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पेट में सोना रखकर ला रहे तस्करों को बदमाशों ने किया अगवा, फिर पुलिस ने कैसे दोनों को पकड़ा?

पेट में सोने के कैप्सूल छिपाकर ला रहे तस्करों का बदमाशों ने किया अपहरण. वे उनके पेट चीरने ही वाले थे कि पुलिस आ पहुंची. इस तरह हुआ सोने की तस्करी की नई चाल का पर्दाफाश

सोना तस्कर शाने आलम, मुत्तलिब, जुल्फिकार अली और अजहरुद्दीन पुलिस की गिरफ्त में
सोना तस्कर शाने आलम, मुत्तलिब, जुल्फिकार अली और अजहरुद्दीन पुलिस की गिरफ्त में
अपडेटेड 30 जून , 2025

बड़े ही नाटकीय ढंग से मुरादाबाद पुलिस ने छह अपहृत व्यक्तियों को बचाने के बाद सोने की तस्करी का पर्दाफाश किया. इनमें से चार के पेट में सोना छिपा हुआ पाया गया. यह मामला 23 मई की शाम को उस वक्त सामने आया जब दो वाहनों में सवार छह हथियारबंद अपराधियों ने मुरादाबाद में दिल्ली-लखनऊ राजमार्ग पर मूढ़ापांडे पुराने टोल प्लाजा के पास नई दिल्ली एयरपोर्ट से आ रही एक कार को रोका.

अपहर्ताओं में से एक ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और कार के अंदर इंस्पेक्टर की टोपी भी रखी हुई थी. उन्होंने सुरक्षा जांच के बहाने वाहन को रोका और फिर बंदूक की नोक पर उसमें बैठे ड्राइवर समेत सभी सात जन को बंधक बना लिया और उन्हें कुछ दूरी पर मौजूद एक जंगल में ले गए.

अपहर्ताओं को कथित तौर पर पहले से सूचना थी कि कार में बैठे लोग पेट में सोना छुपाकर ला रहे हैं. वे सोने को निकालने के लिए तस्करों के पेट चीरने की तैयारी करने लगे. इस बीच चंगुल से निकल भागे कार ड्राइवर ने पुलिस को इत्तिला कर दी थी सो जल्द ही पूरा अमला मौके पर आ पहुंचा.

बताते हैं, सकते में आ गए अपहर्ताओं ने गोलियां चला दीं, जिस पर पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की. पुलिस के मुताबिक, अपहर्ताओं में से दो—रामपुर दोराहा (कटघर) के तौफीक उर्फ ​​तुफैल और उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के इस्लाम नगर के राजा उर्फ ​​रजा चौधरी—को पैर में गोली लगी और उन्हें पकड़ लिया गया. चार अन्य संदिग्ध भागने में सफल रहे, जबकि सभी सात बंधकों को सुरक्षित बचा लिया गया.

सोने की तस्करी के संदेह की पुष्टि के लिए पुलिस सऊदी अरब से लौटने वाले सभी छह लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए मूढ़ापांडे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंची. एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक डॉक्टर ने किसी भी तरह के बाहरी पदार्थ के मिलने से इनकार किया और इन लोगों को जिला अस्पताल रेफर करने में आनाकानी की, जिससे संदेह और बढ़ गया. इसके बाद पुलिस ने एक निजी डायग्नॉस्टिक लैब में इनकी जांच कराई.

इनके पेट से निकले सोने के कैप्सूल

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि इनमें से चार लोगों—अजहरुद्दीन, जुल्फिकार अली, मुत्तलिब और शाह आलम के पेट में सोना छिपा हुआ था, जबकि दो अन्य मोहम्मद नावेद और जाहिद अली के पेट में सोना नहीं था. इसके बाद जिला अस्पताल में जांच की गई. वहां भी चारों के पेट में सोना होने की पुष्टि हुई.

मुरादाबाद के एसपी (शहर) कुमार रणविजय सिंह बताते हैं, ''सभी छह लोग रामपुर जिले के टांडा के रहने वाले थे और सऊदी अरब में काम करते थे. वे 23 मई को दिल्ली पहुंच अपने गृहनगर जा रहे थे, तभी उनका अपहरण कर लिया गया था."

सऊदी अरब से लौटे रामपुर के टांडा निवासी चार सोना तस्करों के पेट से डॉक्टरों ने तीन दिन में सोने के कुल 29 कैप्सूल निकाले, जिनका कुल वजन 1 किलो 100 ग्राम के करीब है. एक खास पद्धति और दवाओं का सहारा लेकर मल के रास्ते सोने के कैप्सूल निकाले गए. इसके लिए पुलिस ने तस्करों को डॉक्टरों की निगरानी में बिरयानी, केले और दूसरे फल खिलाए. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 10,000 रुपए खर्च हुए.

जांच एजेंसियों को चकमा देकर पेट में सोना छिपाकर लाने का यह कोई नया मामला नहीं है. बीते एक साल के दौरान ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिसने पुलिस के साथ जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं. तरह-तरह के उपकरण, लंबी-चौड़ी टीमें और किसी भी संदिग्ध पर कार्रवाई करने की शक्ति होने के बावजूद पुलिस और जांच एजेंसियों को सोना तस्कर चकमा देने में कामयाब हो रहे हैं.

इस मामले में भी पुलिस और जांच एजेंसियों को चकमा देकर चारों तस्करों ने दुबई से मुंबई तक का हवाई सफर किया. मुंबई से ट्रेन से दिल्ली पहुंचे. वहां तस्करों ने न तो टैक्सी की और न ही रोडवेज बस पर सवार हुए. उन्होंने सऊदी अरब से आ रहे नावेद और जाहिद अली से संपर्क किया.

वे दोनों दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे थे और उन्हें लेने टांडा निवासी जुल्फिकार अपनी कार लेकर पहुंचा था. तस्कर भी उसी कार में सवार हो गए लेकिन वे बदमाशों को चकमा नहीं दे सके. रामपुर के वरिष्ठ वकील मुराद अली कहते हैं, ''पुलिस को भले ही तस्करों की जानकारी नहीं थी लेकिन बदमाश उनकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे. दुबई से सोना लेकर आ रहे तस्करों का अगर अपहरण नहीं होता तो वे अपने मंसूबे में तो कामयाब हो ही गए थे. इससे पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह में है."

मुरादाबाद की मूंढ़ापांडे पुलिस ने दुबई से लौटे जिन चार सोना तस्करों को गिरफ्तार किया है, वे बीते दिनों कई बार दुबई के चक्कर लगा चुके हैं और हर बार जांच एजेंसियों को चकमा देकर बच निकले हैं. जांच में पता चला कि टांडा निवासी तस्कर शाने आलम बीते करीब एक साल में पांच बार दुबई गया. इसके अलावा टांडा के ही यूसुफपुर चौक निवासी मुत्तलिब के दस बार दुबई जाने का पता चला है.

यूसुफपुर का ही अजहरुद्दीन नौ बार दुबई जा चुका है. चौथा तस्कर टांडा के ही नज्जूपुरा का निवासी जुल्फिकार अली इन सबसे बढ़कर निकला. वह बीते करीब दो साल में 20 बार दुबई होकर आया है. मुरादाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल खुद ही हैरत में हैं. वे कहते हैं, ''तस्करों ने इतनी बार दुबई की यात्रा कैसे की? उनके वीजा की जांच के लिए एलआईयू को भी लगाया गया है."

कभी चावल नगरी के रूप जाने जाते रहे रामपुर के टांडा कस्बे से लगातार सोना तस्करों के पकड़े जाने से जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. टांडा के रहने वाले 17 युवा जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं, जिन्होंने एक वर्ष के भीतर आठ या इससे ज्यादा बार दुबई या शारजाह की यात्रा की है.

पुलिस अधिकारियों की मानें तो पेट में सोने के कैप्सूल एयरपोर्ट पर कस्टम की आम जांच में पकड़ में नहीं आते. ये अल्ट्रासाउंड या हाई-रिजॉल्यूशन एक्सरे में ही दिखते हैं. इसी का सहारा लेकर सोने के कैप्सूल को पेट में रखकर तस्करी के मामलों में इजाफा हुआ है.

इसकी जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ''तस्कर यह भी जानते हैं कि कब किस एयरपोर्ट पर कौन अधिकारी ड्यूटी पर है, जिससे उन्हें बचने में मदद मिलती है. यही कारण है कि हर बार नए चेहरे पकड़े जाते हैं, जबकि सरगना बच निकलते हैं."

अधिकारियों के मुताबिक, पहले सोने की तस्करी के लिए तस्कर इंटरनेशनल फ्लाइट से उतरने के बाद घरेलू फ्लाइट पकड़ते थे. उस फ्लाइट में उनके साथी पहले से यात्रा कर रहे होते थे, जिन्हें वे सोना देकर आगे बढ़ जाते थे. चूंकि घरेलू उड़ान में यात्रियों की खास चेकिंग नहीं होती थी. ऐसे में तस्कर आसानी से निकल जाते थे. बाद में उनकी चाल कस्टम विभाग की नजर में आ गई. फिर तस्करों ने सोना पेट में लाने का तरीका ढूंढ़ा. कुछेक ने वाया नेपाल का भी तरीका अपनाया है.

पेट में सोना रखकर तस्करी के मामले बढ़ने के बाद अब कस्टम विभाग भी उन अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने पर मंथन कर रहा है जिससे पेट में भी किसी तरह की संदेहास्पद वस्तु के मौजूद होने पर उसका आसानी से पता लगाया जा सके. वहीं पुलिस भी सोना तस्करों के सरगना को खोजने की कोशिश में लगी है लेकिन नतीजा अभी भी सिफर ही है.

पुलिस पर भारी पड़ रहे तस्कर

● शारजाह से लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पहुंचे रामपुर के टांडा क्षेत्र के 36 तस्करों को कस्टम विभाग ने 1 अप्रैल, 2024 की सुबह पकड़ कर उनके कब्जे से करीब 3.2 करोड़ रुपए मूल्य की विदेशी सिगरेट बरामद की थी. पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये आरोपी पेट में सोना छिपाकर भी लाए थे.

सभी को पकड़ा गया लेकिन अगले दिन 29 आरोपी तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर कस्टम की गिरफ्त से भाग निकले थे. इस सनसनीखेज फरारी के बाद पूरे कस्टम विभाग में हड़कंप मच गया था.

कस्टम विभाग के तत्कालीन सहायक आयुक्त ए.के. सिंह ने सरोजिनी नगर थाने में 36 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी. रिपोर्ट में सोना और सिगरेट तस्करी के गंभीर आरोप लगाए गए थे. तस्करों की फरारी की घटना के बाद कस्टम विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था. मामले की आंतरिक जांच चल रही है.

● तारिक, अजहर, मुकीम और फरहान 25 अप्रैल, 2024 को सोना लेकर रामपुर के टांडा आ रहे थे. इसी दौरान जब ये लोग रामपुर के मिलक क्षेत्र के मीरगंज पहुंचे, तब उनकी कार को निशाना बनाकर लुटेरों ने हमला कर दिया और उनके पास से पूरा सोना लूट लिया. बाद में पुलिस ने मुठभेड़ में पांच लोगों को गिरफ्तार किया और सोने की तस्करी और लूटपाट का खुलासा किया.

● फरवरी 2025 में मुरादाबाद के टांडा मोहल्ले के रहने वाले मोहम्मद आलम को पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई. परिजन उसे टांडा में एक निजी क्लीनिक पर लेकर पहुंचे. जांच में डॉक्टर को पेट में कुछ संदिग्ध दिखा तो ऑपरेशन की सलाह दी गई. ऑपरेशन के दौरान आलम की मौत हो गई. उसके पेट में सोना होने की पुष्टि हुई थी.

ऐसे चलता है गोरखधंधा

● तीन रास्तों के जरिए तस्करी होती है. दुबई से सीधी फ्लाइट से तस्कर दिल्ली या मुंबई के एयरपोर्ट पर उतरते हैं. यहां से किसी छोटे एयरपोर्ट के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट लेते हैं. छोटे एयरपोर्ट पर कस्टम की बहुत गहन जांच नहीं होती है.

● दुबई से सोना लाने वाले तस्कर दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरकर यहां से काठमांडो की फ्लाइट पकड़ लेते हैं. वहां कुछ दिन रुकने के बाद तस्कर सड़क के रास्ते यूपी की सीमा में बिना किसी जांच-पड़ताल के दाखिल हो जाते हैं.

● सोने पर खास तरह के केमिकल की कोटिंग की जाती है, जिससे वह सामान्य मेटल डिटेक्टर में पकड़ में नहीं आता. इसके अलावा तस्करों को एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों की तैनाती के बारे में पुख्ता जानकारी होती है.

● दुबई से सोना खरीदने और लेकर आने वालों के फ्लाइट टिकट, होटल में रहने-खाने का इंतजाम एक फाइनेंसर करता है. यह तस्करों को तय कमीशन के अलावा सफलतापूर्वक काम होने पर 20,000-30,000 रुपए अलग से देता है.

● फाइनेंसर के खर्च पर तस्कर कुछ दिन दुबई में घूमते हैं और फिर लौटने से कुछ वक्त पहले दवाओं और पानी के साथ सोने के कैप्सूल गटक जाते हैं. जांच एजेंसियों से बचने के लिए तस्करों को बदल-बदल कर दुबई भेजा जाता है.

● पेट के जरिए सोना तस्करी का तरीका जोखिम भरा है. सोने की छोटी गोलियों या कैप्सूल को निगलकर लाया जाता है. ये गोलियां पेट में लंबे समय तक रहें इसके लिए तस्करों को बाकायदा उस मुताबिक खानपान की ट्रेनिंग दी जाती है.

● तस्करों को कुछ ऐसी दवाएं भी दी जाती हैं जिससे सोने की गोलियां या कैप्सूल से पेट में दर्द न हो. इन कैप्सूल को घर पहुंचने के बाद शौच के जरिए निकाला जाता है. इसके लिए भी पहले दवाइयां खानी पड़ती हैं.

● तस्करों के पेट से सोना निकालने की प्रक्रिया आमतौर पर किसी आयुर्वेद या यूनानी विधा के डॉक्टर की निगरानी में होती है. मुरादाबाद पुलिस को इस धंधे में शामिल कई आयुष डॉक्टरों की जानकारी मिली है जो कैप्सूल निकलवाने का 10,000 रुपए लेते हैं.

● पुलिस को कुछ आरोपियों के घरों में इसके लिए विशेष जाली लगी टॉयलेट सीट भी मिली हैं, ताकि मल के साथ जाने वाली गोलियां आसानी से अलग हो सकें. तस्करी करके लाए गए सोने में गिरोह के मास्टमाइंड और फाइनेंसर का बड़ा हिस्सा होता है.

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