नेत्रा कुमनन, 26 वर्ष
खेल: सेलिंग (नौकायन)
उपलब्धि: एशियाई चैंपियनशिप 2022 में स्वर्ण
कैसे क्वालिफाई किया: ओलंपिक क्वालिफायर इवेंट लास्ट चांस रेगेटा में इमर्जिंग नेशन्स प्रोग्राम के तहत कोटा मिला
बस करो न अब, प्लीज!'' नेत्रा कुमनन पिता को प्यार से झिड़कती हैं जब वे उन्हें चिढ़ाते हुए कहते हैं कि मोबाइल फोन पर वे सेलिंग जितना ही वक्त बिता रही हैं. यह मई 2024 की बात थी और कुमनन चेन्नै में अपने घर पर थीं. यह दुर्लभ मौका था क्योंकि पिछले 5 साल में ज्यादातर वक्त उन्होंने स्पेन में प्रशिक्षण में गुजारा है.
इस मीडिया वीडियो इंटरव्यू के जरिए पिता को भी यह सुनने का मौका मिल गया कि उनकी बेटी अपने सफर में कैसा कर रही है. वे बेटी को यह बताते हुए सुन रहे हैं कि कैसे एक खेल मनोवैज्ञानिक ने उन्हें दबाव से उबरने में मदद की. वे कहती हैं, ''सेलिंग यानी नौकायन दिमागी खेल है. इसके बहुत-से पहलू हमारे नियंत्रण में नहीं होते. अब भी मुझे इससे जूझना पड़ता है.''
ओलंपिक में नेत्रा की इवेंट महिला लेजर रेडियल है जिसे सिंगल सेल सिंगल हैंडेड डिंगी के नाम पर रखा गया है. तोक्यो ओलंपिक के लिए नेत्रा का क्वालिफाइ करना बड़ी घटना थी—वे क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला नाविक थीं—तो पेरिस में शामिल होना मनोबल बढ़ाने वाला है. नेत्रा बताती हैं, ''पिछले साल एशियाई खेलों में भी हम उम्मीद कर रहे थे, मैं वाकई एकदम नजदीक पहुंच गई थी लेकिन ऐन मौके पर पीछे रह गई.''
पहली बात नौकायन का स्कोरिंग सिस्टम समझने की है: इसमें सबसे कम स्कोर करने वाला जीतता है. नेत्रा समझाती हैं, ''इसमें बात बेस्ट करने की नहीं, सबसे कम गलतियां करने की है. हम हवा और जलधारा जैसी कुदरती ताकतों के खिलाफ नहीं बल्कि दूसरी चीजों के खिलाफ रेस लगाते हैं. काफी कुछ फौरी फैसले लेने से जुड़ा है.''
उनकी राय में, कुछ लोग सोच सकते हैं कि यह भारत में सबकी पहुंच वाला खेल नहीं. उन्होंने टेनिस, बैडमिंटन और बास्केटबॉल में हाथ आजमाए पर सेलिंग के समर कैंप में शामिल होने के बाद वे इससे तुरंत जुड़ गईं. वे कहती हैं, ''यह दूसरे खेलों से एकदम अलग है. समुद्र में होना बेहद रोमांचकारी होता है, कभी-कभी आपको समुद्री जीवन भी देखने को मिलता है. रेस में थोड़ा आगे निकलने के लिए आप कुछ युक्तियां सीखते हैं.''
हालांकि कई सेलिंग क्लब आने और सरकार के समर्थन से भारत में सेलिंग का आकर्षण थोड़ा बढ़ा है, फिर भी काफी कुछ करने की जरूरत है. ''यूरोपीय सेलर्स के साथ फासला कम करने को हमें वहां ट्रेनिंग लेनी होगी.'' तोक्यो के मुकाबले नेत्रा पेरिस के लिए बेहतर तैयारी महसूस करती हैं क्योंकि जब वे मार्सेय मरीना में भूमध्य सागर की लहरों के बीच उतरेंगी तो उनके साथ उनके कोच टमास एस्जेस होंगे.
नेत्रा और विष्णु श्रवणन भारत के दो सेलिंग एथलीट हैं जो पहले से ही मार्सेय में तैयारी कर रहे हैं. नेत्रा कहती हैं, ''मैं जानती हूं क्या उम्मीद करनी चाहिए और क्या मुझे बाहर कर सकता है. अब मैं उस पर फोकस कर सकती हूं जो मुझे करना है.''

