
• क्योंकि भाषाई बाध्यता के कारण उनका भाषण भले देश के उत्तरी भाग में नहीं समझा जाता हो, लेकिन उनके गृह प्रदेश में जो शोर होता है उसकी गूंज नई दिल्ली तक पहुंचती है. आप डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 10 सांसदों को इतने सामान्य अंकगणित के हिसाब से नहीं देख सकते बल्कि इसे तमिलनाडु की 39 सीटों पर इंडिया ब्लॉक की बड़ी जीत की तरह देखें.
राज्य में करीब 70 फीसद वोट पड़े, लेकिन भाजपा को खास समर्थन नहीं मिला—मुकाबला टेनिस के खेल की तरह 39-0 का रहा. दक्षिण में इंडिया ब्लॉक का मजबूत और भरोसेमंद चेहरा स्टालिन ही हैं.
• क्योंकि 2021 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही उनकी सरकार ने तमिलनाडु को 2030 तक दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के काम को रफ्तार दे दी है. अब तक राज्य में 9.74 लाख करोड़ रुपए का निवेश आ चुका है, जिनमें 130 से अधिक फॉर्च्यून-500 कंपनियां शामिल हैं.
विनम्र सिपाही
क्या प्रधानमंत्री बनने की कोई महत्वाकांक्षा है? जवाब में पिता एम. करुणानिधि की बात दोहराते हैं, ''मैं अपनी ऊंचाई जानता हूं''
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ममता बनर्जी, 69 वर्ष, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
अपने पंडाल की दुर्गा
• क्योंकि वे उन लोगों में से हैं जो हार मानना नहीं जानते. हर दिन 10,000 कदम चलना उनकी आदत में शुमार है—चाहे घर में ट्रेडमिल पर हो, सचिवालय के दफ्तर में या फिर विधानसभा में. राजनीति में भी वे इसी जज्बे से चलती हैं, भले कभी-कभी अपनी जगह मजबूती से टिके रहने के लिए दौड़ना पड़े.
हाल में बलात्कार और हत्या की बर्बर घटना, जिसने जनता के आक्रोश को भड़का दिया, उनके सामने अब तक की सबसे कठिन परीक्षा बनकर आई है. क्या ये हालात बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा मोड़ ला सकते हैं? किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. बेहतर होगा कि किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले उनके साथ 10,000 कदम चल लें.
• क्योंकि लोकसभा चुनाव मे भाजपा के खिलाफ उन्होंने जीत हासिल की, उससे लोगों के साथ उनका जुड़ाव और राजनैतिक दांवपेच की समझ फिर से साबित हुई. विपक्षी खेमे में मोदी सरकार के साथ सबसे जोरदार लड़ाई वे ही लड़ती हैं और उनकी पार्टी संसद में सरकार पर अपने सामर्थ्य से भी अधिक हमले करती है.

शाम का नाश्ता
ममता शाम को पकौड़े और मुरमुरे का अपना पसंदीदा नाश्ता चॉप-मुरी कभी नहीं भूलतीं. बंगाल के बाहर के दौरों के वक्त भी नहीं.
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अखिलेश यादव, 51 वर्ष, अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
साइकिल ट्रैक पर
• क्योंकि सैफई के उस बालसुलभ मुस्कान के पीछे ऐसा दिमाग है जो अपने सियासी शतरंज के हुनर की बदौलत चाणक्य को भी चकमा दे सकता है और उसमें इतना संयम है कि वह अपने ही गर्भगृह में एक पवित्र सेना का सामना कर सकता है. सबूत: भाजपा और कांग्रेस के बाद देश की लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी, 37 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी.
ये सारी सीटें भगवा रंग के उत्तर प्रदेश में जीती गईं और इनमें एक वह सीट भी शामिल है, जिसकी वजह से पूरी राष्ट्रीय बहस को जोरदार झटका लगा - अयोध्या.
• क्योंकि उन्होंने पीडीए फॉर्मूले से—ओबीसी, दलितों और अल्पसंख्यकों का इंद्रधनुषी गठबंधन—अपने राजनैतिक आधार को काफी चौड़ा कर दिया है. वह इतना बहुरंगी था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की हिंदुत्व अपील फीकी पड़ गई. अब, उन्होंने केवल 'यादव पार्टी' होने से पिंड छुड़ाने के लिए नाव का माझी एक ब्राह्मण को बना दिया है. उनकी नाव 2027 में गोमती में कितनी दूर जाएगी, यह इंडिया ब्लॉक और देश के लिए अहम होगा.

साहित्य प्रेम
सोने से पहले एक घंटा पढ़ते हैं. पसंदीदा कवि उदय प्रताप सिंह हैं; उनकी पंक्तियां अखिलेश के सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाई देती हैं.

