
सियासी ओलंपिक की एक बानगी बीते 22 सितंबर को असम में देखने को मिली. मौका था असम ओलंपिक संघ चुनाव का. अध्यक्ष पद के लिए केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल मुकाबले में उतरे तो सामने थे मौजूदा सीएम हेमंत बिस्व सरमा. शीर्ष पद के लिए सोनोवाल को वॉकओवर मिला और उन्होंने निर्विरोध जीत हासिल कर ली लेकिन अन्य पदों के लिए भाजपा के ही दो गुटों में कांटे की टक्कर दिखी. मामला कुछ ज्यादा ही तूल पकड़ने लगा तो सरमा को अपने कुछ विधायकों को पीछे हटने को कहना पड़ा, जिससे आखिरी समय में कुछ किरकिरी वाली स्थिति भी आ गई. बहरहाल, सरमा के भाई और आइपीएस अधिकारी सुशांत बिस्व सरमा उपाध्यक्ष बने. कुल मिलाकर, दोनों खेमों के बीच मुकाबला बराबरी का रहा. पर एक बात तो तय है कि खेलों के उलट राजनीति में हर किसी को कोई न कोई पदक मिल ही जाता है.
चिट्ठियां और चाल

गुजरात के इतिहासकार डॉ. रिजवान कादरी ने हाल में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर अच्छा-खासा हंगामा खड़ा कर दिया. सोनिया ने नेहरू-गांधी परिवार के तमाम राज दफ्न रखने की जिम्मेदारी संभाल रखी है और कादरी चाहते हैं कि वे जवाहरलाल नेहरू के जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन और बाबू जगजीवन राम जैसे लोगों के साथ निजी पत्राचार को लोगों के सामने लाएं. कादरी चाहते हैं कि खासकर नेहरू मेमोरियल म्यूजियम ऐंड लाइब्रेरी (अब प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय) से 2008 में ले जाई गईं 51 बक्सों की चिट्ठियां वापस की जाएं. बेहतर होगा सार्वजनिक उपयोग के लिए उन्हें डिजिटल करा दिया जाए.
वंदे सीतामढ़ी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अब शायद अपने धार्मिक सहयोगियों का असर दिख रहा है. उन्होंने 22 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया कि भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या को बिहार में सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी से जोड़ने वाली वंदे भारत ट्रेन चलाई जाए. यह भी कहा कि सीतामढ़ी मंदिर को नया रूप देने के लिए पुनौरा धाम में 50 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई है. इस पर कुछ लोगों का मानना है कि ट्रेन चली तो नीतीश पहली बार उससे अयोध्या भी जाएंगे.

जबानी जंग का जलवा
यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव के बीच एक-दूसरे के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल की होड़ लगी है. नाटकीय तुलना करने में तो योगी का कोई सानी नहीं. उन्होंने अखिलेश को 'कुत्ते की दुम' से लेकर औरंगजेब का अवतार तक करार दे डाला. फिर अखिलेश भी कहां चूकने वाले थे. उन्होंने भी चुटकी ली कि जिसे इतना क्रोध आता हो, वह योगी कैसे हो सकता है. यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि योगी की तस्वीर एक माफिया बॉस के चेहरे जैसी लगती है. इसके बाद योगी ने अखिलेश को मायावती के दिए उपनाम 'बबुआ' से संबोधित किया और माफिया के साथ संबंधों को लेकर आड़े हाथ लिया. यूपी विधानसभा के उपचुनाव नजदीक आते-आते इस जबानी जंग के और तीखी होने का अंदेशा है. और हां, ऐसे में शासन पर बात करने की किसी को जरूरत नहीं लग रही.
—साथ में धवल एस. कुलकर्णी

