scorecardresearch

नीली जर्सी वाली लड़कियों का राज

विश्व चैंपियन बनी टीम की हर महिला क्रिकेटर ने मैदान के भीतर और बाहर कई लड़ाइयां जीती हैं. दूरदराज के इलाकों से आने वाली इन लड़कियों का सफर पूरे देश को अचंभित करने वाला है

2 नवंबर 2025 को वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ भारतीय महिला क्रिकेट टीम
अपडेटेड 23 जनवरी , 2026

एक लंबे अरसे तक भारतीय महिला क्रिकेट टीम पुरुषों की राष्ट्रीय टीम की छाया से बाहर नहीं आ पाई थी. 2017 में वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंचने और 2023 में महिला प्रीमियर लीग की शुरुआत के बाद ही वह पहचान, प्रशंसा और मोटी कमाई की ओर कदम बढ़ा पाई.

2 नवंबर, 2025 को जब हरमनप्रीत कौर की अगुआई में टीम ने वनडे में विश्व चैंपियन का खिताब जीता और अपनी पहली आइसीसी ट्रॉफी उठाई तो उसका नाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया.

टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज में लगातार तीन हार के बाद टीम को लगभग नकार दिया गया था. पर नीली जर्सी वाली लड़कियों ने न्यूजीलैंड को हराकर और सेमीफाइनल में सात बार की विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को पटखनी देने के बाद फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को धूल चटा दी.

यह ऐसी शानदार सफलता थी जिसमें हर खिलाड़ी ने अलग-अलग तरह का स्वाद चखाया—तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने बस पांच माह पहले ही राष्ट्रीय टीम में जगह पाई थी, जिनकी स्विंग ने सलामी बल्लेबाजों को परेशान कर दिया; ऋचा घोष की विकेटकीपिंग बेहद भरोसेमंद रही और रन बनाने में उनकी आक्रामकता देखते ही बनती थी; उप-कप्तान स्मृति मंधाना ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक जैसी महत्वपूर्ण पारियां खेलीं.

जेमिमा रोड्रिग्स ने एक मैच के लिए बाहर किए जाने के झटके से उबरकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी खेली; टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी दीप्ति शर्मा ने पूरे टूर्नामेंट में निरंतरता की मिसाल कायम की (215 रन और 22 विकेट); आखिरी वक्त पर मौका पाने वाली शेफाली वर्मा ने तो ऐसा लगता है कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन—बल्ले (87 रन) और गेंद (दो विकेट) दोनों से—बस फाइनल के लिए बचाकर रखा था और फिर थीं प्रेरणादायक हरमनप्रीत कौर, जिन्होंने पिछली नाकामियों को पीछे छोड़कर जीत की नई कहानी लिखी.

नवी मुंबई के डी.वाइ. पाटील स्टेडियम में 'आक्रामक प्रदर्शन' ने पूरे देश को ऐसी युवा खिलाड़ियों से परिचित कराया, जिनकी कहानियां विकास की राह पर बढ़ते भारत की मिसाल हैं. परिवार ने लैंगिक भेदभाव और समाज के तानों को दरकिनार कर इन खिलाड़ियों को अपने सपने पूरा करने का मौका दिया.

यह ऐतिहासिक क्षण कई तरह के बलिदान की नींव पर टिका था: दीप्ति शर्मा के भाई ने अपना करिअर छोड़कर उनके साथ अभ्यास किया; क्रांति गौड़ की मां ने अपने गहने बेच दिए ताकि वे टूर्नामेंट के लिए यात्रा कर सकें और राधा यादव की बहन सोनी ने खेल छोड़ दिया क्योंकि परिवार केवल एक ही लड़की का खर्च उठा सकता था. इस टीम की अधिकांश खिलाड़ी गांवों और छोटे कस्बों से थीं.

भारत में महिला क्रिकेट को यह मुकाम हासिल करने में करीब पांच दशक लग गए. कौर की टीम जानती है कि उनसे पहले वाली महिला क्रिकेटरों ने कितनी मुश्किलों का सामना किया. युवा टीम विपरीत परिस्थितियों में मानसिक संघर्षों के बारे में खुलकर बात करने से नहीं कतराती, सोशल मीडिया पर अपनी मजबूत दोस्ती को दर्शाती है और एक जैसे टैटू तक बनवाती है. नई पीढ़ी की यह टीम महिला क्रिकेट की प्रतिष्ठा बढ़ाने के हरसंभव प्रयास कर रही है. उम्मीद है कि वह और भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी.

उपलब्धियों के बूते बनाया ऊंचा मकाम

> 2025 में चैंपियन बनकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने आइसीसी से 40 करोड़ रुपए और बीसीसीआइ से 51 करोड़ रुपए का इनाम पाया.

> 2005 में टीम के पहले विश्व कप फाइनल में हरेक खिलाड़ी को 8,000 रुपए मिले थे.

> हरमनप्रीत और उनकी टीम का अगला लक्ष्य है जून-जुलाई में इंग्लैंड ऐंड वेल्स में होने वाला टी20 विश्व कप.

खिलाड़ियों के परिवार ने लैंगिक भेदभाव और समाज के तानों को दरकिनार कर उन्हें अपने सपने पूरा करने का मौका दिया. यह कामयाबी पहले की पीढ़ी के संघर्षों का भी नतीजा है.

Advertisement
Advertisement