- गजेंद्र सिंह भाटी
द पिट अमेरिका के एक अस्पताल के इमरजेंसी रूम की कमाल कहानी है जिसमें टूटे, बिखरे, कटे, जले, दिल के दौरे झेलते, जानलेवा व्याधियों से त्रस्त मरीज लेटे और कतारों में बैठे हैं, लेकिन खून, मवाद, मांस के दृश्यों के उपरांत अचरज भरे ढंग से यह नायाब सीरीज आपको किसी मन रंजने वाले एहसास, बेहतर मनुष्य बनने की थैरेपी और किसी सुकूनदेह पेड़ की छाया तले सुनाई जा रही कथा से गुजार ले जाती है.
अगर ब्रिटिश सीरीज लाइन ऑफ ड्यूटी बेस्ट पुलिस प्रोसीजरल ड्रामा है तो द पिट बेस्ट मेडिकल प्रोसीजरल ड्रामा. अत्यंत यथार्थपरक. लिखावट में परिष्कृत. सुंदर. मजेदार. इसके मुख्य पात्र डॉ. रॉबिनोविच 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' के डॉ. अस्थाना के यंत्रवत प्रोफेशनल पात्र के ठीक उलट हैं. वे सुसभ्य हैं. नैतिक हैं. रोगियों से प्यार से बात करते हैं. उन्हें और उनके रिश्तेदारों को पूरी बीमारी बताते हैं. उपचार का छोटे-से छोटा चरण समझाते चलते हैं. ट्रॉमा कक्ष में भीषण बदहवासी में काम कर रहे हैं लेकिन कभी उन्हें भागते, चीखते, चिल्लाते, आपा खोते आप नहीं देखते.
यह एक दुर्लभ सीरीज है. गहन. रॉ. स्लो-बर्न. तेज-रफ्तार. फ्रैश. सटीक. त्रुटिहीन. फील गुड. सेहतमंद. स्लो हॉर्सेज़, सेवरेंस, द डिप्लोमैट, प्लूरिबस, अडॉलसेंस और द वाइट लोटस जैसी अभी की तमाम आलातरीन सीरीज को पीछे छोड़ते हुए गए इतवार, 11 जनवरी को 83वें गोल्डन ग्लोब्स में इसने बेस्ट टेलीविजन ड्रामा सीरीज का तमगा जीता. इसी ड्रामा श्रेणी में नोवा वाइल को बेस्ट मेल ऐक्टर चुना गया. वे इस सीरीज के लीड ऐक्टर, सह-लेखक, डायरेक्टर और कार्यकारी निर्माता भी हैं.
1994 में अमेरिकी टीवी पर भूचाल लाने वाला एक शो ईआर उतरा था. इस मेडिकल ड्रामा ने टीवी ड्रामाज को सदा के लिए बदल दिया. इसके गतिमान नैरेटिव, क्विक कट्स, लंबे टेक्स, यथार्थपूर्ण सेटअप, यकीनी और इंगेजिंग कहानी ने नया बेंचमार्क स्थित किया. 15 सीजन चली इस सीरीज ने जॉर्ज क्लूनी को सुपरस्टार बनाया. शिया लबॉफ (ट्रांसफॉर्मर्स), एमिल हिर्श (इनटू द वाइल्ड), ऑक्टेविया स्पेंसर (द हेल्प) और एरॉन पॉल (ब्रेकिंग बैड) जैसे दर्जन अच्छे एक्टर्स को उतारा. इन्हीं में एक थे नोवा वाइल. वे क्लीन शेवन, हैंडसम, क्यूट, युवा डॉक्टर कार्टर के रोल में दिखे.
नोवा हाल में ईआर को ही रिवाइव करने चले थे लेकिन कानूनी पचड़ों के चलते उन्हें कथा में कुछ बदलाव करने पड़े और नाम बदलकर द पिट करना पड़ा. जब यह सीरीज आई और सीनियर अटेंडिंग फिजिशियन डॉ. रॉबी के सिर के बाल उड़े, बेतरतीब दाढ़ी वाले, स्पोर्ट्स शूज, आरामदायक स्वेटशर्ट धारी, सज्जन किरदार में उन्हें देखा गया तो दर्शक मीठे नॉस्टेलजिया से भर गए और एक नए शाहकार का निर्माण होते देख दंग हुए.
द पिट क्रिटिक्स की इंस्टेंट फेवरेट सीरीज बन चुकी है. यह प्रामाणिक है. संवेदना और आत्मानुभूति से भरी है. यह कोविड-19 के दौर से चलते हुए आज अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम की चुनौतियों, इस पेशे की नैतिक दुविधाओं, मेडिसिन बनाम लाभ के विमर्श आदि पर बात करती है. हम मरीजों को भी टूटते देखते हैं और डॉक्टरों को भी. यहां डॉक्टर नायक भी हैं और सिस्टम के भीतर फंसे थके हुए इंसान भी.
इसे देखते हुए लगता है कि आप किसी आपातकालीन कक्ष में ही बैठे हैं, जहां एक के बाद एक मरीज स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, एंबुलेंस और पुलिस कार में अपनी कहानी के साथ बैठकर-लेटकर आ रहे हैं. उनकी कहानी, उनके परिजनों और डॉक्टरों की कहानियों से मिलकर तिलिस्म रचती हैं. हर बार नई, असाध्य बीमारी और हर बार किसी इन्वेंटिव तरीके से उपचार दिखता है. बीच में खूब सारा ड्रामा और एक मस्ट वॉच अनुभव आपका इंतजार कर रहा होता है.
(गोल्डन ग्लोब्स, 2026 में बेस्ट टेलीविजन सीरीज (ड्रामा) अवार्ड जीतने वाली द पिट को जियोहॉटस्टार पर देख सकते हैं.)

