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सूर्य को साध भारत कैसे बन सकता है अक्षय ऊर्जा में विश्व चैंपियन?

भारत अकेला ऐसा देश है जो बढ़ती मांग और सस्ती दरों पर चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा की आपूर्ति की चुनौती का सामना करने में सक्षम है. यहां उपलब्ध सबसे सस्ती बिजली सौर बिजली ही है, हालांकि यह तभी संभव होता है जब तक सूर्य चमकता रहता है

अजय माथुर, इंटरनेशनल सोलर अलायंस के डायरेक्टर जनरल
अजय माथुर, इंटरनेशनल सोलर अलायंस के डायरेक्टर जनरल
अपडेटेड 30 अगस्त , 2024

साल 2023 में भारत ने बिजली पैदा करने की अपनी क्षमता में 17,960 मेगावाट का इजाफा किया. इसमें से 72.3 फीसद का इजाफा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से किया गया. मौजूदा समय में भारत में (दुनिया के कई अन्य देशों की तरह ही) सूर्य की रोशनी से मिलने वाली बिजली सबसे सस्ती है.

हालांकि, ऐसा सिर्फ तभी मुमकिन है जब तक सूरज चमक रहा हो. यह नवीकरणीय ऊर्जा, खासकर सौर और पवन ऊर्जा के संबंध में एक बड़ी चुनौती को ही रेखांकित करता है. खासतौर पर विकासशील देशों में जहां दिन और रात दोनों ही समय बिजली की मांग बढ़ रही है.

बहरहाल, आगे की योजनाएं बनाते समय एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या हम सिर्फ नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान दें (इस स्थिति में रात के समय क्या होगा, तब तो हमें बिजली नहीं मिलेगी) या फिर सौर ऊर्जा के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन से चलने वाले बिजलीघर भी बनाएं (लेकिन इससे सभी के लिए बिजली महंगी होगी)?

लेकिन विकसित देशों में ऐसा नहीं है. उन्हें अपनी बिजली उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की जरूरत नहीं है. इसलिए सूरज न चमकने या हवा न चलने की स्थिति में वे अपनी मौजूदा बिजली व्यवस्था की मदद ले सकते हैं.

ऊर्जा

देश में ऊर्जा नीति को लेकर सकारात्मक माहौल बना है और हमें खासकर पिछले छह महीने में इसके बेहतर नतीजे भी देखने को मिले हैं. इस दौरान हमने पाया कि रात-दिन उपलब्ध नवीकरणीय ऊर्जा (आरटीसी-आरई) की कीमतें काफी घट गई हैं. सौर और पवन ऊर्जा (कभी-कभी दोनों को मिलाकर अच्छी गुणवत्ता पाने के लिए) से मिलने वाली इस बिजली की उपलब्धता 85 से 90 फीसद है जो कोयला-आधारित बिजलीघरों जितनी ही है.

इस बिजली की कीमत सिर्फ 4 से 5 रुपये प्रति किलोवाट प्रति घंटा आती है. वहीं नए कोयला आधारित बिजलीघरों को बिजली बेचने के लिए 5 रुपए प्रति यूनिट से ज्यादा कीमत मिल रही है. यह एक बड़ी बात है क्योंकि रात-दिन उपलब्ध नवीकरणीय ऊर्जा सबसे सस्ती बिजली बन गई है. इसके अलावा, बाकी बची 5 से 15 फीसद बिजली की जरूरत को एटमी ऊर्जा, जलविद्युत और अन्य कार्बन मुक्त बिजली स्रोतों से पूरा किया जा सकता है.

यह अपने नवीकरणीय ऊर्जा आधार को मजबूत करने की दिशा में भारत की सफलता को रेखांकित करता है. कोई भी दूसरा देश-खासकर कोई विकासशील देश बढ़ती मांग और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर 24 घंटे नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति की चुनौतियों पर खरा नहीं उतर पाया. नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में यही सफलता भारत के वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने के आधार को भी मजबूत करती है.

मसलन, हमने जो नीतियां लागू कीं और जो सबक सीखे हैं, उन्होंने हमें बार-बार नीतियों में सुधार और लागत घटाने का रास्ता दिखाया. इसने इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर काम करने के लिए भी प्रेरित किया. यह नीति और डिजाइन बनाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल में विशेषज्ञता हासिल करने में भी मददगार साबित हुई. साथ ही, इसने काफी हद तक यह भी सिखाया कि निजी क्षेत्र को नवीकरणीय ऊर्जा की नई परियोजनाओं में निवेश के लिए कैसे प्रोत्साहित किया जा सकता है.

बनना होगा ग्लोबल लीडर

हमने जो सीखा और जिनका अन्य देशों तक सफलता के साथ प्रसार किया (मेरी अगुआई वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसे संगठनों के जरिए) वे वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में हमारे चैंपियन के तौर पर उभरने की आधारशिला हैं. भारत की एक कंपनी पहले से ही दुनिया की सबसे सस्ती ईपीसी (इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण) सेवा दे रही है.

यह बात सौर पंप, सोलर कोल्ड रूम, सोलर मिनी-ग्रिड जैसे कई सौर उत्पादों को बनाने और बेचने वाली कंपनियों पर भी लागू होती है. उम्मीद है कि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआइ) योजनाओं को अच्छे से लागू करने के बाद हम सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल बनाने और बेचने में भी दुनिया में नंबर वन बन जाएंगे.

इस क्षेत्र में आगे बढ़ने और दिन-रात उपलब्ध होने वाली सस्ती नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में कामयाबी हासिल करने के साथ हमने बहुत कुछ सीखा है. मसलन, जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना (सौर, पवन और बैटरी परियोजनाओं के लिए), ट्रांसमिशन लाइनें बिछाना (नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से स्थानीय केंद्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए) और पैसे का आसानी से इंतजाम करना (सौर, पवन और बैटरी की क्षमता बढ़ाने के लिए सामान्य से ज्यादा लागत के मद्देनजर).

घरों की छतों पर सौर पैनल लगाना और सौर पंप को बढ़ावा देना (ऐसी नीतियां बनाकर जिनसे बिजली और पानी की सेवाएं आसानी से मिल सकें), और नवीकरणीय ऊर्जा की मदद से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की लागत कम करना. यह आगे काम आने वाला है क्योंकि इन्हीं से पता चलता है कि कौन-सी नीतियां कारगर हैं और कौन-सी कंपनियां नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों में पैसा लगाने का जोखिम उठाने को तैयार होंगी.

इस नीति के साथ-साथ डिजाइन, क्रियान्वयन और रखरखाव में विशेषज्ञता और जोखिम लेने वाली कंपनियों की मौजूदगी के साथ कुल मिलाकर भारत वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है. देश में ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा करने के उद्देश्य के साथ सरकारों की तरफ से दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि इस प्रक्रिया को तेज करेगी. वैसे, प्रोत्साहन मिले या न मिले, दोनों ही स्थितियों में भारत का अनुभव, विशेषज्ञता और उत्पादों की व्यापकता तो बढ़ेगी ही.

— अजय माथुर

लेखक इंटरनेशनल सोलर अलायंस के डायरेक्टर जनरल हैं

लंबी छलांग

- सौर बिजली आज भारत में उपलब्ध सबसे सस्ती बिजली है, हालांकि यह तभी संभव होता है जब तक सूर्य चमकता रहता है.

- भारत को यह समझने की जरूरत है कि क्या वह केवल अक्षय ऊर्जा क्षमता ही विकसित करे या सूर्य न चमकने या हवा न चलने की स्थिति के लिए जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता को भी बढ़ाने पर ध्यान दे. 

- भारत एकमात्र ऐसा विकासशील देश है जो बढ़ती मांग और सस्ती दरों पर चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा की आपूर्ति की चुनौती का सामना करने में सक्षम है.

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