वित्त वर्ष 2024-25 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार-संचालित अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों के विकास को और ज्यादा बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र को लाने की योजनाओं का ऐलान किया. उनके इस कदम से नरेंद्र मोदी सरकार के विकसित भारत के विजन में इन क्षेत्रों की अहमियत की झलक मिलती है.
वित्त मंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बजट में 13,042.75 करोड़ रुपए आवंटित किए, जो 2023-24 में आवंटित धनराशि 12,543.91 करोड़ रुपए से अधिक है. उन्होंने अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी के विकास पर जोर देने के लिए 1,000 करोड़ रुपए का वेंचर कैपिटल फंड बनाने का भी ऐलान किया.
सीतारमण ने कहा कि इस पूंजी से अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का अगले 10 साल में पांच गुना विस्तार होगा. इससे अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम कर रहे 180 से ज्यादा सरकारी मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप को मदद मिलने की संभावना है. परमाणु ऊर्जा की बात करते हुए वित्त मंत्री ने घोषणा की कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) विकसित करने के लिए केंद्र निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगा.
सीतारमण ने कहा, "उम्मीद है कि परमाणु ऊर्जा विकसित भारत के लिए ऊर्जा मिश्रण का अहम हिस्सा बनेगी." एसएमआर प्रति इकाई 300 मेगावॉट या उससे कम क्षमता वाले रिएक्टर हैं. इन्हें कारखानों में बनाया जा सकता है और इस लिहाज से ये पारंपरिक परमाणु रिएक्टर के विपरीत हैं, जिन्हें संयंत्र स्थल पर ही बनाया जाता है. इनके छोटे आकार और कारखाने में निर्माण की वजह से न केवल लागत में, बल्कि निर्माण के समय में भी बचत होती है.
एसएमआर को ट्रकों या रेलवे से परमाणु ऊर्जा स्थल तक आसानी से ले जाया जा सकता है. इससे मिलने वाली ऊर्जा जरूर पारंपरिक परमाणु बिजली रिएक्टर के मुकाबले करीब एक-तिहाई है, पर अधिक क्षमता हासिल करने के लिए इसे कई इकाइयों को जोड़कर बढ़ाया जा सकता है. निजी कंपनियों के साथ मौजूदा सहयोग ऐसे समय में आया है जब भारत 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने के रास्ते पर बढ़ रहा है और जिसके लिए ज्यादा स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल की तरफ जाना जरूरी है.
इस बीच मौजूदा बजट में अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देने की रूपरेखा पेश की गई, जो अंतरिक्ष की खोज में भारत की हालिया कामयाबियों के नक्शेकदम पर आई है. इनमें पिछले साल के दो कामयाब मिशन चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 शामिल हैं. उद्योग के विश्लेषक एक दशक में भारत के अंतरिक्ष बाजार के कई गुना बढ़ने को लेकर खासे आशावादी हैं. खासकर जब लॉन्च व्हीकल, उपग्रह निर्माण, पृथ्वी अवलोकन, संचार और इन-ऑर्बिट अर्थव्यवस्था में निवेश किया जा रहा है.
इंडियन स्पेस एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल लेफ्टि. जनरल ए.के. भट्ट (सेवानिवृत्त) कहते हैं, "ये उपाय हमारे अंतरिक्ष ईकोसिस्टम की वृद्धि और विकास के लिए बेहद अहम हैं." बजट आवंटन के बारे में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरर अग्निकुल कॉसमॉस के सीईओ श्रीनाथ रविचंद्रन यह भी कहते हैं, "यह दिखाता है कि सरकार ने भारत के लिए वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का ज्यादा बड़ा हिस्सा हासिल करने के अपने विजन को सहारा देना जारी रखा है."
झलकियां
● केंद्र छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) विकसित करने के लिए निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगा ताकि परमाणु ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि की जा सके
● अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम कर रहे सरकारी मान्यता प्राप्त 180 से ज्यादा स्टार्ट-अप की मदद के लिए खास वेंचर कैपिटल फंड की स्थापना

