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निवेश: सबसे सुरक्षित है दांव

गुजरात में 2012 की सूती कपड़ा नीति से 2017 तक 20,000 करोड़ रु. का निवेश होने की संभावना है. एनईईपीसीओ के तुइरियाल हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट जैसे कई पावर प्रोजेक्टों में बड़े स्तर के निवेश हो रहे हैं.

अपडेटेड 10 नवंबर , 2012

गुजरात
सबसे ज्यादा सुधार वाला बड़ा राज्य
मजबूत बंदरगाह, हर मौसम में टिकने वाली सड़कें, अबाध बिजली आपूर्ति और कुशल श्रमिकों की आसान उपलब्धता के साथ ही राज्य की ‘‘वाइब्रैंट गुजरात्य नाम से जबरदस्त मार्केटिंग ने गुजरात को निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक ठिकाने में तब्दील कर दिया है. पूरे राज्य में 1.05 लाख किमी लंबी सड़कों का जाल बिछा है, 241 रेलवे स्टेशन हैं, 11 एयरपोर्ट और 46 बंदरगाह हैं.

पिछले 10 साल में राज्य के विभिन्न सेक्टर जैसे बंदरगाह, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, सड़क, बायोटेक्नोलॉजी, कपड़ा और एग्रो प्रोसेसिंग में 17 लाख करोड़ रु. की लागत के 6,880 प्रोजेक्ट या तो मंजूर किए जा चुके हैं या लागू होने की तैयारी में हैं.SOS Investment

अब राज्य जनवरी, 2013 में होने जा रहे छठे द्विवार्षिक ‘‘वाइब्रैंट गुजरात समिट’’ की तैयारी कर रहा है. इस सम्मेलन में अंदाजन 50,000 बिजनेस डेलिगेट्स के हिस्सा लेने की संभावना है. इसमें दुनिया के दूसरे देशों से आए 1,800 प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

साल 2009 में राज्य सरकार ने 13 विशेष निवेश क्षेत्रों (एसआइआर) की स्थापना का निर्णय लिया था, इनमें से प्रत्येक क्षेत्र किसी-न-किसी कोर सेक्टर पर केंद्रित है. लिहाजा इन एसआइआर के माध्यम से राज्य में और बड़े पैमाने पर निवेश आने की उम्मीद है. इनमें से एक एसआइआर में, जो दक्षिण गुजरात के दाहेज में 100 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है, 1.20 लाख करोड़ रु. मूल्य का निवेश हो रहा है.

एक और बात जो निवेशकों को गुजरात की तरफ खास तौर से आकर्षित कर रही है, वह है विविध औद्योगिक क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित कर्मी तैयार करने के लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित करने की उसकी नीति. वर्ष 2011 में ऐसे 97 केंद्रों में 60,000 से ज्यादा कर्मी प्रशिक्षित किए गए हैं. ये केंद्र पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल की तर्ज पर खोले गए हैं. सरकार का लक्ष्य ऐसे 300 केंद्र खोलने और इनमें हर साल दो लाख कर्मियों को प्रशिक्षित करने का है.

निवेश को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार ने मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तो किया ही है, वह उद्योगों को प्रोत्साहित करने और लुभाने के लिए तरह-तरह के प्रयास भी करती रहती है. मसलन, सितंबर, 2012 में राज्य सरकार ने जिस कॉटन टेक्सटाइल पॉलिसी की घोषणा की थी, उसमें कहा गया है कि निवेश पूंजी पर लगने वाला ब्याज राज्य सरकार खुद अदा करेगी, मुफ्त बिजली देगी और वर्ष 2017 तक वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) से छूट देगी. इस नीति की घोषणा के बाद कई प्रमुख कपड़ा उत्पादक कंपनियों ने गुजरात में कारखाना लगाने में दिलचस्पी दिखाई है जिससे अगले पांच साल में यहां 20,000 करोड़ रु. का निवेश आ सकता है.

राज्य के उद्योग एवं खान विभाग के प्रधान सचिव महेश्वर साहू कहते हैं, ‘‘हमारा लक्ष्य दीर्घकालिक सोच पर आधारित टिकाऊ विकास करना है. प्रस्तावों के क्रियान्वयन के मामले में फॉलोअप करने की हमारी व्यवस्था बहुत मजबूत है. आगामी वाइब्रैंट गुजरात समिट में हमारा खास ध्यान जानकारी के आदान-प्रदान, इनोवेशन, उद्योगों के लिए कौशल विकास और टिकाऊपन पर होगा.’’

गुजरात में फॉलोअप की व्यवस्था कितनी मजबूत है, यह इस बात से ही पता चल जाता है कि पांच वाइब्रैंट गुजरात समिट के दौरान जितने भी समझौते हुए उनमें से करीब 60 फीसदी परियोजनाओं को जमीनी हकीकत में बदला जा चुका है.

मिजोरम
सबसे ज्यादा सुधार वाला छोटा राज्य
इस साल मिजोरम के मुख्यमंत्री लल थनहावला ने 3 मार्च को राज्य बांस दिवस (बंबू डे) के रूप में घोषित किया था, उन्होंने बांस उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ बांस गांव, बांस उद्यमी और बांस के शिल्पकार जैसे कई पुरस्कारों की घोषणा भी की. यह महज एक प्रतीकात्मक कवायद नहीं थी, क्योंकि मिजोरम सरकार बांस को अपने निवेश के एकमात्र सबसे बड़े स्रोत के रूप में बढ़ावा देना चाहती है.

पिछले चार साल में यहां बांस उत्पादों की तीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई गई हैं जिनमें कुल 6.3 करोड़ रु. का निवेश हुआ है. ऐसी दो फर्मों-मिजोरम वीनस बंबू और जोनम मैटप्लाई में राज्य सरकार की 50 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि तीसरी कंपनी न्यूटेक बंबू प्रोडक्ट्स को 10 लाख रु. का सॉफ्ट लोन दिया गया है.

निजी निवेशक भी मिजोरम के इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं. बंगलुरु के उद्यमी राजेश प्रसाद ने, जो दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और आइआइएम-अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं, साल 2006 में ऐजवाल के बाहरी इलाके चानमारी में फूलों का एक फार्म जोपार शुरू किया था.

लगभग पांच हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस फार्म से पीक सीजन में हर महीने करीब 3,00,000 फूलों की बिक्री होती है. ऑफ  सीजन में भी यहां से करीब 30,000 फूलों की बिक्री हो जाती है. इस साल नवंबर माह से जोपार 15 बीघा जमीन पर स्ट्राबेरी के 75,000 पौधे उगाएगा.

जोपार के टेक्निकल सुपरवाइजर चंदन नारजरी बताते हैं, ‘‘राज्य सरकार ने हमें हर संभव सहयोग दिया है. इसके बदले हम राज्य के फ्लोरीकल्चर विभाग के चमपाई स्थित फूलों के फार्म का संचालन करते हैं.’’ जोपार ने अपने फार्म में 110 मिजो लड़कों-लड़कियों को रोजगार दिया है, जिन्हें हर दिन 170 रु. की मजदूरी दी जाती है.

पिछले तीन साल में मिजोरम के अन्य क्षेत्रों में भी निवेश आया है. मिजोरम इस्पात इंडस्ट्रीज 60 करोड़ रु. के निवेश से ऐजवाल में नया स्टील प्रोजेक्ट लगाने की योजना बना रही है. मैराथन बैटरीज ने 30 करोड़ रु. की लागत से एक कारखाना शुरू किया है और आइटी आधारित रिसर्च सेंटर इटर्निटी पार्टनर्स की स्थापना के लिए 4 करोड़ रु. का निवेश किया गया है.

राज्य में बड़े निवेश बिजली क्षेत्र में हो रहे हैं. राज्य में 930 करोड़ रु. का तुइरियाल हाइडेल प्रोजेक्ट नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (एनईईपीसीओ) का सौंपा गया है, जबकि 210 मेगावॉट के तुइवइ हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के लिए सात कंपनियों ने बोली लगाई है.

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