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ऊंचे और असरदार रैंकिंग-2024 : अमिताभ बच्चन के बाद कौन हैं देश के बड़े आइकन?

इंडिया टुडे की ऊंचे और असरदार रैंकिंग-2024 में देश के सबसे बड़े आइकन में महानायक अमिताभ बच्चन तो शामिल हैं ही. साथ ही सचिन, नारायण मूर्ति, आनंद महिंद्रा, अजीम प्रेमजी जैसी शख्सियतें भी हैं

अमिताभ बच्चन, अभिनेता, बॉलीवुड के लीजेंड
अमिताभ बच्चन, अभिनेता, बॉलीवुड के लीजेंड
अपडेटेड 14 नवंबर , 2024

महानता के दो रूप हैं. एक वे जो अपने पेशे के दिग्गजों के मुकाबले कहीं ज्यादा चमक और ताकत हासिल कर लेते हैं. उनमें कई ऐसी जगहों पर होते हैं जो बिलाशक दूसरों की जिंदगियों पर असर डालती हैं—राजनेता स्वाभाविक ही सबसे ज्यादा दिमाग में आते हैं. मगर उनमें ज्यादातर अपनी जमात में ही तुलना के योग्य होते हैं. महानता के पलड़े पर वे समानधर्मा कामों और गतिविधियों से जुड़े लोगों के कुल का निर्माण करते हैं.

दूसरे वे जो पेशे से ऊपर उठ जाते हैं, जिनकी अहमियत उनके रोजमर्रा के दायरे के पार निकल जाती है. इस तरह वे ठोस और प्रतीकात्मक तरीकों से समाज का रंग-ढंग बदल देते हैं. अगले पन्नों पर हम ठीक ऐसी ही उत्कृष्ट विभूतियों का चयन प्रस्तुत कर रहे हैं. दस विभूतियां, जो अपनी चुनी हुई जिंदगी के क्रियाकलापों में ही अलग हैं, लेकिन जब वे महानता की बुलंदी पर पहुंचे, तो एक सार्वभौमिकता हासिल कर ली.

अब भी कोई भ्रम हो, तो नामों से मिट जाएगा. मसलन, आप पाएंगे कि अमिताभ बच्चन की शख्सियत का बखान करने के लिए 'अभिनेता' शब्द बिल्कुल नाकाफी है. वे ऐसी सांस्कृतिक परिघटना हैं जो युग को परिभाषित करने वाले तटबंधों के आर-पार फैली है. यह समझना मुश्किल नहीं कि यह 'सार्वभौम' असर कलाकारों या खिलाड़ियों के लिए किस तरह काम करता है.

यह समझने के लिए कि ऐसा क्यों होता है, मसलन, सचिन तेंडुलकर अपने बनाए रनों के कुल योग से कहीं बड़े हैं. हमारी फेहरिस्त में कॉर्पोरेट जगत के दिग्गज भी हैं, लेकिन वही जो अपनी कंपनी के मूल्य निर्धारण से कहीं ज्यादा बड़ी चीजों के वास्तुकार रहे हैं. वे किसी गैर-ओहदेदार रसूखदारों के दंतहीन क्लब में नहीं हैं, बल्कि बेहद बढ़-चढ़कर सक्रिय हैं और उनकी उत्पादक क्षमता जरा भी चूकी नहीं है—यहां तक कि 90 वर्षीय ऑटो निर्माता आर.सी. भार्गव की भी नहीं. महानता किसी न किसी स्तर पर अक्षय ऊर्जा भी है.

1. अमिताभ बच्चन, 82 वर्ष, अभिनेता, बॉलीवुड के लीजेंड

क्योंकि देश की प्रतिष्ठित हस्तियों की कोई भी फेहरिस्त लंबे चेहरे, दिल छू लेने वाली आंखें, और समूचे युग को बयान कर सकने वाली आवाज से सजी 6'2'' की इस शख्सियत को नजरअंदाज करने की जुर्रत नहीं कर सकती. 55 साल पहले धधकती अग्नि की तरह आगाज करने के बाद यह उनकी ऊंचाई कम और उनके करियर की लंबाई और टिकाऊ जीवंतता ज्यादा है जो आपको अचंभे में डाल देती है.

(82 वर्ष की उम्र में ब्रांड मूल्य है 8.36 करोड़ डॉलर!) उनकी गहरी और भारी आवाज, जो कभी रौबीले आतताइयों और चिकने-चुपड़े खलनायकों के मन में ईश्वर का डर पैदा कर देती थी, अब अपनी वत्सल अंतरंगता से जनसाधारण के मन को सुकून पहुंचाती है—जनसंदेश देने के लिए सरकारें उन पर भरोसा करती हैं; ब्रान्ड अपने सामान उनकी चौखट पर लटका देते हैं. लेकिन सबसे खास बात अब भी इस अदाकार की निहत्था कर देने वाली कला है

क्योंकि बिग बी आज भी दृश्य चुरा लेने वाली अदाकारी करते हैं (2024 की महाकाव्यात्मक साइंस फिक्शन फिल्म कल्कि 2898 एडी में उनके अभिनीत अश्वत्थामा को देखिए). जेन ज़ी और अल्फा में अपने मुरीदों का विस्तार करने की उनकी काबिलियत उनके नाटकीय हुनर, परदे पर चुंबकीय मौजूदगी, और काम के प्रति निष्ठा—रात 3.30 बजे तक रात की पाली में काम करना और फिर सुबह जिम जाना!—का प्रमाण है.

सोशल मीडिया में कीड़े की तरह दिलचस्पी वक्त के साथ तालमेल बिठाने—यानी युवा दिलो-दिमाग के साथ सहजता से जुड़ने—का उनका अकेला तरीका नहीं है. उन्होंने '80 और '90 के दशक के जोखिम से बचने की केंचुल उतार फेंकी और नए वक्त के हिसाब से ढलने के लिए तैयार होकर मौके तलाशे. टीवी 2000 में उनका जोखिम भरा दूसरा पदार्पण था: केबीसी भी अब सिल्वर जुबली की तरफ बढ़ रहा है!.

दक्षिणी फलक : तकरीबन 200 फिल्में करने के बाद उन्होंने तमिल की ओर रुख किया और रजनीकांत के साथ वेत्तैयां (2024) में उतरे.

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2. सचिन तेंडुलकर, 51 वर्ष, बल्लेबाजी के दिग्गज

सचिन तेंडुलकर, बल्लेबाजी के दिग्गज

क्योंकि बॉम्बे मैदान की पिच पर उनका कहना कि महानता के साथ एक शरारती बेपरवाही भी लिपटी होती है, और हर वक्त दो-दो हाथ को तैयार रहना, देश में आशा और उम्मीद का नया दौर छेड़ गया. वैश्विक शिखर चूमने वाले उनसे पहले भी हुए. खांटी क्लासिक गावस्कर ने ब्रैडमैन को फीका किया, धूप में तपे कपिल ने अपने डेविल्स के साथ 1983 में वेस्ट इंडीज को धूल चटा दी.

लेकिन ताजा-ताजा उदारीकरण की हवा में नब्बे के दशक में नए स्वाभाविक वैश्विक नागरिक पैदा हो रहे थे, तो दादर का यह लड़का भारतीय क्रिकेट का अलादीन के चिराग की तरह उभरा, हमेशा मैदान में धूम मचाता हुआ, चाहे डब्ल्यूएसीए या वानखेड़े का घरेलू मैदान हो, या ओवल यानी केनसिंग्टन ओवल, हर जगह बिना ज्यादा पसीना बहाए दुनिया जीत रहा था.

क्योंकि मामला सिर्फ उनके बनाए रिकॉर्ड का नहीं है. वे तो ढेर सारे हैं. उनके शतकों का शतक, सभी तीनों फॉर्मेट में बल्लेबाजी के 34,000 रन या 4,000 से ज्यादा चौके ही देखिए. जरा सोचिए, उन्होंने अपनी छवि कैसे बरकरार रखी. लोग उन्हें 'क्रिकेट का भगवान' कहते हैं. करोड़ों लोग उनसे नाकाम न होने की उम्मीद करते हैं. तकरीबन 24 साल के बेहद होड़ वाले आधुनिक खेल में ज्यादातर वे ऐसे ही रहे. यही चैंपियन प्रतिभा है.

वजनदार पसंद : सचिन को हमेशा से भारी बल्ला ही भाता है.1992 में ऑस्ट्रेलिया दौरे में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सौरभ गांगुली की छुट्टी हुई तो सचिन ने दादा का भारी बल्ला मांग लिया.

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3. आर.सी. भार्गव, 90 वर्ष,चेयरमैन, मारुति सुजुकी

आर.सी. भार्गव, चेयरमैन, मारुति सुजुकी

क्योंकि जरा सोचिए, 90 साल की उम्र में जब लगभग दो पीढ़ियां रिटायर हो चुकी हों, भार्गव जाड़े की धूप सेकते चैन फरमा रहे होते. लेकिन 2024 के शरद में वे सालाना आम सभा में शेयरधारकों को संबोधित करते हैं. वे कंपनी की विकास रणनीतियां गिना रहे हैं: क्यों मारुति 2025 में बिजली चालित वाहन की ओर रुख कर रही है, ताकि 2030 के दशक में भारी बूम में बढ़त ली जा सके, साथ ही प्रति लीटर 35 किमी वाली सस्ती हाइब्रिड पर भी निशाना साध रही है और क्यों भारत में अभी भी छोटी कारें चाहिए. बेशक, कंपनी के इस पुरोधा से बेहतर कौन जान सकता है, जिसने देश की सड़कों पर लोकतंत्र ला दिया.

क्योंकि उनकी निगरानी में मारुति ने वित्त वर्ष 24 में सबसे अधिक 20 लाख से ज्यादा वाहनों की बिक्री की और लगातार तीसरे साल देश में सबसे अधिक 2,80,000 वाहन निर्यात किया. वे मेक इन इंडिया के रोल मॉडल कहलाने के हकदार हैं.

विविध शौक : भार्गव को वैश्विक व्यंजनों को चखने में मजा आता है—बेशक,जापानी भी. ऑड्री हेपबर्न पसंदीदा सितारा हैं. वे अब भी लिखने का वक्त निकाल लेते हैं. उनकी नई किताब? इम्पॉसिबल टु पॉसिबल: मारुतिज इन्क्रेडिबल सक्सेस ऐंड हाउ इट कैन चेंज इंडिया.

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4. एन.आर. नारायण मूर्ति, 78 वर्ष, संस्थापक, इन्फोसिस

एन.आर. नारायण मूर्ति, संस्थापक, इन्फोसिस

क्योंकि अमूमन ऐसा देखने में नहीं आता कि कोई कारोबारी ऐसी ऊंचाई पर पहुंच जाए कि उसके काम और बयान को इतनी शिद्दत से अमल में लाया जाए, जैसे धर्मगुरुओं की बात हो.मूर्ति ने अनोखे दोतरफापन से यह हासिल किया. एक, उन्होंने विदेशी डिलिवरी मॉडल के बारे में सोचा, संवारा और अमल में लाया, जो भारत में सॉफ्टवेयर उद्योग की रीढ़ बन गया. साथ ही, उन्होंने वैश्विक दौर में इन्फोसिस को बेमिसाल देसी ब्रान्ड बनाया.

लेकिन उन्होंने यह सब पुराने दौर के अपने मध्यवर्गीय मूल्यों पर चलकर किया. सादगी भरा जीवन जिया, बड़े कॉर्पोरेट घरानों के तड़क-भड़क से बचे रहे और सादगी को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया. लेकिन हर दौर में यह दर्शन नहीं लुभाता, हाल में उन्होंने पाया कि युवाओं को हफ्ते में 70 घंटे काम करने की सलाह भारी बहस का बायस बन गई.

क्योंकि रिटायर होने के बाद वे अपनी निजी निवेश फर्म कटमारान से स्टार्ट-अप वेंचर की मदद कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी और कारोबार के मामलों में उनकी सलाह काफी अहम मानी जाती है और वे यूनाइटेड नेशंस फाउंडेशन और प्रिंसटन में इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी जैसे विविध संस्थाओं के बोर्ड में हैं.

सीधे-सरल : कारोबारी प्रतिस्पर्धा के बावजूद मूर्ति ने रतन टाटा के साथ करीबी दोस्ती बनाए रखी. एक बार तो भरे मंच पर उनके पैर छू लिए.

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5. नंदन नीलेकणि, 69 वर्ष, टेक्नोलॉजी अगुआ, इन्फोसिस के सह-संस्थापक

नंदन नीलेकणि, टेक्नोलॉजी अगुआ, इन्फोसिस के सह-संस्थापक

क्योंकि कई बार आप एहसास ही नहीं कर पाते कि किसी की आमद से जीवन बुनियादी तौर पर बदल गया, जिसे देखने की तो छोड़िए, कभी उसके बारे में सोचा भी नहीं था. इन्फोसिस के निराशाजनक दौर से उबरकर, टेक्नो-आशावाद के हौसले से भरी उनकी दूरदर्शी नजर भारत के सार्वजनिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की प्रमुख सर्जक-शक्ति बन गई. यूपीआइ, आधार, ई-केवाइसी, फास्टटैग, और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) वगैरह की सोचिए. इसी वजह से, चाहे जो पार्टी सत्ता में हो, वे टेक्नोलॉजी संचालित योजनाओं के मामले में सरकार के प्रमुख सलाहकार बने रहते हैं.

क्योंकि अब वे देश की भलाई के लिए एआइ की संभावनाओं को खंगालने की कोशिश कर रहे हैं. उनके एकस्टेप फाउंडेशन ने पीपलप्लस डॉट एआइ की स्थापना ''काम कर दिखाने वालों, सपने देखने वालों, मरम्मत करने वालों और नई ईजाद करने वालों'' के लिए की. उनका विचार भारत को दुनिया की एआइ-प्रयोग की राजधानी बनाने का है.

क्योंकि उनकी हर पहल लोक केंद्रित होती है. मसलन, अवंती फाइनेंस गरीबों को छोटे कर्ज देती है.

फाइनेंस इंटरनेट : अप्रैल 2024 में वे एक शोध-पत्र 'फिंटरनेट' के सह-लेखक हैं. यानी भविष्य में इंटरनेट जैसा सिस्टम, जिसमें सभी वित्तीय कारोबार जुड़े होंगे.

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6. आनंद महिंद्रा, 69 वर्ष, चेयरमैन, महिंद्रा समूह

आनंद महिंद्रा, चेयरमैन, महिंद्रा समूह

क्योंकि महिंद्रा ऐसा नाम बन चुका है, जिसके वाहन भारतीय सड़कों पर रुककर देखने को बाध्य कर देते हैं, और अब दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और चिली जैसे दूरदराज के देशों की सड़कों पर भी ऐसा ही नजारा दिखना आम हो गया है. लेकिन 23 अरब डॉलर वाला महिंद्रा समूह उनके नेतृत्व में एक वैश्विक नाम बना तो इसके पीछे उनकी प्रमुख कंपनी के बनाए मजबूत और आकर्षक एसयूवी एकमात्र कारण नहीं हैं.

प्रतिष्ठित फ्रांसीसी ब्रांड प्यूजो मोटरसाइकिल, इतालवी कार डिजाइनर पिनिनफेरिना एस.पी.ए., फिनलैंड की वेकेशन स्पेशलिस्ट हॉलिडे क्लब...इन सब पर महिंद्रा की छाप है. भारत के भीतर उनका कारोबार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है—मसलन, कृषि, आइटी, वित्त, ऊर्जा, लॉजिस्टिक, एयरोस्पेस.

क्योंकि वे सार्वजनिक मामलों में खासी रुचि रखते हैं और पूरी गंभीरता के साथ इस पर प्रतिक्रिया भी देते हैं. एक्स पर उनके फॉलोअर की संख्या 1.1 करोड़ है; वे लड़कियों की शिक्षा और सीमांत किसानों की मदद के लिए कई कदम उठा रहे हैं.

लेंस के पीछे : आनंद महिंद्रा की फिल्म निर्माण में भी गहरी रुचि है. हार्वर्ड में स्नातक की पढ़ाई में यही उनका विषय था. वे  बेहद बारीक नजर वाले फोटोग्राफर भी हैं.

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7. रजनीकांत, 73 वर्ष, तमिल सुपरस्टार

रजनीकांत, तमिल सुपरस्टार

क्योंकि बस यूं ही. क्या किसी के लिए अपने महान होने का सबूत पेश करने की जरूरत है? और ऐसा शख्स जिसके बारे में मजाक में ही सही यह कहा जाता हो कि ''वह घूमते दरवाजे को एक झटके में बंद कर सकता है.'' या जिसका तो गूगल एकाउंट ही gmail@rajinikanth.com है. अगर एम.सी. एस्चर असंभव आकृतियां बनाने के लिए ख्यात हैं, तो थलैवर के असंभव करतबों का कोई जोड़ नहीं है.

क्योंकि बेंगलूरू का मराठी बस कंडक्टर शिवाजी राव गायकवाड़ तमिल फिल्मों की बड़ी घटना बन गया? लेकिन, उसने ऐसा कर दिखाया, उसे स्क्रीन पर बस एक ही काम करना था और यह कि खलनायक और सहायक भूमिकाओं से ऊपर उठकर पहले ऐसे बड़े भारतीय नायक का मुकाम हासिल करना, जिसका रंग देश की मिट्टी की तरह ही गहरा था. और हां, उन्होंने हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, बंगाली और मलयालम फिल्में भी कीं—पांच दशकों में यह आंकड़ा करीब 170 को पार कर चुका है.

यह रजनीकांत का ही जादू था जिसने स्क्रीन पर छाई रहने वाली शहरी फिल्मी नायक की छवि को पूरी तरह तोड़ दिया. वे ऐसे हीरो बन गए जो चाहे तो समुद्र को भी सुखा दे, और सिगरेट को एक अलग ही अंदाज में होंठों पर दबाने की उनकी अदा का तो हर कोई दीवाना है.

मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट में उन्हें परदे का यह नाम निर्देशक के. बालचंद्र ने दिया था, ताकि उस जमाने के दिग्गज शिवाजी गणेशन से कोई घालमेल न हो.

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8. विश्वनाथन आनंद, 54 वर्ष, पांच बार विश्व शतरंज चैंपियन

विश्वनाथन आनंद, पांच बार विश्व शतरंज चैंपियन

क्योंकि मद्रास के इस सीधे-सादे से लड़के ने 1988 में 18 साल की उम्र में भारत का पहला ग्रैंडमास्टर बनकर केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर अपनी प्रतिभा का लोहा नहीं मनवाया, बल्कि उससे भी कुछ बड़ा हासिल किया. उसने सिर्फ शारीरिक क्षमताओं पर केंद्रित खेलों की तरफ ध्यान देने वाले देश में दिमाग के खेल को फिर प्रतिष्ठित कराया. उनका स्वैग एक पूरी पीढ़ी के सिर चढ़कर बोलने लगा, जिसने न केवल इस खेल को अपनाया, बल्कि तेज और सुपरकूल अंदाज में खेलते हुए दुनिया भी जीती. उस 'लाइटनिंग किड' की तरह जो पांच बार विश्व चैंपियन बना.

क्योंकि वे भारतीय शतरंज चैंपियन की अगली लहर के अगुआ भी बने. बिल्कुल, ग्रैंडमास्टरों की हमारी नई फसल का श्रेय और इस सितंबर में बुडापेस्ट में शतरंज ओलंपियाड में हमारे ऐतिहासिक दोहरे स्वर्ण का श्रेय, उस सौम्य चेहरे को ही जाता है, जिस पर हमेशा एक कातिल मुस्कान छाई रहती है.

कैसे पड़े बीज : 2024 में भारत को 'बेहतरीन शतरंज देश' कहा जा रहा है. इसके बीज 1975 में तब पड़े, जब छह साल के विशी ने अपनी 'ममसी' से शतरंज सिखाने की जिद की.

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9. अजीम प्रेमजी, 71 वर्ष, संस्थापक चेयरमैन, विप्रो

अजीम प्रेमजी, संस्थापक चेयरमैन, विप्रो

क्योंकि कॉर्पोरेट दिग्गजों की पूरी पीढ़ी जहां अकूत पैसा जमा करने की अंधी दौड़ में शामिल है, वे ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने अपनी अधिकांश संपत्ति दान करने का फैसला किया. वह भी तब जब वे ऐसे शीर्ष मुकाम पर खड़े थे, जिसे उन्होंने पाया नहीं, बल्कि खुद गढ़ा था. 2000 के दशक में पांच बार सबसे अमीर भारतीयों में शुमार रहे प्रेमजी ने अगले दशक में दान का रास्ता अपनाया.

2019 में परोपकार के लिए एक बड़ा हिस्सा देने के बाद वे फोर्ब्स की अमीर भारतीयों की सूची में दूसरे नंबर से 15 स्थान नीचे आ गए. 12.2 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ वे अभी भी 19वें स्थान पर हैं, यह विप्रो की विविधता और लचीलेपन को दर्शाता है. चार दशक पहले वनस्पति तेल की कंपनी को कंप्यूटर दिग्गज के मुकाम तक पहुंचाया. दूरदराज इलाके से आने वाले इस शख्स ने देश में सॉफ्टवेयर युग में एकछत्र राज स्थापित किया. उनमें लेशमात्र भी अहंकार नहीं है. उनका जीवन धन-दौलत से नहीं, बल्कि प्रकाश से जगमग है.

क्योंकि शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कौशल में उनकी सामाजिक पहल 17 देशों तक पहुंच चुकी है, और लाभ उठाने वालों में 45 लाख लोग अमूमन वंचित तबके से होते हैं, जिनमें प्रवासी और जलवायु परिवर्तन के शिकार लोग भी हैं.

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने कर्नाटक सरकार के साथ 1,500 करोड़ रुपए का करार किया कि हफ्ते में चार दिन सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील में अंडे दिए जाएं.

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10. पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, 86 वर्ष, हिंदुस्तानी शास्त्रीय बांसुरी वादक

पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, हिंदुस्तानी शास्त्रीय बांसुरी वादक

क्योंकि इलाहाबाद निवासी पहलवान के बेटे की आंखों में गंगा के मैदानी इलाकों वाली शरारत है तो सांसों में गजब का दम, और उसने ही उन्हें पारंपरिक वाद्य पर आधुनिकता का अनूठा हस्ताक्षर बनाया. उनका बांसुरी वादन बिल्कुल वैसा ही पारंपरिक है, जितना हो सकता है—जिसका जिक्र नाट्य शास्त्र में मिलता है, यह शास्त्रीयता की बाइबल की तरह है, और इसे सुनकर देहाती चरवाहों के साथ मौज-मस्ती करते कान्हा की छवि दिमाग में उभरने लगती है. उन्होंने कृष्ण के साथ इतना गहरा जुड़ाव राग संगीत में अपनी लगन और औपचारिक सीख तथा दिग्गज संगीत हस्ती अन्नपूर्णा देवी का शिष्य बनने के बाद स्थापित किया.

क्योंकि उनकी शैली पूरी तरह अपनी है, वे अपने आप में फ्यूजन का एक नमूना हैं-मूड और व्याकरण के लिहाज से पूरी तरह हिंदुस्तानी रस में पगी हुई, जिसमें बीच-बीच में पश्चिमी स्टैकाटो तकनीक की झलक मिलती है. हालांकि, वे मूलत: अपनी यात्रा स्वतंत्र रूप से अकेले करने के आदी रहे हैं लेकिन बीटल्स और जॉन मैकलाफलिन जैसी हस्तियों के साथ मिलकर भी काम किया. 'शिव-हरि' की जोड़ी के तौर पर बॉलीवुड की ओर भी रुख किया. संतूर वादक शिवकुमार शर्मा के साथ बनी उनकी संगीतकार जोड़ी ने सिलसिला, चांदनी और लम्हे जैसी कई हिट फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया.

उन्हें रात में गाड़ियां चलाना बेहद पसंद है, और एक बार तो विंटेज ऑस्टिन कार पर हाथ आजमाने के लिए उसे उधार ले लिया था. यकीनन, हम सभी जानना चाहेंगे कि कार चलाते समय वे स्टीरियो पर क्या सुनना पसंद करते हैं!

—एम.जी. अरुण, कौशिक डेका, अमरनाथ के. मेनन, सुहानी सिंह और अमिताभ श्रीवास्तव

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