बजट में प्रतिरक्षा के हिस्से में 6.21 लाख करोड़ रु. आए हैं यानी सबसे ज्यादा करीब 13 फीसद हिस्सा उसी का है. यह आवंटन अनुमानित जीडीपी का 1.9 फीसद है. जीडीपी कमोबेश पिछले साल के बराबर ही है. पर जैसा कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद मलिक ने एक्स पर शिकायत की, "2.5 मोर्चों पर मौजूद खतरों और आधुनिकीकीरण की जरूरतों को समझा नहीं गया." वे दरअसल पाकिस्तान और चीन के साथ दो मोर्चों पर युद्ध के परिदृश्य की बात कर रहे थे, जिसके लिए अनुमानित जीडीपी के कम से कम 2.5 फीसद बजट चाहिए होगा.
हालांकि सरकार चीन से उपजे खतरों को लेकर चौकन्नी है. सीमा पर तनाव को दूर करने के लिए जारी कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद चीन बराबर बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में जुटा हुआ है. नतीजतन भारत को भी ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. इसी के मद्देनजर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को अच्छी-खासी बजट वृद्धि मिली है. 6,500 करोड़ रुपए का यह आवंटन वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 30 फीसद अधिक है. इससे जिन प्रमुख परियोजनाओं का वित्त पोषण बढ़ने की उम्मीद है, उनमें लद्दाख स्थित न्योमा एयरफील्ड, हिमाचल प्रदेश में रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण शिंकू ला सुरंग और अरुणाचल प्रदेश की नेचिफू सुरंग शामिल हैं.
रक्षा बजट का करीब एक तिहाई—1,72,000 लाख करोड़ रुपए— पूंजीगत खर्च आधुनिकीकरण के लिए रखा गया है. हालांकि, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना के रोजमर्रा के खर्च और तनख्वाह आदि के लिए 2.8 लाख करोड़ रुपए के राजस्व परिव्यय को देखें तो उसके मुकाबले यह पूंजी परिव्यय काफी कम लगता है. राजस्व व्यय में अग्निपथ भर्ती योजना के लिए रखे गए करीब 6,000 करोड़ रुपए शामिल हैं.
आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित बजट से फौज की कुव्वत बढ़ाने वाले कुछ बेहद जरूरी सामान खरीदे जा सकेंगे. मसलन, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी, लड़ाकू विमान, पोत, पनडुब्बी, प्लेटफॉर्म या ड्रोन. इसमें 40,777 करोड़ रुपए विमान और एयरो इंजन के लिए, 23,800 करोड़ रु. नौसैन्य बेड़े के विस्तार के लिए और 6,830 करोड़ रुपए नौसेना डॉकयार्ड परियोजनाओं के लिए रखे गए हैं.
आत्मनिर्भरता अब भी एक प्रमुख मंत्र है, ऐसे में घरेलू रक्षा सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने डोमेस्टिक कैपिटल प्रोक्योरमेंट की खातिर 1.05 लाख करोड़ रुपए रखे हैं. अनुसंधान हमेशा की तरह अहम है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को 23,855 करोड़ रुपए मिले हैं. इसमें नई टेकनोलॉजी विकसित करने और कुछ फंडामेंटल रिचर्स पर 13,208 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं.
भारत के रक्षा बजट के आवंटन में पिछले चार वर्षों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. 2020 में 4.71 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर आज यह 6.21 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है. पर जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का सपना देखने वाले देश के लिए कम से कम रक्षा खर्च के मामले में अमेरिका, चीन और रूस जैसी प्रमुख वैश्विक ताकतों के मुकाबले यह बहुत अच्छी स्थिति नहीं.
1.72 लाख करोड़ रु. प्रतिरक्षा या डिफेंस पर कुल पूंजीगत व्यय; हाइटेक साजो-सामान की खरीद पर जोर
● रक्षा के लिए बजटीय आवंटन: 2023-24 में 5.94 लाख करोड़ रुपए की तुलना में बढ़ाकर 6.21 लाख करोड़ रुपए किया
● बीआरओ का परिव्यय 30 फीसद बढ़ा: 6,500 करोड़ रुपए आवंटित; डीआरडीओ, तटरक्षक बल को भी अधिक राशि मिली
● कुल राजस्व आवंटन: 2.8 लाख करोड़ रुपए; इसमें अग्निपथ भर्ती योजना के लिए बढ़ा आवंटन—6,000 करोड़ रुपए—शामिल

