scorecardresearch

कट-ऑफ का बखेड़ा

प्राइवेट कॉलेजों के मेडिकल पीजी कोर्स में हर साल बढ़ रही खाली सीटों के लिए सरकार ने कट-ऑफ किया शून्य

मेडिकल पीजी कोर्स में शून्य कट-ऑफ पर शुरू हुआ डिबेट
अपडेटेड 5 फ़रवरी , 2026

बगैर कोई नंबर लाए भी क्या मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल सकता है? निगेटिव मार्किंग वाली परीक्षा में शून्य से कम नंबर पाकर भी क्या डॉक्टरी के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला मिल सकता है? इस साल 800 अंकों वाली नीट-पीजी परीक्षा में खास वर्ग का स्कोर अगर -40 हो तो भी पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला संभव है.

केंद्र सरकार ने यह निर्णय कई निजी कॉलेजों में खाली पड़ी पोस्ट ग्रेजुएट सीटों की संख्या के मद्देनजर किया है. नीट-पीजी 2025 के नतीजों के पांच महीने बाद भी देशभर में एमडी/एमएस कोर्स की तकरीबन 18,000 पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली पड़ी हैं.

इन कोर्सेज में दाखिले का नियमन स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) करता है. इस बोर्ड ने तीसरे दौर की काउंसिलिंग के लिए नीट-पीजी क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को बदला है. अब यह सामान्य कैटेगरी के लिए 50वें पर्सेंटाइल से घटाकर 7वें पर्सेंटाइल, दिव्यांगों के लिए 5वें और एससी/एसटी/ओबीसी के लिए 0 पर्सेंटाइल और नेगेटिव मार्किंग की वजह से -40 अंक तक कर दिया गया है.

लेकिन पर्सेंटाइल घटाने के इस निर्णय का तीखा विरोध मेडिकल एसोसिएशनों और परीक्षा की तैयारी करने वालों की तरफ से हो रहा है. इस संबंध में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है. विरोध करने वालों का तर्क है कि इससे मेरिट, प्रोफेशनल मानकों और मरीजों पर असर पड़ता है. 

नीट-पीजी की परीक्षा मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए राष्ट्रीय स्तर की योग्यता का टेस्ट है. इसमें एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लेने वाले डॉक्टर बैठते हैं. इस परीक्षा के आधार पर इन एमबीबीएस डॉक्टरों को रैंक दी जाती है और उसके आधार पर उनका दाखिला स्पेशलिस्ट सीटों पर हो पाता है.

सरकार के मुताबिक, यह कदम इसलिए भी उठाया गया है, ताकि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को प्रशिक्षित करने की क्षमताओं का सही उपयोग हो सके. इस बारे में एनबीईएमएस बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, ''यह पहली बार नहीं, 2023 में भी ऐसा किया गया था.

सीटें खाली रहती हैं तो उन्हें भरने के लिए पर्सेंटाइल कम करना सामान्य-सी बात है.'' 2023 में भी सभी कैटेगरी के लिए पर्सेंटाइल शून्य कर दिया गया था. मेरिट पर पड़ने वाले असर के अंदेशों के बारे में इस अधिकारी का कहना है, ''प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हमारे महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर हैं. उनकी सीटें खाली रह जाती हैं तो डॉक्टरों की पूरी ट्रेनिंग प्रक्रिया प्रभावित होगी. यह कहना एकपक्षीय है कि मेरिट पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.''

दूसरी ओर, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के चीफ पैट्रन डॉ. रोहन कृष्णन कहते हैं, ''क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कम करने का रिवाज प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सीटें भरने के लिए है. इससे मेरिट प्रभावित होती है. कम स्कोर के बावजूद पैसे वाले दाखिला पा जाते हैं.'' इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी कहा है कि इससे ''मेडिकल प्रोफेशन की गरिमा'' प्रभावित होगी.

बीते पांच साल में मेडिकल पीजी सीटें डेढ़ गुना बढ़ गई हैं. 2020 में सीटें 40,858 थीं जो 2025 में 62,584 हैं. लेकिन पिछले कुछ साल से लगातार पीजी सीटें खाली रह रही हैं और 2025 में यह संख्या सबसे ज्यादा हो गई. इस साल देशभर में (ऑल इंडिया और स्टेट कोटा मिलाकर) सबसे ज्यादा वैकेंसी कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में है.

इन तीनों राज्यों में देश की कुल पीजी सीटों का एक-तिहाई है. महाराष्ट्र में पहले दौर के बाद खाली सीटों की संख्या 2025 में 2,801, कर्नाटक में 2,161 और तमिलनाडु में 1,932 है. सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में पीजी सीटों की संख्या बढ़ाकर 75,000 के पार ले जाना है. खाली रहती सीटें और इस वजह से लगातार कम किए जा रहे कटऑफ से इस पर पुनर्विचार की बात भी उठ रही है.

Advertisement
Advertisement