली रकम खिलाडिय़ों में बांटी गई. आज की स्थिति कितनी अलग है?
कपिल: तब पैसा इतना महत्व नहीं रखता था. आज भी ऐसा ही है. ऐसा लगता है कि खिलाड़ी बहुत पैसा कमाते हैं, लेकिन इसका कितना फीसदी उन्हें मिलता है? मुझे आज भी यही लगता है कि क्रिकेटर जो पैसा कमाते हैं, वह काफी नहीं है.
विराट, वर्ल्ड कप के दौरान आप मैदान में रो पड़े थे.
कोहली: यह मेरा पहला वर्ल्ड कप था. मुझे वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा होने पर गर्व था. निश्चित रूप से सर की भावनाओं से मैं अपनी तुलना नहीं कर सकता क्योंकि वे 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कप्तान थे. तब भारत में क्रिकेट की शुरुआत हुई थी, एक धर्म की. यह एक क्रांति थी. जब हमने 2011 में इसे जीता तो यह एक सपना था.
कपिल: मैं कह सकता हूं कि हमने सपना देखा ही नहीं था. हम ऐसा सपना देख ही नहीं सकते थे.
उन पर दबाव था, आप पर नहीं था?
कपिल: नहीं, हमने इसका सपना ही नहीं देखा था. हमारा सपना सिर्फ क्वालिफाई करने का ही था. कभी-कभी चीजें गोद में आ टपकती हैं. आज के क्रिकेटर सपना देख सकते हैं. अनुभव के हिसाब से देखें तो आज वे हमसे बेहतर हैं.
आप दोनों के लिए पाकिस्तान के खिलाफ खेलने के क्या मायने हैं?
कपिल: तब हमारे ऊपर बहुत दबाव रहता था. तब पाकिस्तान हमसे बेहतर था. वे मारक ढंग से खेलते थे, जिसका हममें अभाव था. पाकिस्तान के महान क्रिकेटर उसी समय के हैं. उनके पास सब कुछ था. उनके पास इमरान खान थे. वही भारत और पाकिस्तान में अंतर ला देते थे.
भारत अब लगातार पाकिस्तान से बेहतर खेलता है, क्या इसलिए कि सोच में बदलाव आया है या पाकिस्तान में अच्छे खिलाड़ी नहीं रह गए हैं?
कोहली: प्रतिद्वंद्विता तो हमेशा रही है. हम भारत और पाकिस्तान के पुराने मैच देखकर प्रेरित होते थे. आक्रामक रवैए की जरूरत है और यह सामूहिक रूप से होना चाहिए.
कपिल, जब आप कप्तान बने थे तो काफी युवा थे. सीनियर खिलाडिय़ों के नेतृत्व के लिए आपने खुद में कुछ बदलाव किए थे?
कपिल: मैं समझ चुका था कि जब आप कप्तान होते हैं तभी तक आप आदेश दे सकते हैं. मैदान से बाहर मैं अपने सीनियर्स के सम्मान में कुर्सी छोड़ देता था. लेकिन जैसे ही मैं फिर जिम्मेदारी लेता था, मेरा लहजा बदल जाता था.
विराट, क्या आप भी कप्तान बनने के बाद ऐसे ही साफगोई वाले रहेंगे?
कोहली: मैंने धोनी में ऐसी सोच देखी है. मैंने उनसे एक बार पूछा था कि सचिन और वीरू (वीरेंदर सहवाग) जैसे खिलाडिय़ों का पसंदीदा कप्तान बनने के लिए क्या करना होगा, तब उन्होंने यही बात कही थीरू मैदान के बाहर उनकी इज्जत करो, अपनी योजनाओं पर अमल करो. मैं फिलहाल कप्तानी के बारे में सोच भी नहीं सकता.
कपिल, आप जिस सचिन तेंडुलकर को जानते हैं, वे विराट कोहली के सचिन से अलग हैं. आप जब भारत के लिए खेल रहे थे तब वे बच्चे थे और आज वे भारतीय क्रिकेट के एक बड़ा नाम बन चुके हैं.
कपिल: तब वे हर समय खाते रहते थे. मुझे इंग्लैंड का दौरा याद है, उन्हें स्कूल के एग्जाम देने थे. वे अपने साथ किताबें लेकर भी आए थे. मैं नहीं जानता कि उन्हें पढऩे के लिए कितना समय मिलता था. जब मैं रात में लौटा तो देखा कि वे सीने पर किताबें रखकर सो रहे हैं. मुझे दया आई कि उन्हें विदेश में क्रिकेट खेलने की जगह अपने मां-बाप के पास होना चाहिए था.
कोहली: जब मैंने सचिन को देखा तो वे ड्रेसिंग रूम में कोने में बैठे हुए थे. मैं 15 मिनट तक उन्हें देखता रहा. जब उन्होंने मेरी ओर देखा तो मेरी नजरें झुक गईं, मैं समझ नहीं पाया कि क्या बोलूं. उन्होंने मेरी पहली सीरीज के लिए मुझे बधाई दी और मैंने राहत की सांस ली. उन्होंने मुझे खेल में आगे बढऩे की प्रेरणा दी थी.
विराट, क्या सचिन तेंडुलकर के बाद क्रिकेट की कल्पना करना मुश्किल है?
कोहली: आप इस बारे में सोच भी नहीं सकते. हमने ऐसा समय देखा है, जब लोग उनकी पूजा करते थे. जब वे संन्यास लेंगे तो वह दुखद दिन होगा.
कपिल, आप दिलों की धड़कन भी रहे हैं. अब विराट हैं.
कपिल: इन दिनों लड़कियां क्रिकेट को खूब पसंद करती हैं और इन लड़कों की बहुत प्रशंसक हैं. हमारे समय में, रवि शास्त्री और दिलीप वेंगसरकर दिलों की धड़कन हुआ करते थे. मैं औरतों को पसंद आने वाला मर्द नहीं था. ये लड़के दिखने में अच्छे हैं और अच्छा खेल भी रहे हैं तो ऐसा क्यों न हो?

