केरल
सर्वाधिक सुधार वाला बड़ा राज्य
दक्षिण भारतीय राज्य केरल के मुख्यमंत्री ऊमन चेंडी 15 मिनट से ज्यादा खड़े नहीं हो सकते. उनके डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी टांगों में रहने वाला दर्द मई से जून के बीच राज्य के 14 जिलों में तूफानी रफ्तार से चले व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम की देन है. इस दौरान वे पूरे-पूरे दिन जनता से मिलने के लिए यहां-वहां जाते थे. प्रत्येक कार्यक्रम में हजारों की संख्या में दुखी और परेशान लोगों ने शिरकत की. चेंडी ने उन सभी लोगों की परेशानियों को सुना और मौके पर ही समाधान भी सुझाए. प्रत्येक जिले में सुबह आठ बजे कार्यक्रम शुरू होता था और अगले दिन तड़के तक चलता था.
जनसंपर्क कार्यक्रम खत्म होने तक 69 वर्षीय मुख्यमंत्री ने 5,45,298 मामलों की सुनवाई की और 2,97,212 मामलों में तत्काल समाधान सुझाया. उन्होंने औसतन 1,017 रु. प्रति व्यक्ति के हिसाब से 30.19 करोड़ रु. भी इस दौरान दिए.
बकौल मुख्यमंत्री, ‘‘आलोचकों ने इसे प्रतीकवाद कहा और मुझसे पूछते हैं कि मैं ग्राम अधिकारी का काम क्यों करता हूं. क्या हम लोगों से यह कह सकते हैं कि अपनी छोटी-मोटी समस्याओं के समाधान के लिए वे व्यवस्था में सुधार होने तक इंतजार करते रहें?’’
पिछले एक साल में केरल में कानून व्यवस्था की स्थिति में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है. 2012 के शुरुआती छह महीनों में केरल में 80,229 संज्ञेय अपराध के मामले दर्ज किए गए जो 2011 के 1,72,137 के आंकड़े का आधा है. जून महीने तक बलात्कार के 493 मामले दर्ज किए गए जबकि 2011 में दुष्कर्म की 1,132 वारदात सामने आई थीं. इस साल हत्या के मामले भी बीते साल के मुकाबले आधे रह गए हैं. 2011 में हत्या की 521 वारदात हुईं और 2012 में 183 ऐसे मामले सामने आए.
केरल में पुलिस और जनता का अनुपात 1.725 का है जो 2009 में 1.800 का हुआ करता था. पिछले पांच साल में 16,000 नई भर्तियों के साथ केरल पुलिस बल की कुल संख्या 50,000 से अधिक हो गई है.
अक्तूबर में राज्य पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए जैकब पुनुस कहते हैं, ‘‘केरल ऐसा एकमात्र राज्य है जहां पुलिस बल में कोई पद खाली नहीं है.’
गोवासर्वाधिक सुधार वाला छोटा राज्य
अगर पिछले एक साल पर नजर दौड़ाएं तो गोवा ने कानून व्यवस्था को बनाए रखने में सराहनीय तरक्की की है. राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के मुताबिक, राज्य में लंबी छलांग लगाते हुए 2011-12 में 64 फीसदी अपराध के मामलों को सुलझा लिया गया जबकि पिछले साल यह आंकड़ा महज 39 फीसदी का हुआ करता था.
राज्य में एक लाख जनसंख्या पर 287 पुलिसकर्मी हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 216 पुलिसकर्मी प्रति एक लाख लोगों पर हैं. राज्य सरकार जल्दी ही पुलिस थानों की संख्या 24 से बढ़ाकर 32 करने जा रही है.
प्रदेश के गृह मंत्रालय का भी कामकाज देखने वाले मुख्यमंत्री पर्रिकर का दावा है कि फरवरी से मई माह के बीच बलात्कार के 22 मामले सामने आए जिनमें से 20 में गिरफ्तारियां हुई हैं. साल की पहली छमाही में गोवा में पर्यटन के लिए आए मुसाफिरों के साथ चोरी, लूटपाट और दुर्घटनाओं के 66 मामले पेश आए. 2011 की बात करें तो ऐसे मामलों की तादाद 129 थी. अब राज्य सरकार पुलिस बल में भी पारदर्शिता लाने की दिशा में काम कर रही है.
नवंबर, 2011 में महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी करने पर दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था. पुलिकर्मियों ने कथित तौर पर इस महिला पत्रकार को सेक्स वर्कर कहा था क्योंकि वह रात 10 बजे मीरामार बीच के आसपास घूम रही थी. उसी साल पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स गिरोह का भंडाफोड़ किया और इससे कथित सांठ-गांठ के आरोप में दो आला अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया. 2011 में ही मुस्लिम कब्रिस्तान को लेकर मरगाव में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था लेकिन पुलिस के समय रहते कार्रवाई करने से हालात पर काबू पा लिया गया. गोवा के डीजीपी किशन कुमार ने कहा, ‘‘पिछले एक साल में गोवा में दंगे की कोई घटना नहीं हुई है.’’
इस साल मार्च में पार्रिकर के मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने के बाद से सुस्त रहने वाला प्रशासन भी हरकत में आ गया है. सेंगुइलिम के रहने वाले प्रभाकर नाइक कहते हैं, ‘‘पहले मेरे इलाके में पानी की आपूर्ति की समस्या से निपटने में एक जूनियर इंजीनियर कम से कम 12 घंटे का समय लेता था. अब वह एक फोन कॉल पर कुछ ही मिनट के अंदर मौके पर हाजिर हो जाता है.’’
पर्रिकर की जनोन्मुखी सरकार ने गोवा के मध्यम वर्ग के दिल में अपनी जगह कायम कर ली है. वे हर गुरुवार को सचिवालय में जनता से मिलकर पूरे गौर के साथ उनकी शिकायतें सुनते हैं और मौके पर ही अपना फैसला भी सुना देते हैं.

