- अरुण पुरी
एक सदी के बाद ओलंपिक फ्रांस की खूबसूरत राजधानी में लौटा तो दुनिया भर के खेलप्रेमियों में उमंग और उत्साह की लहर दौड़ गई है. उम्मीद है, यह आयोजन अनूठा होगा. उद्घाटन समारोह ट्रोकाडेरो के गार्डन में होगा, बैकग्राउंड में एफिल टावर होगा और खिलाड़ी सेन्न नदी में नौकायन करेंगे.
बेशक, वे खुशनसीब होंगे, जो घुड़सवारी की कला का बैले नृत्य कहलाने वाले ड्रेसाज जैसे आकर्षक कार्यक्रम का दीदार करेंगे—जब बैकग्राउंड में वर्साय का ऐतिहासिक महल होगा. इसमें भारत के अनुष अग्रवाल शामिल होंगे. उनका घोड़ा, सर कैरमेलो ओल्ड, 'जय हो' की धुन पर थिरकेगा!
क्या यह जयकारा पूरी भारतीय टोली में जान नहीं डाल देगा! हम जल्द देखेंगे. इस हफ्ते, हम पूरे दम-खम के साथ भारत की स्वर्ण पदकों की खोज का जश्न मना रहे हैं. टोक्यो ओलंपिक के बाद भारत की आकांक्षाएं छलांग मार रही हैं. टोक्यो 2020 में हमने अब तक के सबसे अधिक सात पदक प्राप्त किए और एक स्पष्ट बदलाव भी देखा. नीरज चोपड़ा का भालाफेंक में स्वर्ण पदक ट्रैक-फील्ड स्पर्धा में किसी भारतीय का जीता पहला स्वर्ण पदक था.
टोक्यो में भारत के खिलाड़ियों का दल अब तक का सबसे बड़ा था: विभिन्न खेल स्पर्धाओं में 124 एथलीट. पेरिस पहुंचा 117 खिलाड़ियों का दल थोड़ा छोटा है. हालांकि अमेरिका (592) और चीन (388) के मुकाबले यह काफी छोटा दिखता है. फिर भी, भारत के पास ऐसे एथलीटों की अच्छी फसल है जो पदक की दौड़ में हैं; लोगों को उम्मीद है कि स्वर्ण पदकों की अंतिम संख्या दहाई अंकों में होगी.
डिप्टी एडिटर सुहानी सिंह की जुटाई और लिखी प्रोफाइल की हमारी गैलरी में आपको सभी प्रतिभागी, दिग्गज और नए रंगरूटों की झलक मिलेगी. इसमें हमारे फोटो एडिटर, बंदीप सिंह की शानदार, एक्सक्लूसिव तस्वीरें उनकी ऊपरी आभा और आंतरिक विलक्षणता को कैद करती हैं. इवेंट कैलेंडर के साथ, यह आपकी गाइडबुक है, जो आपका ध्यान भारतीय राष्ट्र गान के बजने के साथ ओलंपिक पोडियम पर पहुंचने की संभावना वाले सभी प्रतिस्पर्धियों की ओर खींचने में मददगार होगी.
वरीयता क्रम में नीरज चोपड़ा सबसे आगे हैं. वे सभी आयोजनों और स्पर्धाओं में विजयी रहे हैं. वे ओलंपिक चैंपियन और विश्व चैंपियन दोनों हैं. लेकिन उनके कुछ प्रतिद्वंद्वी 90 मीटर के आगे फेंक चुके हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हल्का-सा पीछे 89.94 मीटर का था. वे मई में दोहा डायमंड लीग में भी दूसरे स्थान पर रहे थे.
लेकिन हरियाणा का यह छोरा जानता है कि बड़े दिन कैसे शांत-चित्त रहना है. उसके बाद 'साचि' हैं—सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की तेजतर्रार बैडमिंटन जोड़ी, जो अक्तूबर 2023 में विश्व नंबर 1 थी. पिछले दो साल से ओलंपिक रजत पदक विजेता तथा अभिनेत्री तापसी पन्नू के पति डैनिश कोच मैथियास बो ने उनके सिंगल-गियर ऑल-आउट अटैक गेम को अधिक रेंज और स्थायित्व के साथ तबाही के खेल में बदल दिया है. सात्विक के नाम बैडमिंटन में सबसे तेज 565 किलोमीटर प्रति घंटे की स्मैश का गिनेस रिकॉर्ड दर्ज है.
इसके बाद 'पावर' गेम्स की महिला सितारों की हमारी आकाशगंगा है. निजामाबाद की जांबाज लड़की निकहत जरीन को फ्लाइवेट/लाइट फ्लाइवेट (2022, 2023) श्रेणियों में दो बार की विश्व चैंपियन होने के बावजूद पेरिस में बिना वरीयता के जाने के साथ कठिन ड्रॉ का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन टोक्यो में चूकने से उसकी भूख और बढ़ गई है. न ही टोक्यो में कांस्य ने साथी मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन की भूख को शांत किया है. 2023 में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण साबित करता है कि इस असमिया लड़की में बहुत क्षमता है.
टोक्यो में रजत पदक विजेता भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने करियर खत्म कर डालने की आशंका वाली कूल्हे की चोट से लड़ाई की. क्वालिफाई करने के लिए उन्हें अपने 49 किलो वजन से तीन गुना अधिक भार उठाना पड़ा. पहलवानों में पूर्व विश्व नंबर 1 विनेश फोगाट को मैट के बाहर कुश्ती में व्यस्त रहना पड़ा, जो उनके वजन वर्ग से कहीं ज्यादा की थी.
अब, उन्होंने अपना पहला ओलंपिक पदक जीतने का मौका पा लिया है, भले ही 50 किलोग्राम वर्ग उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो. आखिरी लेकिन मजबूत, 19 वर्षीया अंतिम पंघाल, हरियाणा की अगली पहलवान हैं, जिनके लिए विनेश को 53 किलोग्राम वर्ग में जगह खाली करनी पड़ी.
टीम स्पर्धाओं में, पुरुष हॉकी टीम ने 41 साल बाद टोक्यो में पदक जीता था और फिर से दौड़ में है. टीम के 11 खिलाड़ी हू-ब-हू वही हैं. लेकिन हमारी पदक तालिका एक और टोली पर निर्भर हो सकती है. भारत के 21 निशानेबाज 27 स्पर्धाओं के लिए तैयार हैं, जो पेरिस के शोरगुल से तीन घंटे की दूरी पर मध्य फ्रांस के शैतोहू शहर में आयोजित की गई हैं.
संभावनाओं के इस खेल में, आपको जितने अधिक मौके मिलेंगे, पदक जीतने की संभावना उतनी ही अधिक होगी. जिस पर नजर रखनी चाहिए, वह है फरीदकोट की 22 वर्षीया विश्व रिकॉर्ड धारक सिफ्त कौर समरा, जिसका 'शांत’ मन दिलजीत दोसांझ के उस पंजाबी पॉप पर लट्टू है, जो उसकी स्कॉर्पियो में डेरा डाले हुए है.
पहली बार भारतीय ओलंपिक टीम 1920 में एंटवर्प में पहुंची थी. दोराबजी टाटा उसकी प्रेरणा और मुख्य प्रायोजक थे; उन्होंने 1924 में पेरिस में भी वही भूमिका दोहराई थी. एक सदी बाद पीछे मुड़कर देखें तो हम ओलंपिक के 24 संस्करणों में सिर्फ 35 पदक गिन पाते हैं. हमेशा से ही सरकारी संस्थागत मदद कमजोर रही है. मोदी सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस या टॉप्सी) अभी लगभग 270 एथलीटों का मदद करती है, लेकिन पेरिस के लिए कुल खर्च 400 करोड़ रुपए है.
यह तीन वर्षों में और कई खेलों में हुआ है. पेरिस में, भारत 45 में से 16 स्पर्धाओं में हिस्सा ले रहा है. इसकी तुलना क्रिकेट से करें तो कुछ रिपोर्ट किए गए अनुमानों के अनुसार, 2022-23 में बीसीसीआइ ने जो कर चुकाया, वह इसका 10 गुना था! प्रशिक्षण सुविधाओं को अभी भी विश्व स्तरीय बनाने की आवश्यकता है. नीरज चोपड़ा मुख्य रूप से विदेश में प्रशिक्षण लेते हैं.
नेत्रा कुमनन भी ऐसा ही करती हैं. 18 वर्षीया भजन कौर हरियाणा में अपने किसान पिता के गेहूं के खेतों में बनाए अस्थायी तीरअंदाजी रेंज में प्रशिक्षण लेते हुए बड़ी हुईं. अभिनव बिंद्रा को भी ओलंपिक स्वर्ण के लिए अपना रास्ता खुद बनाना पड़ा था. खेलों से बेखबर या बेरुखी रखने वाले राजनीति से जुड़े लोग अभी भी खेल संघों पर एकाधिकार जमाए हुए हैं.
अगर भारत को अपनी मानवीय क्षमता के साथ न्याय करना है तो हमें आज के दोराबजी टाटा की जरूरत है. भारत में अब 200 अरबपति हैं. अब समय आ गया है कि हमारे खेल गौरव को बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएं.
हमारे एथलीट अमूमन अनेक भारी बाधाओं को पार करके विजय मंच तक पहुंचते हैं. उन्हें सलाम. हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं.
- अरुण पुरी, प्रधान संपादक और चेयरमैन (इंडिया टुडे समूह)

